हाट कुक योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी

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जालौन- आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती धात्रियों और बच्चों को पका हुआ पौष्टिक भोजन मिला हो या न मिला हो लेकिन संबंधित अधिकारियों ने कागजों में इसके लिया पूरा बजट खर्च दर्शा दिया।  जांच में गड़बड़ी पकड़ी गई और संबंधित अधिकारियों को सामान खरीद के बिल वाउचर समेत खर्चा का सत्यापित ब्योरा देने का आदेश दिया गया लेकिन किसी भी ब्लाक से खर्च का सही ब्योरा पेश नहीं किया जा सका लिहाजा धांधली की बात उजागर हो गई और बाल विकास परियोजना अधिकारियों का वेतन रोक दिया गया। इस प्रक्रिया को भी लगभग एक साल बीतने को है और अभी तक कहीं से भी सहीं रिपोर्ट नहीं मिली। इस गड़बड़ी में नुकसान बच्चों का ही हुआ है। करीब आठ माह से सभी ब्लाकों में हाट कुक योजना बंद हैं।

बाल विकास परियोजना के तहत जिले के चार ब्लाकों माधौगढ़, कोंच, डकोर तथा जालौन के 567 आंगनबाड़ी केंद्रों पर हाट कुक योजना चालू की गई थी। प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर इसके लिए साढ़े सात हजार रुपये का बजट हर महीने निर्गत किए जाने के प्रावधान है। पांच वर्ष की उम्र तक के बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को आंगनबाड़ी केंद्र पर ही पका हुआ पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है ताकि उनको कुपोषण से बचाया जा सके। यहां कागजों में तो उक्त योजना में हाट कुक का संचालन दर्शाया गया लेकिन हकीकत में कई गांवों के आंगनबाड़ी केंद्रों पर कभी बच्चों और महिलाओं को पका हुआ भोजन नहीं मिला। यहां तक कि ग्रामीणों को पता भी नहीं है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर पका हुआ भोजन बांटने की योजना भी चल रही है लिहाजा जानकारी नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने भी कभी इसको लेकर शिकायत नहीं की। इसके बावजूद पिछले साल भौतिक सत्यापन के दौरान गड़बड़ी पकड़ में आ गई। परियोजना अधिकारियों ने फाइलों में खर्चा तो पूरा दर्शा दिया था लेकिन किसी भी सामान की खरीद की रसीद बिल में नहीं लगी थी लिहाजा एक एक सामान का सही सही विवरण बिल वाउचर समेत देने का आदेश सीडीपीओ को दिया गया। सही आख्या पेश नहीं होने तक सभी का वेतन रोक दिया गया है। लगभग एक साल बीतने के बावजूद उक्त ब्लाकों में से कहीं से भी सही रिपोर्ट नहीं आई लिहाजा सीडीपीओ का वेतन भी निर्गत नहीं हुआ हालांकि इसमें बड़ा नुकसान बच्चों और महिलाओं को ही हुआ क्योंकि उक्त धांधली के बाद चारों ब्लाकों में हाट कुक योजना बंद हो गई थी जो अभी तक चालू नहीं हो सकी है। हाट कुक योजना का तो बंटाढार हो ही गया पुष्टाहार वितरण में भारी गड़बड़ी हुई है। बच्चों का पुष्टाहार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां सुपरवाइजर के साथ मिलकर जानवरों के रातब के तौर पर बेच देती हैं। गौरतलब है कि जिले में 1444 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। परियोजना के संचालन के लिए 10 सीडीपीओ के सृजित पदों के सापेक्ष 6 की की तैनाती है, रामपुरा, कदौरा, जालौन व डकोर में प्रभारी अधिकारी से काम चलाया जा रहा है। जिनके मातहत 44 मुख्य सेविकायें और 1417 कार्यकत्रियां और इतनी ही संख्या में सहायिकायें कार्य कर रहीं हैं।