मकर संक्राति पुरे देश का कृषि पर्व है…

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मकर संक्रांति के पर्व की बधाई हो, इस सूर्य कर्क रेखा से होता हुआ मकर राशि में प्रवेश का है। इस दिन सूर्य उत्तारायण बनाता है। भारत में मकर संक्रांति को कृषि पर्व के रूप में देखा जाता है। पूरे भारत में मकर संक्रांति के पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल, गुजरात में उत्तारायण, हरियाणा में माघी, हिमाचल प्रदेश में बोगाली और असम में बीहू के नाम से जाना जाता है।

आज 14 जनवरी को मनाए जाने वाले इस पर्व के दिन लोग गंगा और यमुना नदियों में स्नान करके लिए जाते हैं। लोगों की मान्यता है कि इस दिन गंगा आदि नदी में स्नान करने से उनके पाप कम हो जाते हैं। मकर संक्रांति के मौके पर मेलें लगते हैं जिनमें से कुभ मेला सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। वैसे तो कुभ मेले का आयोजन कई स्थानों पर होता है लेकिन हरिद्वार और उज्जैन में 12 साल बाद कुभ में लगता है।

मकर संक्रांति का पर्व सूर्य देवता को समर्पित है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार सूर्य एक नई यात्रा शुरू करता है जिसकी वजह से सर्दियां गर्मियों में बदलने लगती हैं। सूर्य की प्रक्रिया को उत्तारायण कहा जाता है। महाभारत में भी भीष्म पितामह ने भी उत्तारायण का इंतजार किया था ताकि वह सुकुन से मृत्यु को प्राप्त हो सकें।

खुशियों के त्यौहार के साथ
नई शुरूआत हो चुकी है
आपको मकर संक्रांति की ढेर सारी शुभकामनाएं।