श्रंगी ऋषि आश्रम पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा

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मंडल के वन संरक्षक व मुख्य वन संरक्षक ने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ खरेला के श्रंगी ऋषि आश्रम का निरीक्षण कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि रामायण कालीन यह प्रसिद्ध स्थल वन विभाग के लिये बेहद उपयोगी साबित होगा।

खरेला के पहाड़ में स्थित श्रंगी ऋषि आश्रम जनपद की ऐतिहासिक धरोहर है। स्थानीय निवासियो कहते है कि रामायण काल में श्रंगी ऋषि इस पर्वत पर साधना करते रहे है।आश्रम की खास बात है कि पहाड़ के ऊपर ही सुंदर सरोवर है जो बीते वर्षो में भारी सूखे की दौरान भी नहीं सूखा।  आसपास के तमाम गांवों के लिये भी यह श्रद्धा के साथ बेहतर पर्यटन स्थल माना जाता है। इसे विकसित करने की योजना के तहत चित्रकूट धाम मंडल के वन संरक्षक कमल किशोर व झांसी से आये मुख्य वन संरक्षक उमाशंकर ने जिला वन अधिकारी रामराज गौतम के साथ श्रंगी ऋषि की तपोभूमि का दर्शन करने के बाद इस पहाड़ी का सूक्ष्म निरीक्षण कर पर्यटन विकास की संभावनाएं तलाशी। उन्होंने जिला वन अधिकारी को निर्देश दिया कि यहां वन संवर्धन का कार्य योजनाबद्ध ढंग से कराया जाये। जिससे इस स्थल को और सुंदर बनाया जा सके। उन्होंने पर्यटकों के आकर्षित करने के लिये बेहतर संपर्क मार्ग व बैठने के लिये बेंचें आदि बनवाने की भी हिदायत दी है। यहां बच्चों के लिये तरह-तरह के झूलों का बंदोबस्त कर लोगों को आकर्षित करने की योजना बनाई गई है। मुख्य वन संरक्षक उमाशंकर के मुताबिक यह जिले के अन्य पर्यटन स्थलों की तुलना में सैलानियों को आकर्षित करने के लिये ज्यादा उपयुक्त स्थल हो सकता है। उन्होंने इस स्थल के व्यापक विकास की हर कोशिश करने की वकालत की।