समाजसेवी नानाजी देशमुख का निधन

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चित्रकूट – प्रबुद्ध समाजसेवी और विचारक नानाजी देशमुख का शनिवार शाम  सद्गुरू सेवासंघ अस्पताल में निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे। कुछ समय से बीमार चल रहे नानाजी को आज सुबह सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

नानाजी देशमुख लंबे समय तक जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे, लेकिन साढ़े चार दशक पूर्व उन्होंने खुद को राजनीति से अलग कर लिया और आदर्श समाज के निर्माण का बीड़ा उठाया। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जीवनव्रती प्रचारक नानाजी का जन्म महाराष्ट्र में 11 अक्तूबर 1916 में हुआ था। वह राज्य सभा के सदस्य रह चुके थे। आजीवन समाज सेवा का व्रत ले चुके नानाजी ने दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना करके उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश सीमा के दोनो तरफ के क्षेत्रों में शिक्षा स्वास्थ्य और लोगों को आर्थिक दृष्टि से आत्म निर्भर बनाने के लिए सराहनीय काम किया और देश के प्रतिष्ठित अलंकरण पद्मविभूषण से अलंकृत किये गए थे। उन्होंने दोनो राज्यों के पांच सौ सीमावर्ती गांवों में शिक्षा के प्रचार -प्रसार और लोगों को आर्थिक रूप से आत्म निर्भर बनाने के लिए उल्लेखनीय काम किया है।

नानाजी ने 60 साल की उम्र पूरी होते ही राजनीति छोड़ दी थी क्योंकि उनका मानना था कि 60 साल की उम्र के बाद व्यक्ति को राजनीति छोड़ देनी चाहिए। इसके बाद वह नयी ऊर्जा के साथ रचनात्मक कार्य में लग गए थे।