20 प्रतिशत व्यापारी ही कर सके ई-रिटर्न

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झांसी- वाणिज्य कर विभाग ने ऐसे व्यापारी, जिनकी सालाना बिक्री एक करोड़ रुपए या इससे ऊपर है, के लिए ई रिटर्न फाइलिंग जरूरी कर दी है।तमाम प्रयासों के बावजूद वाणिज्य कर विभाग में ई-रिटर्न शत-प्रतिशत नहीं हो पाया। यहां कुल व्यापारियों की संख्या का 20 प्रतिशत का आंकड़ा ही ई-रिटर्न दाखिल कर पाया है। व्यापारी इसमें लापरवाही बरत रहे है। हालांकि इस प्रकार के व्यापारियों के प्रति वाणिज्य कर विभाग ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। इसमें ई रिटर्न फाइल न करने वालों पर जुर्माना लगाने व उनके प्रार्थना पत्रों पर विचार नहीं करने के निर्देश है।

वाणिज्य कर कमिश्नर अनिल संत ने भी निर्देश दिए है कि जिन व्यापारियों को ई रिटर्न फाइलिंग करनी है, उनकी मैनुअल रसीद मई माह में किसी भी दशा में नहीं काटी जाए। एडीशनल कमिश्नर की अनुमति मिलने पर ही रसीद काटी जा सकती है। आयुक्त ने यह भी निर्देश दिए है कि ई फाइलिंग से भरे जाने वाले रिटर्न को सम्बन्धित निर्धारक अधिकारी के कम्प्यूटर से व्यापारी फोल्डर बना कर डाउनलोड किया जाए।

एडीशनल कमिश्नर ने स्वीकारा कि ई-रिटर्न के मामले में रिस्पांस अच्छा नहीं है जबकि इस सम्बन्ध में विभागीय व्यवस्थाएं दुरुस्त है। हालांकि अधिसंख्य व्यापारियों के पास इन्फ्रास्ट्रक्चर का अभाव है। उन्होंने बताया कि यहां एक करोड़ के दायरे में आने वाले लगभग 700 व्यापारी है, किन्तु इनमें से 20 प्रतिशत ने ही ई-रिटर्न किया है। बाकी मैनुअल रिटर्न दाखिल कर रहे है। उन्होंने बताया कि व्यापारियों को ई-फाइलिंग के प्रति प्रेरित किया जा रहा है।