समाज कल्याण विभाग का कारनामा मृत पत्नी को दी जा रही है विधवा पेंशन

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सरकारी मशीनरी के लोगों भी अपनी एक अलग कहानी है। शासन के धन को हड़पने के लिए विभागीय लोग नित नई-नई तरकीबें बनाते हैं। जिसके चलते पात्राों को तो लाभ मिलता ही नहीं और जिसके नाम पर रकम हड़पी जा रही उसे भी फूटी कौड़ी तक नहीं मिलती। ऐसे लोगों की कारस्तानियों की शिकायत करते हुए कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव ने कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

15ckt6माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव का. रुद्रप्रसाद मिश्रा का कहना है कि समाज कल्याण विभाग के लोग एक तरफ तो बजट न मिलने का रोना रोते हुए पात्रा लोगों को विधवा, वृद्धावस्था आदि पेंशन देने में असमर्थता जताते हैं वहीं दूसरी ओर शासन से आए धन का सम्बंधित लोगों की मदद से बन्दरबांट कर अपनी जेबे भरते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के तहत मिले धन को विभागीय लोग किस तरह ठिकाने लगाने में जुटे हुए हैं इसका जीता जागता उदाहरण बगरेही गांव निवासी मुनीम नाम का ग्रामीण है। मुनीम बताता है कि उसे मरा दिखाते हुए समाज कल्याण विभाग ने उसकी पत्नी के नाम पर विधवा पेंशन जारी की है। जिसकी जानकारी होते ही वह विभाग के सम्बंधित लोगों के पास अपने ज़िन्दा होने का सबूत देने पहुंचा लेकिन उसकी वहां किसी ने नहीं सुनी तो न्याय कि उम्मीद लिए वह का. मिश्रा के पास पहुंचा। जिला सचिव का. मिश्रा ने बताया कि मुनीम की पत्नी को मरे हुए लगभग चार वर्ष हो गए हैं। इकसे बावजूद भी उसकी पत्नी के नाम से विभाग द्वारा विधवा पेंशन जारी की जा रही है जबकि मुनीम वृद्धावस्था पेंशन के लिए दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब मृत महिला के नाम निकलने वाली विधवा पेंशन के बारे में जानकारी करने वे    दफ्तर पहुंचे तो उन्हें किसी बहाने टरका दिया गया। उनका आरोप है कि इस तरह के कई मामलों की शिकायतें लोगों ने की है लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा इस ओर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं होती।  का. मिश्रा ने बताया कि विभागीय लोगों का नेटवर्क इतना तगड़ा है कि वे कल्याणकारी योजनाओं के तहत मिले सरकारी धन की हेराफेरी कर लेते हैं और इसकी कानोकान खबर भी किसी को नहीं होती। उधर समाज कल्याण अधिकारी से जानकारी लेनी चाही गई तो काफी देर तक मामले पर बात करने से कतराते रहे फिर बार-बार पूछने पर केवल यही कहा कि जांच कराएंगे।