मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का वो प्यारा साथी कौन , घर खानदान छोड़ जिसके साथ हो लिये

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Lucknow:लोकसभा चुनाव में जीत के बाद देश के प्रधान मंत्री बने नरेंद्र मोदी ने लोगों के सामने विकास जो मॉडल प्रस्तुत किया, उसमे वो लोगो को भरोसा दिलाने में सफल रहे, उन्होंने जो विकास की परिभाषा लोगों के सामने रखी वो उनके पक्ष में रही और जिसके फलस्वरूप लोकसभा में बीजेपी भारी बहुमत से विजयी हुई थी। आज भी प्रधानमंत्री मोदी का एजेंडा बदला नहीं है. वे जहां भी भाषण देते है. देश के विकास से सम्बंधित बातें जरूर होती है।

अब लगता है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपना साथी “विकास” को बना लिया जो उन्होंने अपने कार्यकाल में प्रदेश में विकास कार्य किये,वो सत्ता पाने के लिए नरेंद्र मोदी की राह पर ही चल रहे है. जहां एक ओर वो कहते हैं कि समाजवादी पार्टी प्रदेश में समाज के सभी वर्ग, चाहे किसी भी धर्म का हो उनके उत्थान के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी, वहीं दूसरी और इलेक्शन से पहले अपनी पार्टी का तमाम फोकस वो उत्तर प्रदेश की आधारिक संरचना का विकास और टेक्नोलॉजिकल उन्नति के लिए लगा दिया. छात्रों को लैपटॉप बांटना, लखनऊ में मेट्रो की स्थापना करना आदि कई कार्य उन्होंने किया और इसका मकसद ये था की युवाओं और नौजवानों को समाजवादी पार्टी के तरफ झुकाया जा सके. शायद इसमें वो कुछ हद तक सफल भी हो रहे है। 2014 लोकसभा चुनाव में युवाओं का मत मोदी को ही गया था। और अब प्रदेश में अखिलेश अपने कार्यकाल के विकास की आंधी और युवा लेकर चले है। अपने पिता मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल यादव के साये से उभर कर अब वो अलग राह पर चल पड़े है। लोग अब उन्हें सीरियस राजनेता के रूप में लेने लगे हैं, जिनका एजेंडा बिलकुल अलग हैं. जहां विकास का पैमाना सर्वोपरि है और जहां चाटुकारों और अपराधियों की कोई जगह नहीं है। एक तरह से मोदी की ही तरह उन्होंने पार्टी में अपनी मौजूदगी को मजबूत किया है। परिणाम सबके सामने है, समाजवादी पार्टी की टूट के बाद अधिकतर विधायक, सांसद और एमएलसी उन्हें ही सपोर्ट कर रहे है।

प्रधानमंत्री की ही तरह मानो अखिलेश यादव ने भी इलेक्शन डेट ऐलान होने से पहले अपने उपलब्धियों को गिनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इस पब्लिसिटी ड्राइव में उन्होंने अखबार, टेलीविज़न, सोशल मीडिया, विज्ञापन, रेडियो और बिलबोर्ड आदि सभी माध्यम का बखूबी इस्तेमाल किया है। मोदी जिस तरह ट्विटर का इस्तेमाल पब्लिक से इंटरैक्शन और सरकार के एजेंडा को बढ़ाने के लिए करते हैं, उसी तरह अखिलेश यादव भी फेसबुक में ‘टॉक टू योर सीऍम’ कैंपेन चलाया। नरेंद्रमोदी और अखिलेश यादव दोनों का राजनीतिक और फॅमिली बैकग्राउंड अलग-अलग है. एक चाय बेचता था तो दूसरा राजनीतिक घराने से सम्बन्ध रखता है। लेकिन दोनों को देश का नब्ज टटोलने में महारथ हासिल है। दोनों में युवाओं की पकड़ है, उनका पोलिटिकल एजेंडा का बेस विकास पर आधारित है, जिससे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अधिक से अधिक हो.

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