सूचना विभाग नही होने देगा निष्पक्ष चुनाव..

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झाँसी का मीडिया सेंटर सूचना अधिकारी गायब
झाँसी का मीडिया सेंटर सूचना अधिकारी गायब

“सूचना विभाग नही होने देगा निष्पक्ष चुनाव चुनाव आयोग की मंशा को पलीता लगता सूचना विभाग झाँसी”

झाँसी:- भारत निर्वाचन आयोग किसी भी प्रकार से मतदाता को गुमराह करने के तरीको पर रोक लगाने के हर संभव प्रयास कर रहा है, इसी क्रम में इस बार प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ सोशल मीडिया पर निगरानी करने के निर्देश दिए हैं इसके लिए जिला स्तर पर एमसीएमसी टीम भी बना दी गई है लेकिन सोशल  (फेसबुक ,वाट्सएप,टिवीटर ) मीडिया पर निगरानी का तंत्र विकसित नहीं हो सका भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर आदर्श आचार संहिता के पालन के लिए झाँसी जनपद में एमसीएमसी गठित कर दी गई है, MCMC कमेटि के सदस्यो को केवल गाड़ी और स्वाम के प्रवेश / गाड़ी पास से मतलब होता है उनका खबरों से कोई सरोकार नही, यानि कि झाँसी में गठित MCMC कमेटि (कहाबत के अनुसार) केवल धोड़े को पानी दिखाने का काम कर रही है, और भारत निर्वाचन आयोग की मंशा पर पानी फेरने का काम कर रही है , MCMC कमेटि प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ सोशल मीडिया के कार्यकलाप पर भी नजर रखेगी व्यय प्रेक्षक ने इस टीम की बैठक में सोशल मीडिया पर नजर रखने पर जोर दिया था मगर समिति के सदस्य केवल सुबह उस रजिस्टर पर दस्तख़त करके चले जाते है जिसे सूचना विभाग झाँसी लिखकर देता है, और ये वे खबरे होती है जिन्हें सूचना विभाग के चपरासी चुनते है, जिस पेड़ न्यूज़ को चपरासी चुनने का काम करेंगे उन खबरों का क्या होगा ये तो राज्य चुनाव आयोग ही तय कर पायेगा, झाँसी सूचना विभाग में लापरवाही किस कदर है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 2012 के विधानसभा और 2014 के लोक सभा चुनावो में सुचना विभाग ने प्रत्यासियो के एजेंटो तक के मीडिया पास बना दिए थे, इतना ही नही शराब की बोतल और ५०० रूपये तक में घूमने के लिए भी पास बन जाते है. सूचना विभाग में. सूचना विभाग के अधिकारी से जब भी किसी ने कोई शिकायत की तो उनका कहना होता है कि मेरा क्या कोई उखाड़ लेगा केवल ट्रांसफर कर सकता है और वो में चाहता भी हु। अब भला चुनाव आयोग कैसे निष्पक्ष चुनाव की कल्पना कर सकता है. सोशल मीडिया शुरू से ही अफवाहों का अड्डा रहा है और चुनाव में तो ग्रुप बनाकर इस अफवाहों को सच बनाने के लिए संगठित कार्य किया जा रहा है सोशल मीडिया पर बगैर अनुमति के चुनाव प्रचार विज्ञापन चल रहे हैं जिनपर आयोग द्वारा कार्यवाही के निर्देश है मगर टीम और विभाग शिकायतों के  इन्तजार में है और किसी भी शिकायत मिलने पर इस पर कार्यवाही की जा सकती है, मगर उससे पहले ही विभाग उक्त प्रत्यासी को शिकायत की सूचना देखर शिकायत वापस करवा लेता है।

“लोकतंत्र का सबसे बड़ा अधिकार आपका अपना “मत” अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करे जनहित में जारी”

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