संकल्प पूर्ति महा महोत्सव सम्पन्न

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चित्रकूट- शिव भक्ति के रंग में रंगने वाला संकल्प पूर्ति महा महोत्सव गुरुवार को 9 करोड़, 54 लाख, 58 हजार, 633 पार्थिव शिवलिंगों के निर्माण के साथ सम्पन्न हो गया। स्थानीय लोग भी भोले बाबा की भक्ति में इस कदर डूबे कि उन्होंने सवा पांच करोड़ शिवलिंग बनाने के लक्ष्य को बहुत पीछे छोड़ दिया।

महोत्सव के अंतिम दिन आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री ने कहा कि गुरु की आज्ञा को शिरोधार्य कर उन्होंने 9 के अंक के साथ ही चित्रकूट की इस पावन धरती पर अपनी महारुद्र निर्माण की यात्रा को विराम देने का निश्चय किया। हालांकि माता, पिता और गुरु के बाद पुत्र ऋण के कारण वे अभी ऐसा पूरी तौर पर नही कर पा रहे हैं। शिष्यों की इच्छा पर पार्थिव शिव लिंगों के निर्माण की प्रक्रिया लगातार देश के विभिन्न भागों में चलती रहेगी। कहा कि कर्म, धर्म और अर्पण का भाव अगर हो तो प्रभु को पूजने के लिए मंदिर जाना पड़ेगा पर समर्पण का भाव होने पर प्रभु खुद घर में बने मंदिर में विराजमान हो जायेंगे। नरसिंग मेहता, संत तुकाराम, विट्ठल नाथ, नामदेव जैसे तमाम उदाहरण देकर बताया कि समर्पण ही भक्ति की पराकाष्ठा है। अभिमान की शून्यता व्यक्ति को परमात्मा के नजदीक ले जाने का प्रमुख माध्यम है। मन की शून्यता और शुद्धता पाकर प्रभु स्वयं ही भक्त के पास चले आते हैं। हनुमान और प्रहलाद जैसे तमाम उदाहरण हैं जहां भगवान से भक्त काफी बढ़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि मन के अहंकार को तन तक लाने का प्रयास करना चाहिये जिससे मकान के किनारे आने पर बेकार की वस्तु को धक्का मारकर बाहर किया जा सके। इसके पूर्व दद्दा जी ने पद्मश्री नाना जी देशमुख को शाल और श्री फल देकर सम्मानित किया। संकल्प पूर्ति महा महोत्सव की अंतिम वेला पर सभी गण मान्यों को सम्मानित करने और आभार प्रकट करने के बाद जब सभी गुरु भाइयों व बहिनों से बात का अवसर आया तो फिल्म स्टार आशुतोष राणा का गला मंच पर ही भर आया। तीन से चार बार बोलने का प्रयास किया पर वे सफल हो न सके। आंसू भी छिपाने का प्रयास किया पर वे भी सभी को दिख ही गये। उन्होंने कहा कि मुझे अपने परिवार में सात भाई और पांच बहनें मिली पर दद्दा जी हमें सात लाख भाई और बहन दे दिये। इसकी खुशी शब्दों में बयान नही की जा सकती।

राणा ने कहा कि जैसे माला 108 मनकों की होती है वैसे ही यज्ञों की श्रंखला भी कम से कम 108 तक पहुंचनी चाहिये। 45 यज्ञों में इन्हें विश्राम न दें। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में पैंतालीस पार्थिव महारुद्र निर्माण की प्रक्रिया में अब तक 1 अरब 19 करोड़, 23 लाख, 93 हजार और 674 पार्थिव शिव लिंगों का निर्माण हो चुका है।
इस दौरान फिल्म अभिनेता राज पाल यादव ने भी विचार व्यक्त करते हुये कहा कि उनकी सफलता की कहानी दद्दा जी के शिष्य बनने के बाद से शुरु हुई। वर्ष 1999 में उन्होंने दद्दा जी से दीक्षा ली और उसी समय जंगल मिली और उस जंगल फिल्म ने उनके जीवन में मंगल कर दिया। इस दौरान दद्दा जी के पुत्र प्रो. अनिल त्रिपाठी, विधायक संजय पाठक जिलाधिकारी ह्देश कुमार आदि ने भी संबोधित किया।

इसके पूर्व रोजाना की तरह की शिव लिंगों के निर्माण का काम जारी रहा। लोगों ने बड़ी संख्या में जाकर पार्थिव शिव लिंगों का निर्माण किया। बाद में उनका विसर्जन किया गया।