सूखा राहत कार्यो की धुरी बनी नरेगा

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झांसी-केन्द्र सरकार भले ही सूखा राहत के लिए प्रदेश सरकार की मांग पूरी नहीं कर रही है, पर केन्द्र की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय रोजगार गारण्टी योजना जनपदों में सूखा राहत कार्यो की धुरी बनी हुई है। प्रदेश शासन से लेकर जिला प्रशासन तक का पूरा जोर नरेगा के कामों में तेजी लाने पर है।

बुन्देलखण्ड के झांसी, जालौन,चित्रकूट, महोबा व बांदा जनपदों को सूखाग्रस्त घोषित करने के बाद अब सरकार ने पूरक बजट में लगभग 6 करोड़ की राशि का प्रावधान किया है। वैसे पूरक बजट को पास होने तथा धनराशि के जनपदों के आवंटन की प्रक्रिया में अभी काफी समय लगेगा। हालांकि इस राशि से सूखा राहत की योजनाएं चल पाना मुश्किल है। राज्य सरकार के पास धनराशि की कमी को उनके नौकरशाह भी समझ गए है और इसीलिए अधिकारियों को पूरा ध्यान इन दिनों नरेगा के कामों पर लगा हुआ है।

मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता ने भी पिछले दिनों वीडियो-कॉन्फरेसिंग में प्रत्येक गांव में नरेगा के माध्यम से काम चलाने के निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी राजशेखर ने खण्ड विकास अधिकारी को गांवों में काम चलाने के लिए प्रस्ताव तत्काल भेजने तथा श्रमजनित कार्यो की मांग करने पर काम उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी है।

प्रशासन का पूरा ध्यान नरेगा के तहत चलने वालों कामों में तेजी लाने में लगा है, लेकिन निचला तबका इन कामों को लेकर गम्भीर नहीं है। ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सचिव का गठजोड़ नरेगा की धनराशि को खुर्द-बुर्द करने में जुटा है। जिला मुख्यालय में पहुंचने वाली शिकायतों में बढ़ोत्तरी ही हुई है। अब सूखाग्रस्त जनपद घोषित होने के बाद किसानों व खेतिहर मजदूरों को रोजगार परक काम उपलब्ध कराने के साथ निचले तबके की मनमानी पर अंकुश रखने की जरूरत भी महसूस की जा रही है।