स्वच्छता अभियान में घोटाला उजागर

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ग्वालियर- समग्र स्वच्छता अभियान में तीस हजार परिवारों के हक पर प्रशासनिक नुमाइंदों ने डाका डाल दिया। शिवपुरी में इस अभियान के तहत शौचालय निर्माण के नाम पर 6.17 करोड़ रुपए का घोटाला उजागर हुआ है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने प्रारम्भिक जांच के बाद योजना के समन्वयक व जिला तथा जनपद सीईओ के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, शिवपुरी जिले में वर्ष 2004 में समग्र स्वच्छता अभियान की शुरूआत की गई थी। इस योजना के तहत बीपीएल कार्डधारकों के लिए शौचालय बनाए जाने थे। शुरु में प्रति बीपीएल कार्डधारक को शौचालय निर्माण के लिए पांच सौ रुपए दिए जाते थे, लेकिन सन् 2005 में यह राशि बढ़ाकर 2500 रुपए कर दी गई।

विद्यालय व आंगनबाड़ी को इस कार्य के लिए 25 हजार रुपए व सामुदायिक विकास केन्द्रों को 2 लाख रुपए की राशि आवंटित की जाती थी। योजना में 30 हजार से अधिक बीपीएल कार्डधारकों के घरों में शौचालय बनाने का दावा करते हुए 6.17 करोड़ रुपए की राशि खर्च कर दी गई जबकि एक हजार परिवारों के यहां भी नहीं बनाए गए।

समग्र स्वच्छता अभियान में बीपीएल कार्डधारकों के घर शौचालय बनाने के बिल व प्रस्ताव जिला व जनपद पंचायतों में पहुंचते थे। यहां से ये बिल पंचायतों में भेजे जाते थे। पंचायतों में बिलों का फर्जी वेरीफिकेशन कर राशि का आहरण कर लिया जाता था।

समग्र स्वच्छता अभियान के तहत घोटालेबाजों ने फर्जी आंकड़ों के जरिए राष्ट्रपति पुरस्कार भी प्राप्त कर लिया। पोहरी ब्लाक के कृष्णगंज गांव के सभी घरों में शौचालय बनाने का दावा करते हुए निर्मल ग्राम का प्रस्ताव राष्ट्रपति कार्यालय में वर्ष 2005-06 में भेजा। इसपर निर्मल ग्राम पुरस्कार के रूप में उक्त ग्राम को 2 लाख रुपए की राशि मिली। इस 2 लाख रुपए की राशि से गांव में नाली निर्माण करना बता दिया गया, जबकि ऐसा नहीं किया गया। यह मामला भी ईओडब्ल्यू की प्रारम्भिक जांच में उजागर हुआ है।

करोड़ों के घोटाले की शिकायत पर ईओडब्ल्यू ने समग्र स्वच्छता अभियान के समन्वयक सत्यमूर्ति पांडे व जिला व जनपद सीईओ के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। इस मामले में जांच आगे बढ़ने पर शिवपुरी की 8-9 पंचायतों के अधिकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाएगा। सरपंच भी प्रकरण के दायरे में आ सकते हैं।