श्रम प्रवर्तन विभाग कों नजर आ ही गये बाल श्रमिक

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बांदा- शहर में काम कर रहे बाल श्रमिकों पर श्रम प्रवर्तन विभाग की नजर पड़ ही गयी। विभाग की छापामार कार्रवाई में पांच किशोरों को मुक्त कराया गया है।

शहर में छोटी से छोटी दुकान और ढाबों में बाल श्रमिकों से हाड़तोड़ मेहनत करायी जा रही है। इसके अलावा घरेलू नौकरों की भी संभ्रात घरानों में भरमार है। इनसे सुबह से लेकर शाम तक सभी प्रकार के काम कराये जाते है। श्रमप्रवर्तन विभाग द्वारा कई वर्षो से इस संबंध में कार्रवाई न किये जाने पर बाल श्रमिक रखने में तेजी आयी है। चाहे वह घरेलू नौकर के रूप में हो चाहे चाय की दुकानों से लेकर होटल, ढाबों में। सभी जगह बाल श्रमिकों को ही लगाया गया है।

बुधवार को श्रम प्रवर्तन विभाग के निरीक्षक एसडी त्रिपाठी और एसडीएम सदर नंदन चक्रवर्ती ने रोडवेज बस स्टैड के पास स्थित भोजनालय में छापा मारा तो वहां हड़कंप मच गया। होटल मालिकों ने पहले तो नौकरों को छिपाने का प्रयास किया पर टीम ने दो बाल श्रमिकों कों पकड़ लिया। पकडे़ गये दोनो बाल श्रमिकों ने  अपना नाम कैलाश निवासी शेरपुर गिरवां और महेश मटौंध बताया। श्रम प्रवर्तन विभाग द्वारा दूसरी कार्रवाई बाबूलाल चौराहे पर की गयी। वहां एक मिठाई की दुकान और एक भोजनालय से तीन बाल श्रमिक दबोचे गये। इनमें श्यामबाबू खुरहंड, विजय मर्का और मर्दननाका मोहल्ले का द्वारिका प्रसाद है। पांचों बाल श्रमिकों को टीम ने कब्जे में ले लिया है। एसडीएम सदर ने बताया कि पकडे़ गये बाल श्रमिकों की उम्र का सत्यापन हो रहा है। अवयस्कता साबित होने पर दुकान मालिकों के खिलाफ जुर्माने के साथ दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी।

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