सूखे खेतों को है जोरदार बारिश का इन्तजार

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मौसम भी नित्य नई करवटे ले रहा है। जहां सांझ ढले हल्की बारिश मौसम को खुशगवार बना देती है वहीं आजकल दिन में पड़ रही कड़ी धूप और उमस जनता को पसीने से सराबोर कर देती है। मौसम के इस परिवर्तित रूख के चलते जनता में मायूसी दिखाई दे रही है। बारिश के अभाव में क्षेत्र के अनेकों गांवों में किसानों के खेत भी तैयार नहीं हो पा रहे है और उनमें रोष देखा जा रहा है।  उल्लेखनीय है कि दलहनी फसलों की बुबाई का समय नजदीक है। बारिश के अभाव में खेत अच्छी तरह से तैयार नहीं हो पा रहे है। जिले के अनेकों गांवों में छुट-पुट बारिश का सिलसिला जारी है तो कई ग्राम ऐसे भी है, जहां पानी के नाम पर एक बून्द भी नहीं है। जिला मुख्यालय पर ही अगर देखा जाये तो दोपहर बाद मौसम बिल्कुल परिवर्तित मूड़ में दिखाई देता है, जबकि दिन में तेज धूप और उमस जनता को बेहाल कर देती है। बारिश तो होती है, परन्तु कृषि और अन्य दृष्टि से यह अभी अ-पर्याप्त है। मौसम विशेषज्ञों की माने तो मानसून अब शीघ्र ही अपने पूर्ण यौवन के साथ आने वाला है, परन्तु यह मानसून बुन्देलखड की सूखी धरती को कितना सिचिन्त और हरियाली प्रदान कर पायेगा, बस यही चिन्ता लोगों को खाये जा रही है। क्षेत्र के अनेकों गांवों में ईश्वर को मनाने हेतु मिन्दरों में पूजन, अर्चन और अनुष्ठानों सहित तरह-तरह के टोटकों को क्रम जारी हो गया है। सूखे खेतों का सीना फाड़ उसमें अपनी मेहनत के पसीने की बून्द गिराकर फसल उत्पदान करने वाला किसान आसमान पर टकटकी लगाये बैठा हुआ है। इस वर्ष की बारिश से क्षेत्र के किसान को बढ़ी उम्मीद है। ईश्वर से सभी की बस यही कामना है कि इस बार यह उम्मीद, उम्मीद ही बन कर न रह जाये। 

Reetesh Kumar Sharma
9936504352