4 अरब रुपये की परियोजनाओं का खाका तैयार

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जालौन-जिले में तरक्की के द्वार खोलने के लिये विभिन्न विभागों ने तेरहवें वित्त आयोग के सामने महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का खाका तैयार कर 4 अरब रुपये के बजट की मांग की है। तेरहवें वित्त आयोग का कार्यकाल 10 वर्ष का है जिसके तहत पांच-पांच वर्ष के 2 चरणों में स्वीकृतियां दी जायेंगी।

जालौन जिले में अभी भी स्कूल, सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधायें राष्ट्रीय मानक से काफी पीछे है जिसके कारण इस जनपद की ज्यादातर आबादी गरीबी की रेखा के नीचे गुजर बसर करती है। मुख्य रूप से यहां के लोगों की जीविका का साधन खेती है लेकिन सिंचाई न होने से कृषि उत्पादन में भी राष्ट्रीय औसत से जिला काफी पीछे है। विकास प्रक्रिया में ग्रहण साबित हो रहे इन कारकों को दूर करने के प्रयास की सफलता तेरहवें वित्त आयोग से संभावित स्वीकृति के जरिये होने की उम्मीद की जा रही है।

सौ वर्ष पुरानी बेतवा नहर प्रणाली यहां की खेती के लिये सिंचाई का मुख्य स्त्रोत है जिसकी हालत काफी जर्जर हो चुकी है। नहरों की सफाई व सुदृढ़ीकरण के लिये बेतवा नहर प्रखंड प्रथम ने 16 करोड़ 92 लाख रुपये व द्वितीय ने 20 करोड़ 88 लाख रुपये का खाका वित्त आयोग को भेजा है। अन्य सिंचाई साधनों में डाल नहर ने 18 लाख 70 हजार रुपये, लघु सिंचाई ने 11 करोड़ 75 लाख रुपये, नलकूप प्रथम ने 32 करोड़ 97 लाख रुपये के प्रस्ताव दिये है। बबूल, खैर, कपिल, शीशम, नीम व पलाश के वनीकरण के लिये वन विभाग ने 72 करोड़ 92 लाख रुपये, ग्रामीण क्षेत्रों में नये पेयजल नलकूपों की स्थापना हेतु जल संस्थान ने 23 करोड़ 30 लाख रुपये, जल निगम ने ग्रामीण क्षेत्र के लिये 18 करोड़ 46 लाख रुपये, शहरी क्षेत्र के लिये 11 करोड़ 71 लाख रुपये, बेसिक शिक्षा विभाग ने 21 करोड़ 55 लाख रुपये, मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय ने 38 लाख 70 हजार रुपये, जिला पंचायत ने 10 करोड़ और पंचायती राज विभाग ने 23 लाख 50 हजार रुपये के प्रस्ताव तैयार किये है। इन परियोजनाओं को मूर्त रूप मिलने से पिछड़ेपन के अभिशाप की जकड़ में सिसकते जिले में आधारभूत संरचनाओं का सुदृढ़ीकरण हो सकेगा जो न केवल विकास में सहायक होगा बल्कि गरीब आबादी के निजी उत्थान में भी इससे काफी मदद मिलेगी। इस कारण तेरहवें वित्त आयोग की स्वीकृतियों से जिले की जनता की व्यापक उम्मीदें जुड़ी हुयी हैं।