सरकारी अफसर व जनप्रतिनिधि पढायें अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में ।

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बुंदेलखंड लाइव की खबर का हुआ बड़ा असर।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय का सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिये सरकार को आदेश दिया है आदेश में कहा गया है कि सरकारी अफसर व जनप्रतिनिधि पढायें अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में । इसके लिये प्रदेश सरकार को 6 महीने के अंदर कानून बनाने के दिये आदेश दिए है । आदेश की अवहेलना पर कड़ी कार्यवाही की दी हिदायत ।

माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के ऐतिहासिक आदेश में सांसद ,विधायकों व आईएएस के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे, कांवेंट, माण्टेसरी स्कूलों में पढ़ाया तो उनको सरकारी खजाने में देना होगा पैसा । हाई कोर्ट ने अपने अहम फैसले में सरकारी वेतन पाने वाले हर कर्मियों को सरकारी स्कूलों में भेजने का दिया आदेश । आपको बता दे कि पिछले वर्ष 2014 में बुंदेलखंड लाइव ने जनहित और सरकारी धन के दुरूपयोग को रोकने के मुद्दा को लेकर न्यायलय में दस्तक दी थी कि प्रदेश के खस्ता हाल सरकारी स्कूल में मनमाने ढंग से मोटी वेतन पाने बाले सरकारी कर्मचारी खुद के बच्चों की प्राइवेट स्कूलो में कियो पढ़ाते है। जबकी केंद्र और प्रदेश की सरकारे शिक्षा पर पूरी तरहा से पैसा देती है वावजूद इसके ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियो के बच्चे प्राइवेट स्कूलो में पड़ते है, या तो शिक्षा में कमी है या भरपूर वेतन पाने वाले शिक्षक पैसे देकर हाजरी लगवा रहे है। हलाकि इनसब मामले में न्यायलय का इस प्रकार का आदेश जनहित कारी सावित होगा अगर इस को कठोरता से लागू किया जाये ।