सपाइयों की साइकिल यात्रा का हाल

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कुछ तो लगे फोटो खिचवाने में तो कुछ ने बनाए बहाने

चित्रकूट – कहां चक्कर में पड़ गए यार! दिन भर धूप व धूल खाने से तो अच्छा था कि घर में बैठ ठण्डी हवा का मजा लेते। जी हां! यह हाल है समाजवादी पार्टी की साइकिल यात्रा का। अपने मुखिया के निर्देश पर साइकिल चलाने निकले पार्टी की जिला इकाई के कुछ कार्यकर्ता जहां एक ओर जी जान से जुटे हुए हैं वहीं पार्टी के कुछ ऐसे पदाधिकारी हैं जो केवल फोटो खिंचवाने के लिए साइकिल पर चढ़ते हैं और फिर गायब हो जाते हैं। और तो और कुछ ऐसे भी हैं जो जिले से बाहर रहते हुए भी यह चाहते हैं कि साइकिल यात्रा में उनका भी नाम छपे।

गौर तलब है कि समाजवादी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव  के निर्देश पर सपाई इन दिनों अपनी नौ दिवसीय साइकिल यात्रा के माध्यम से गांव-गांव जाकर पार्टी की नीतियों का बखान करने में जुटे हुए हैं। इसी के तहत पार्टी के जिला इकाई कार्यकर्ताओं द्वारा भी साइकिल चलाई जा रही है। लेकिन इस अभियान में पार्टी  कार्यकर्ताओं का अन्तर्रविरोध व उनकी नियत भी साफ-साफ झलक रही है। बीती 8 मार्च से शुरू हुई साइकिल यात्रा के दौरान जिन गांवों का दौरा सपाई करने का दावा कर रहे हैं उनमें से कुछ तो हकीकत में हैं और कुछ नाम मात्रा के हैं। साइकिल जनजागरण यात्रा में जहां कुछ सपाई एक ओर जी जान से जुटे हुए हैं वहीं कुछ ऐसे हैं जो केवल फोटो खिचवाने के लिए ही साइकिल पर सवार होते हैं। इसके बाद कहां जाते हैं कुछ पता ही नही चलता। सूत्रो की माने तो कुछ पार्टी पदाधिकारी भी केवल फोटो खिंचवाने तक ही सीमित रह गए हैं। वहीं कुछ ऐसे कार्यकर्ता भी है जो यह कहते सुने गए हैं कि कहां चक्कर में पड़ गए यार धूप व धूल खाने से तो अच्छा था कि घर मे बैठ ठण्डी हवा खाते। इसके अलावा पार्टी के कुछ पदाधिकारी तो ऐसे हैं जो लकालक कुर्ता पायजामा पहन कर फोटो खिचवां लेते हैं और इसके बाद गायब हो जाते हैं। सूत्रो की माने तो साइकिल यात्रा में गिने चुने ही लोग जी जान से जुटे हुए हैं। वहीं कुछ कार्यकर्ता तो इनसे भी दो कदम आगे निकल गए हैं वे यह कह कर अपनी जान बचा लेते हैं कि उन्हें साइकिल चलाना ही नहीं आता तो क्या करें और फिर दिन भर जिला मुख्यालय में इधर-उधर बैठ गप्पें लड़ाते हुए अपना समय बिता देते हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे कार्यकर्ता भी हैं जो इन दिनों जिले से बाहर हैं लेकिन फोन से इतना कहने से नहीं चूकते की भाई साहब हमारा नाम भी साइकिल यात्रा में जोड़ देना।  हाल चाहे जो भी हो पार्टी मुखिया के निर्देश पर हो रही इस साइकिल यात्रा का आगे आने वाले चुनावों में क्या नतीजा निकलेगा यह तो राम ही जाने!