आखिर कब सुधरेगे यूपी के सरकारी अस्पताल

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(1) क्या नहीं सुनेगे योगी के डॉक्टर
(2) मरीजों को ड्रेसिंग (पट्टी) के लिए करनी पड़ती है लगभग 500 मीटर की दूरी तय

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(3) नहीं है मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त स्ट्रेचर मरीज को लेकर जाने के देने पड़ते हैं स्ट्रेचर के 100 रुपये
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(4) नहीं है मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था बाहर से लानी पड़ती है दवा
(5) क्या प्राईवेट हॉस्पिटल से भी मंहगा है सरकारी मेडिकल कॉलेज
(6) नहीं सुनते हैं असिस्टेंट डॉक्टर
महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बड़ी यातनाये भुगतनी पड़ रही है आखिर यह सिलसिला कब तक चलता रहेगा आखिर कब सुधरेगे यूपी के सरकारी अस्पताल और कब तक नहीं सुनेगे हॉस्पिटल में उपस्थित योगी के डॉक्टर झाँसी के मेडिकल कॉलेज के किसी भी वार्ड में मरीजों की ड्रेसिंग की कोई व्यवस्था नहीं है मरीजों को ड्रेसिंग (पट्टी) करबाने के लिए चार पांच घंटे तक इन्तजार करना पड़ता है यही नहीं मरीजों को ड्रेसिंग के लिए रात में लगभग 500 मीटर दूरी तय करके इमर्जेंसी में जाना पड़ता है वहां पर मौजूद स्टाफ भी मरीजों की नहीं सुनता है आखिर यह तमाशा मरीज के साथ क्यों होता है और हॉस्पीटल में पर्याप्त स्ट्रेचर भी नहीं है जब मरीज को ड्रेसिंग के लिए जाना पड़ता है तो वार्ड में उपस्थित कर्म चारी को स्ट्रेचर के 100 रुपये देने पड़ते हैं और मरीज को ड्रेसिंग के लिए उसके परिजनों को सौंप दिया जाता है उनके साथ में कोई भी स्टाफ नहीं जाता है यही नहीं मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए दवाओं की भी व्यवस्था नहीं है दवायें मरीजों को हॉस्पिटल के वाहर से मेडिकल स्टोर से लानी पड़ती है इससे यह जान पड़ता है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज का इलाज प्राईवेट हॉस्पिटल से भी मंहगा पड़ता है इसलिए मरीज सरकारी हॉस्पिटल से प्राइवेट हॉस्पिटल की ओर जाने के लिए मजबूर हो जाते हैं क्योंकि प्राइवेट में मरीज की देखभाल तो ठीक से होती है इसका एक कारण यह भी है कि मेडिकल कॉलेज के अधिकतर सरकारी डॉक्टर प्राईवेट हॉस्पिटलो में देखते हैं इसलिए उनका मेडिकल कॉलेज के मरीजों एवं व्यवस्था की ओर कम ध्यान दिया जाता है इसकी जानकारी जब हुई जब मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर 8 में भर्ती मरीजों हरकुअ निबासी एरच एवं शेख बाबू निबासी बमौरी कला के परिजनों ने कहा कि हम लोगों को मरीज की ड्रेसिंग के लिए वार्ड से इमर्जेंसी में भेजा गया और वार्ड में स्ट्रेचर के हम से 100 रुपये लिए गए और इमर्जेंसी में हम लोग ड्रेसिंग के लिए डॉक्टरों से हाथ जोड़कर बिनती करते रहे लेकिन ड्रेसिंग की हम लोगों की वहाँ पर उपलब्ध कोई भी नहीं सुन रहा था और हमें अपने मरीज की ड्रेसिंग के लिए रात 10 बजे से सुबह 3 बजे तक इमर्जेंसी में खड़े खड़े इन्तजार करना पड़ा है बड़ी प्रार्थना के वाद रात 3 बजे बहा पर उपस्थित एक डॉक्टर अभिषेक ने उनके मरीज की पट्टी की हद तो तब हो गई जब मरीज हरकुअर के परिजनों ने कहा कि तीन दिन में उन्हें बाहर से लगभग 18000/ अठारह हजार की दबाये लिखी गई है जिस के सारे बिल उनके पास मौजूद है इससे साफ होता है कि प्राइवेट से भी मंहगा ईलाज सरकारी मेडिकल कॉलेज में हो रहा है आखिर यहां उपस्थित दवायें कहां जा रही है जो मरीजों को दवायें बाहर से लानी पड रही है रिपोर्ट बालमुकुन्द रायक्वार

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