हजारों खर्च, हालात जस के तस

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पानी वाली धर्मशाला से नहीं हट पा रही गंदगी, मछलियों की मौत का भी नहीं पता चला कारण, महापौर ने किया निरीक्षण, कमेटी गठन पर विचार

पानी वाली धर्मशाला की सफ ाई पर हजारों रुपए खर्च होने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। नगर निगम ने पम्प लगवाकर पानी तो निकाल दिया है, परंतु कीचड़ से छुटकारा नहीं मिल पाया है। उधर निरंतर मछलियों के मरने के कारणों का भी पता नहीं चल पाया है। महापौर ने आज धर्मशाला का निरीक्षण कर नाराजगी प्रकट की।

आस्था का केंद्र पानी वाली धर्मशाला में पलने वाली मछलियां पिछले दिनों अचानक मरने लगीं थीं। सैकड़ों मछलियों की मौत और सिलसिला जारी रहने पर जागे नगर निगम प्रशासन ने धर्मशाला का पानी निकालने की प्रक्रिया शुरू की। दो पम्प लगाकर पानी निकाला जाने लगा तो वहीं मत्स्य विभाग को पत्र लिखकर मछलियों की मौत की वजह जानने की कोशिश भी की गई। पानी निकालने में नगर निगम द्वारा हजारों रुपए खर्च कर दिए गए, लेकिन धर्मशाला की स्थिति में रत्ती भर भी सुधार नहीं आया। बताया गया कि पानी वाली धर्मशाला में नीचे इतना कीचड़ जमा है कि उसे निकालना आसान नहीं है। गहराई का अंदाजा न होने के कारण कर्मचारियों को अंदर उतारना जोखिम भरा हो गया है। उधर, मत्स्य विभाग ने भी अभी तक मछलियों के मरने की रिपोर्र्ट नगर निगम को नहीं सौंपी है। जिलाधिकारी स्वयं इस पर निर्देश जारी कर चुके हैं। शनिवार को महापौर किरण वर्मा ने अधिकारियों के साथ पानी वाली धर्मशाला का निरीक्षण किया। उन्होंने सफाई व्यवस्था पर नाराजगी प्रकट की। महापौर ने धर्मशाला के साथ ही आस-पास के नालों की सफाई कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही धर्मशाला को हमेशा स्वच्छ रखने के लिए क्षेत्रीय लोगों की कमेटी गठित करने का भी सुझाव दिया। महापौर ने कहा कि कमेटी सदस्यों द्वारा देखरेख की जाएगी तो धर्मशाला में कचरा नहीं डाला जाएगा। इस अवसर पर अधिशासी अभियंता सतीश चंद्रा, अवर अभियंता व सफाई निरीक्षक के अलावा संजीव श्रंगीरिषी, संजीव अग्रवाल लाला आदि भी मौजूद रहे।

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