विधान सभा चुनाव 2017: सूचना विभाग लस्त प्रत्याशी मस्त..

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झाँसी का मीडिया सेंटर सूचना अधिकारी गायब
झाँसी का मीडिया सेंटर सूचना अधिकारी गायब

यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में पैसे देकर विज्ञापन को खबर के रूप जैसी प्रचार सामग्री समाचार के रूप में प्रकाशित या प्रसारित कराना और करना राजनैतिक दलों व प्रत्याशियों को भारी पड़ेगा। जिला प्रशासन चुनाव आयोग की ओर से जारी गाइडलाइन पूरी तरह अनुसरण करने के प्रति है परंतु झाँसी में कितना गंभीर होता है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि झाँसी का जिला सूचना विभाग के केवल चपरासी के दम पर चुनाव संपन्न करवायेगा? , पेड़ न्यूज़ पर निगरानी झाँसी में चपरासी करते है , सूचना विभाग के अधिकारी ज्यादातर  जिले में रहते ही नही , उनकी जगह प्राइवेट व्यक्ति से प्रेस नोट त्यार करवाया जाता है , चुनाव आयोग पेड न्यूज पर पूरी तरह गंभीर  रहता है अगर बात पिछले लोकसभा चुनाव  के समय मीडिया में निगरानी समिति बनाई गई थी सूचना विभाग की मिलीभगत से ऐसे लोगों को नामित कर दिया जाता है जिनके पास निगरानी का ना तो समय होता है ना वह निगरानी कर सकते हैं जबकि आयोग के नियम अनुसार निगरानी समिति समस्त न्यूज़ चैनल एवं प्रिंट मीडिया न्यूज़ पोर्टल सोशल मीडिया पर पूरी तरीके से निगरानी रखते हुए प्रत्याशियों को हाइलाइट करने वाली खबरों को विज्ञापन मानते हुए उसका खर्च प्रत्यासी के खाते में जोड़ने का काम करें पिछले लोकसभा चुनाव में इस प्रकार की कार्यवाही का आभाव रहा जबकि प्रत्याशियों ने धड़ल्ले से पेड न्यूज का सहारा लेते हुए समाचारपत्रों निवेश चैनलों में अपने विचार करवाए मगर झांसी का सूचना विभाग लापरवाही  के कारण ना तो उस प्रकार की खबरों का खर्च प्रत्याशियों के खाते में जोड़ा की जा सका ना ही ऐसे प्रत्याशियों पर कार्रवाई हो पाई उसी इतिहास को जिला सूचना विभाग झांसी पुनः दोहराने की ओर अग्रसर है विभाग की कार्यवाही से तो अभी तक ऐसा ही लगता है

क्या है मिडिया मॉनिटरिंग समिति

जिला स्तर पर मीडिया सर्टिफिकेशन व मॉनिटरिंग समिति गठित की जाती है। जिससे समाचार माध्यमों पर नजर रखी जाती है। और अगर पेड न्यूज का मामला पकड़ में आता है, तो प्रकाशित या प्रसारित समाचार को विज्ञापन की दर से संबंधित प्रत्याशी या दल के खाते में राशि जोड़ी जाती है। इसके साथ ही संबधित समाचार माध्यम की शिकायत चुनाव आयोग सहित प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया से भी की जाएगी। जिला स्तर की मीडिया प्रमाणीकरण और निगरानी समिति समाचार पत्रों, टीवी चैनलों, केबल टीवी, रेडियो और सोशल मीडिया आदि पर जारी की जाने वाली प्रचार सामग्री पर नजर रखी जाती है

प्रत्याशियों के खर्च की सीमा

निर्वाचन आयोग के चुनाव खर्च की सीमा तय करने के बाद तमाम राजनीतिक दल और प्रत्याशी पेड न्यूज का सहारा लेते हैं। इसके तहत विज्ञापननुमा सामग्री को समाचारों के रूप में प्रकाशित एवं प्रसारित कराया जाता है। डीएम ने बताया कि विधानसभा चुनाव में शुचिता को कायम रखने के लिए निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिला स्तर मीडिया प्रमाणीकरण और निगरानी समिति बनाई गई हैं।
इस समिति में जिला निर्वाचन अधिकारी व डीएम- अध्यक्ष, उप सूचना निदेशक सदस्य व सचिव, विधानसभा क्षेत्रों के रिटर्निंग अधिकारी- सदस्य एवं दूरदर्शन/आकाशवाणी के अधिकारी अथवा संवाददाता-सदस्य के साथ ही मीडिया क्षेत्र के विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाता है, जिससे पारदर्शी तरीके से आकलन किया जा सके। सभी प्रत्याशियों को आर्थिक निवेश के लिए समान स्तर लाने के लिए आयोग ने चुनाव खर्च की सीमा तय की है। यह सीमा 28 लाख रुपये प्रति प्रत्याशी रखी गई है। ऐसे में प्रत्याशी के चुनाव पर खर्च होने वाली तमाम राशि का ब्योरा रखने के लिए अलग से समिति बनाई गई है। आयोग का उद्देश्य धनबल के बिना चुनाव कराने का हयोग्य प्रत्याशी चुनकर आए।