सचिव के इशारे पर हुई थी आवास सूची की जांच

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कोई भी बहाना लेकर आला अधिकारियों का कहर कब किस पर टूट जाए कोई भरोसा नहीं। इसी क्रम में मड़वा आवास मामले का मुद्दा लेकर गत दिनों प्रशासन ने मऊरानीपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत विकास अधिकारी को निलçबत कर दिया। जबकि लाभार्थी सूची में कुछ अपात्र होने की सूचना उसने ही दी थी। इसके बाद तीन अलग-अलग लोगों ने इस प्रकरण की जांच की। रोक के बाबजूद बैंक ने तीन अपात्रों को भुगतान कर दिया। लेकिन जब प्रशासनिक कार्यवाही हुई तो सचिव हक्के बक्के रह गए। प्राप्त विवरण के अनुसार ग्राम पंचायत मड़वा में आवासों हेतु चयन 92 लाभार्थियों का प्रस्ताव डाल इनके नाम भेजे गए थे। इसके बाद इनमें से भ्9 लाभार्थियों को खाते खुलवाने हेतु वीडीओ द्वारा आदेशित किया गया जबकि इसकी जांच सहायक विकास अधिकारी कृषि राम सहाय वर्मा द्वारा की गई। जांचोपरान्त खातों में आवास हेतु पैसा आया है। इसी दौरान तत्कालीन ग्राम पंचायत विकास अधिकारी बद्री प्रसाद निरंजन को कुछ लाभार्थियों का चयन गलत होने की जानकारी मिली जिसकी जानकारी उन्होंने खण्ड विकास अधिकारी को दी।तत्काल वीडीओ मऊरानीपुर ने बैंक शाखा को पत्र लिख पैसा निकासी पर रोक लगा दी। भुगतान पर रोक के बाबजूद धवाकर बैंक प्रशासन ने इसकी परवाह किए बिना तीन लाभार्थियों का पैसा भुगतान कर दिया। लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। इस सबन्ध में सचिव बद्री प्रसाद ने बताया कि वह इस मामले में कतई दोषी नहीं है। उन्होंने बताया कि पूर्व वीडीओ रनवीर सिंह ने एक माह में चार बार, दूसरे माह में तीन बार तबादला किया। आखिर इस प्रकार के तबादला आदेश कर उनको परेशान किया गया। फिलहाल मऊरानीपुर ब्लाक के दो सचिव पहले गंगाधर गुप्ता अब बद्री प्रसाद निरंजन को निलंबित कर प्रशासन ने मामले को दबाने का प्रयास किया है।

Vikas Sharma
bundelkhandlive.com
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