हवा से बिजली- जगमग होगे गांव

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महोबा। भारी लागत के कारण वैकल्पिक ऊर्जा संयंत्रों के उपयोग को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा। हालांकि मुख्यालय के पास ही मामना गांव में हवा से बिजली बनाने का अध्ययन किया जा रहा है। सब कुछ ठीक ठाक रहा तो आने वाले दो तीन साल में मामना सहित तमाम गांव जगमग हो जायेंगे।
वैकल्पिक ऊर्जा ग्लोबल वार्मिग पर नियंत्रण का कारगर उपाय हो सकती है। यही कारण है कि केंद्र सरकार भारी लागत के बाद भी इसे निरंतर बढ़ावा दे रही है। नेडा के परियोजना अधिकारी अजय शुक्ला बताते हैं कि सरकार ने इस संदर्भ में देय सभी अनुदान बंद कर दिये हैं। तमाम योजनाओं का विस्तार रुक गया है। वैकल्पिक ऊर्जा संयंत्रों में मात्र सोलर लैंप की बिक्री ही यदा कदा होती है। सोलर कुकर व सोलर हीटर को लोगों ने ज्यादा पसंद नहीं किया। वह बताते हैं केंद्र सरकार ने कुछ ठोस योजनाएं बनायी हैं। जिसमें ग्रामीण विद्युतीकरण शामिल है। नेडा के कर्मचारी इसका सर्वे कर रहे हैं। सौ से तीन सौ की आबादी के छोटे मजरे जहां अब तक विद्युत नहीं पहुंची इस योजना में शामिल किये गये है। खन्ना क्षेत्र के ग्राम बन्नी के वरमपुर डेरा, रैवारा के यादव डेरा व परमा का डेरा , मकरबई के चौकीदार का डेरा तथा सिजहरी के सुभाष नगर सहित एक दर्जन मजरों को इसके लिए चयनित किया गया है। यहां सोलर होम व स्ट्रीट लाइट लगाये जायेंगे। एक अन्य महत्वपूर्ण योजना में हवा से बिजली बनाने का प्रयास के लिए मुख्यालय के पास ही स्थित ग्राम मामना का चयन किया गया है। यह योजना महोबा के अलावा चित्रकूट व गोरखपुर में भी शुरू की गई है। प्रथम चरण में गांव में 50 फिट ऊंचाई पर एनीमोमीटर नाम का सयंत्र लगाया गया है। यह प्रति घंटे की वायु वेग की स्थिति बतायेगा। इसकी रिपोर्ट सेंटर आफ विंड एनर्जी चेन्नई भेजी जायेगी। वायु वेग मानक के अनुरूप पाया गया तो एनोड जनरेटर लगा विद्युत उत्पादन किया जायेगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रतिदिन एक सौ मेगावाट विद्युत का उत्पादन हो सकेगा। इससे मामना सहित कई गांव भी जगमग हो जायेंगे।