होम्योपैथिक अस्पताल में चिकित्सकों और दवाइयों का अभाव

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कम पैसे में अच्छी चिकित्सकीय सुविधा देने वाले होम्योपैथिक अस्पताल उपेक्षा के चलते खुद बीमार नजर आ रहे है। इनमें चिकित्सकों और अच्छी दवाइयों दोनों का अभाव है। जनपद के 21 अस्पतालों में 9 डाक्टर ही स्थायी है जबकि 5 संविदा पर कार्य कर रहे है। वहीं पर दवाओं के लिये इस वर्ष विभाग के पास सिर्फ 1 लाख 5 हजार का बजट आया है।

जिला अस्पताल उरई, विवेकानंद कालोनी उरई, इमिलिया कोंच, सामी, महेशपुरा, पहाड़गांव, बिलायां, संदी, हरचंदपुर, मगरायां, कालपी, जखा, जालौन खुर्द, नावर, निनावली, ऊमरी, अमखेड़ा, औरेखी, जगनेवा सहित 21 स्थानों पर होम्योपैथिक अस्पताल है जिनमें 20 से 25 तक नये मरीज प्रतिदिन आते है लेकिन कई अस्पतालों में चिकित्सक न होने के कारण फार्मेसिस्ट ही लोगों का इलाज कर रहे है। इन अस्पतालों में कुल 9 डाक्टर स्थायी रूप से तैनात है जबकि 5 डाक्टरों को संविदा पर रखा गया है। 7 अस्पताल पूरी तरह खाली है। होम्योपैथिक चिकित्सालयों में अच्छी महंगी दवाइयों का भी अभाव है जिससे लोगों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। काम चलाऊ दवाओं से मरीजों को बहलाने की कोशिश की जा रही है। प्रभारी जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डा.आरपी कमल का कहना है कि होम्योपैथिक पद्धति हर मर्ज में कारगर है। त्वरित आराम देने वाली दवाइयां भी होम्योपैथिक में है लेकिन जनपद के अस्पतालों में ऐसी कारगर दवायें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। डा.कमल ने बताया कि वर्ष 2009-10 में दवाओं के लिये विभाग के पास 1 लाख 5 हजार का बजट आया था। इस लिहाज से 5 हजार रुपये प्रति अस्पताल के हिसाब से दवायें खरीदी गयीं। इन्हीं से पूरे साल काम चलाया जायेगा। डा.कमल ने बताया कि होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है लेकिन महंगी व असरकारक दवायें न मिलने से लोग निराश हो जाते है। उन्होंने बताया कि 40 से 50 मरीज वह खुद रोज देखते है, अगर विभाग की उपेक्षा न की जाये तो अच्छे परिणाम सामने आयेंगे।