सैतीसवें राष्ट्रीय रामायण मेला का समापन

0
231

चित्रकूट- राम कथा मंदाकिनी चित्रकूट चित चारु, तुलसी सुभग सनेह बन श्री रघुवीर विहार कुछ ऐसे ही उदाहरण राष्ट्रीय रामायण मेला के सैतीसवें संस्करण के समापन सत्र की यादगार बने। पद्म विभूषण नाना जी देशमुख ने अपने एक लाइन के उद्बोधन में कहा कि भगवान कामतानाथ के सुभार्षीवाद से सभी लोग सानंद हैं और रहेंगे।

आचार्य बाबू लाल गर्ग ने डा. लोहिया को याद करते हुये कहा कि रामायण मेले की संकल्पना उनका अपना निजी मत था। सैंतीस पड़ाव पार कर चुका यह मेला अब आने वाले दिनों में इतिहास रचेगा। कहा कि नये युग का सृजन चित्रकूट की धरती से ही होगा। इस मौके पर डा. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ने कविता के माध्यम से चित्रकूट व नाना जी देशमुख को तमाम उपमाओं से विभूषित किया। समापन के सत्र में पूर्व सांसद भीष्म देव दुबे, डा. श्याम मोहन त्रिपाठी,प्रदुम्न दुबे लालू,डा. वीके जैन आदि लोग मौजूद रहे। समाजसेवी नानाजी देशमुख का स्वागत मेले का कार्यकारी अध्यक्ष गोपाल कृष्ण करवरिया व पूर्व विधायक भैरों प्रसाद मिश्र ने किया।

NO COMMENTS