220 मीटर ऊंची चिमनी के ढहने के बाद बचाव व राहत कार्य में तेजी

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झांसी के  पारीछा थर्मल विद्युत तापीय परियोजना में निर्माणाधीन 5वीं यूनिट की 220 मीटर ऊंची चिमनी के ढहने के बाद बचाव व राहत कार्य में तेजी आ गयी है। फिलहाल आज बुधवार को सुबह एक शव बरामद किया जा चुका है, जबकि दो लोगों के दबे होने की आशंका पुख्ता हो गयी है। वैसे बताया जा रहा है कि मलबे से छह घायल मजदूरों को निकाला जा चुका है, जिनमें से तीन गंभीर घायलों का इलाज चल रहा है।

पारीछा परियोजना में पांचवीं यूनिट में निर्माणाधीन 220 मीटर ऊंची चिमनी सोमवार दोपहर तेज आंधी के दबाव में ढह गयी। आशंका थी कि चिमनी के अंदर काम कर रहे दर्जनों मजदूर दब गये, लेकिन अब तक सिर्फ दो लोग लापता दिख रहे है। बचाव कार्य के लिए सोमवार शाम सेना को मौके पर बुला लिया गया। मंगलवार सुबह जिलाधिकारी राजशेखर व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विनोद दोहरे ने दुर्घटनास्थल के पास डेरा डाल लिया। पूर्वाह्न केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन आदित्य मौके पर पहुंचे। इसके बाद निजी बुलडोजर मंगवाकर मलबा हटाने का काम शुरू किया गया।

इस बीच प्रशासन ने चिमनी के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री के नमूनों को जांच के लिये जब्त कर लिया। जिलाधिकारी ने बताया कि यह नमूने प्रशासन के पास रहेगे और लखनऊ से आने वाली एजेंसी से घटना की जांच करायी जायेगी मगर मलवे को देख कर लगता है की निर्माण में जो शम्ग्री का प्रायोज किया गया है उस में कमी है सीमेंट भी नकली और रख मिला लगता है और सरिया तो vo लगा है जिशे लोग अपने घर में भी नही लगते है  । जिलाधिकारी के अनुसार, हादसे में अधिकांश मजदूर सुरक्षित बच गये है, लेकिन सिर्फ दो मजदूर लापता हैं और उन्हीं के परिजन वहां कोहराम मचा रहे है, जिससे अंदेशा है कि दो लोगों की ही मौत हुई। इस घटना में लगभग 35 करोड़ से अधिक की क्षति होने का अनुमान है।

एक-दूसरे पर फोड़ रहे ठीकरा

पारीछा हादसे को इस गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है कि निर्माण कराने वाली संस्था नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन के कार्य की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थी और इस संबंध में कॉरपोरेशन को सचेत किया गया था। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि उक्त संस्था के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए केंद्र को पत्र लिखें।

वहीं, केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि इस मामले में दोषी निर्माण एजेंसी के खिलाफ जांच कराकर कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिये। चिमनी जिस समय टेढ़ी दिखने की शिकायत राज्य सरकार से की गयी थी, उसी समय या तो काम रोक देना चाहिये था या चिमनी गिराकर दूसरा निर्माण किया जाना चाहिये था।



Vikas Sharma
bundelkhandlive.com
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