उमा भारती के संसदीय क्षेत्र झाँसी में मेडिकल कालेज का क्या हाल है देख लीजिए

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मरीज राजेंद्र कुमार दुवारा की डॉक्टर प्रदीप शाही शिकायत की जाँच
मरीज राजेंद्र कुमार दुवारा की डॉक्टर प्रदीप शाही शिकायत की जाँच

झाँसी मेडिकल कालेज में मरीजो के इलाज के नाम डॉक्टर शाही करते है “प्रेक्टिकल” । इसका उदहारण है हालही में एक मरीज के दुवारा की गई शिकायत जिसकी जांच में स्पष्ठ हो गया कि डॉक्टर ने लापरवाही की थी

गौरतलब है कि झाँसी मेडिकल कालेज में तैनात डॉक्टर प्रदीप शाही बिना विभागरिय परमिशन के मरीजो को देखने के समय ओपीडी से गयाब रहते है, और मरीजो को देखने की जिम्मेदारी कालेज में पड़ने वाले उन जूनियर को देकर गयाब हो जाते है इसकी शिकायत एक मरीज ने IGRS पर ऑनलाइन की मरीज राजेंद्र कुमार को घुटने में दर्द की शिकायत थी वे पर्चा न्0 177861 लेकर कमरा नम्वर 123 में पहुचे जहा OPD में देखने का दिन प्रदीप शाही का था मगर मगर वहाँ जूनियर डॉक्टर मिले जो अभी मेडिसन के बारे में ठीक से जानते तक नही और
प्रदीप शाही गयाब मिले, जिस कारण मरीज को औपचारिक इलाज ही मिला जिसकी शिकायत मरीज राजेंद्र कुमार ने की जिसकी जाँच रिपोर्ट में आया की, डॉक्टर प्रदीप शाही ने अपने पद व कर्तव्य के निर्वाहन की अपेक्षा व जान बूझकर मनमाना कृत्य किया है जिसके लिए डॉक्टर प्रदीप शाही जिम्मेदार है इसके विरुद्ध विभागीय स्तर से कार्यवाही की जा सकती है,

मरीज राजेंद्र कुमार दुवारा की डॉक्टर प्रदीप शाही शिकायत की जाँच
मरीज राजेंद्र कुमार दुवारा की डॉक्टर प्रदीप शाही शिकायत की जाँच

ऐसे में आखिर मरीज प्रदेश सरकार के इन मेडिकल कॉलेजो में कैसे अच्छे इलाज की उम्मीद कर सकता है, यही कारण है कि इस प्रकार के डॉक्टर ही मरीजो को प्राइवेट नर्सिंग होम में जाने को मजबूर करते है हालही में झाँसी के एक डॉक्टर नवल खुनारा पर एक मरीज को अपने इलाज में लापरवाही से हुई मौत पर हत्त्या का मुकदमा दर्ज करने हो न्यायलय ने आदेश दिया था,

फिलहाल, हम झाँसी के और बुंदेलखंड के उन गरीब मरीजो के लिए दुआ करते हैं कि भगवान उन्हें स्वस्थ रखे. हो सकता है बुंदेलखंड के लोगो ने बुंदेलखंड की सभी की सभी 19 सीटो को भजपा की झोली में वोट देकर सिस्टम बदलने की कुछ उम्मीदें पाली होंगी. मगर बुंदेलखंड और झाँसी में इलाज के लिये मरीज और परिजन छटपटना कोई नई बात नहीं है.
दरअसल पूरे प्रदेश में मेडिकल सिस्टम का यही हाल है. डाक्टरी की पढ़ाई इतनी मंहगी है कि उसे किसी धनपति का बेटा ही पूरी कर सकता है. वह बेटा जिसे न गरीबी का दर्द पता है और न इंसान होने का मर्म. प्रदेश के राजनेता और उनके फॉलोअर मानसिक तौर पर इतने बीमार हैं जिन्हें सिर्फ स्वार्थ दिखता है. मेडिकल सिस्टम पर कोई शिकंजा नहीं है. डॉक्टर स्वतंत्र हैं. कानून से ऊपर. क्योकि उनके लिए धन ही सब कुछ है,

प्रदेश के प्रधानसेवक योगी के उत्तर प्रदेश में ये कोई नया मामला नहीं है. सरकारी सिस्टम इसी तरह फेल है. कोई भी सत्ता इसे सुधारने का जोखिम उठाने को तैयार नहीं।
तो आप भी प्रदेश के उस सरकारी सिस्टम को सलाम करिये जिसमें इंसानियत का भाव नहीं है. वह एक बाजार है. जहां हर चीज की बोली है. लोकतंत्र की ये तकलीफदेय तस्वीर है. आज़ादी इसी का नाम है..? देश में जश्न की तैयारी शुरू हो गई है. 15 अगस्त को आज़ादी की सालगिरह पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर लालकिले पर तिरंगा फहराएंगे और योगी विधानसभा में आप उनका सालाना संबोधन सुनने को तैयार रहिए..!!

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