सहरिया महिलाओं के खातों में नहीं पहुची पेंशन

0
154

ललितपुर- समाज कल्याण विभाग में असहायों के हितों के साथ खिलवाड़ होने पर जिलाधिकारी रणवीर प्रसाद ने कठोर कार्यवाही के निर्देश दिये है। इस दिशा में दोषियों के खिलाफ कार्यवाही भी हो चुकी है। जल्दी ही इसके अच्छे परिणाम सामने आयेंगे। पूर्व में की गयी लापरवाही की बदौलत अब तक पेंशन लाभार्थियों के खातों में पेंशन नहीं पहुच पा रही है। इस वजह से वह पेंशन के लिए मारे-मारे फिर रहे है। कई तो लाभार्थियों की इतनी खराब स्थिति बनी हुई है कि वह न केवल शारीरिक रूप से लाचार है वरन बसों में किराया देने के लिए भी वह मोहल्लों, गाव में हाथ फैलाते है।

शासन द्वारा असहाय व गरीब लोगों के लिए तरह-तरह की योजनायें संचालित हैं। इनमें पेंशन धारकों को सर्वाधिक परेशानिया हो रही है। स्थिति यह है कि पेंशन पाने के लिए लाभार्थी डाकखानों में चकरघिन्नी बने हुए है। वह रोज-रोज सरकारी कार्यालयों में पहुचकर पेंशन की पूछताछ करते रहते कि पेंशन आयी है कि नहीं। हालाकि 6 माह की पेंशन शीघ्रता के साथ भेजने के कड़े दिशा निर्देश है, लेकिन ऐसे लाभार्थियों की बड़ी तादाद बतायी जा रही है जिन्हे लगभग एक वर्ष गुजर जाने के पश्चात भी पेंशन अप्राप्त बनी हुई है। जिलाधिकारी ने पेंशन लाभार्थियों की पीड़ा को गम्भीरता से लिया था। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं को भी प्राप्त करने में हो रही परेशानी के मद्देनजर कार्यवाही की थी, लेकिन पूर्व समय जो ज्यादती की गयी है उसका असर अब भी बना हुआ है। विकास खण्ड जखौरा अन्तर्गत ग्राम पंचायत पिपरा निवासी सहरिया आदिवासी महिलाओं के लिए पेंशन ही आजीविका का एकमात्र सहारा है। जखौरा स्थित डाकखाने में वह कई मौकों पर पेंशन की जानकारी लेने के लिए चक्कर लगा चुकी है। यह महिलायें बताती है कि यदि उनके पति जीवित होते तथा शरीर कमजोर नहीं होता तो उन्हे दूसरों के मुंह की ओर नहीं ताकना पड़ता। बड़ी बहू नाम की दोनों महिलाओं की आखों में व्यथा सुनाने के साथ ही आसू छलक पड़ते है। एक के पति का नाम हल्के सहरिया है, जिसकी पासबुक संख्या 369058 है। इस महिला के लिए 16 अक्टूबर 08 को ही 1800 रुपये निकले थे अब उसके खाते में केवल 100 रुपये शेष है। पेंशन इस खाते में अब तक नहीं पहुची है।

इसी तरह बड़ी बहू पत्‍‌नी धनू सहरिया की पासबुक संख्या 369057 में इसके भी खाते से 16 अक्टूबर 08 को 1800 रुपये निकले थे। उसके खाते में भी अब तक पेंशन नहीं पहुची। दोनों सहरिया महिलायें बताती है कि ग्राम पंचायत के लोग जो रेलवे के अलावा अन्य विभागों में कार्यरत है उनके न केवल सफेद कार्ड वरन लाल व अन्य योजनाओं के कार्ड भी है जबकि उनके पास कोई राशन कार्ड नहीं है। यहा तक कि कोटे की दुकान से मिट्टी का तेल तक नहीं मिलता। हाथ-पाव रह गये है, इस वजह से वह मजदूरी करने के लायक नहीं रही। पेंशन से ही वह अब तक जिन्दा बनी हुई है, लेकिन समय पर पेंशन नहीं आने से वह आर्थिक व मानसिक रूप से परेशान बनी हुई है। यह व्यथा केवल इन दोनों महिलाओं की ही नहीं है वरन ऐसी महिलाओं की तादाद सैकड़ों बनी हुई है जो पेंशन का बेसब्री के साथ इतजार करती है लेकिन हर बार उन्हे डाकखानों के अलावा अन्य कार्यालयों में पहुचकर उदासी के साथ वापस लौटना पड़ता है। कई तो ऐसे मामले बताये जाते है जो पेंशन की किश्त पाने की बाट जोहते-जोहते भगवान को प्यारे हो जाते। मृत हो जाने के पश्चात उनके खातों में पेंशन पहुच तो जाती लेकिन बाद में यह रहस्यमय तरीके से खुर्दबुर्द कर दी जाती। कई मौकों पर यह धाधली उजागर भी हो चुकी है। इसके पश्चात भी विभाग सबक नहीं ले रहे है।

NO COMMENTS