सबसे बड़ी योजना भी नहीं बुझा पायी पाठा की प्यास

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चित्रकूट। एशिया महाद्वीप की सबसे बड़ी पेयजल योजना भी पाठावासियों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रही है। क्षेत्र में पेयजल को लेकर आये दिन झगड़े की नौबत सामने आ रही है।

लगातार पांच सालों से सूखे व पेयजल संकट से जूझ रहा बुंदेलखंड क्षेत्र एक बार बढ़ती गर्मी के कारण भयावह पेयजल संकट की ओर बढ़ रहा है। खासतौर से चित्रकूट के पाठा क्षेत्र में स्थितियां बद से बदतर हो रही है। वर्ष 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सौगात पाठा जलकल भी क्षेत्रवासियों को पेयजल संकट से उबारने में असफल है। योजना से जुड़े क्षेत्र के 250 गांवों में पेय जलापूर्ति बेहद खराब है। गौरतलब है कि पांच सालों से सूखे के बाद इस वर्ष समय से मानसून आने पर पशुओं के लिये चारे का इंतजाम तो हो गया, किंतु अप्रैल माह के शुरूआती दिनों में गर्मी का भीषण प्रकोप आने वाले दिनों में भयावह पेयजल संकट का संदेश दे रहा है। पिछले साल ऊंचाडीह न्याय पंचायत के गिदुरहा, पाड़ा, जिगनवाह, डभवार, सकरौंहा, रानीपुर, कल्याणगढ़, कुसुरी, कठौता, ममनियां, कोटा, कंदैला, सिगवां व रामपुर कल्याणगढ़ न्याय पंचायत के कल्याणपुर, जारौमाफी, चितघटी, नागर, शेखापुर, चक शेखापुर, ठर्री, महुली, सहिलवार, पड़री, करौंहा, छेछरिहा खुर्द, छेछरिहा बुजुर्ग में भीषण पेयजल समस्या के चलते टैकरों से पेय जलापूर्ति करनी पड़ी थी। इस साल भी जहां दोनो न्याय पंचायत के लगभग सारे कुयें, तालाब सूख रहे है। वहीं हैडपंपों में भी पानी न देने वालों की संख्या तीन चौथाई है। क्षेत्र के रामपुर कल्याणगढ़, हरिजनपुर व बगदरी में पिछले साल टैकरों से पेयजलापूर्ति के दौरान पानी को लेकर ग्रामीणों के बीच हिंसक संघर्ष भी हुआ था। तीनों मामले पुलिस के पास पहुंचने के चलते दर्जनों लोगों को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी।