शिवपुरी-भिंड में खुलेंगे एग्रीकल्चर कालेज

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ग्वालियर-अंचल के शिवपुरी और भिंड जिलों में कृषि महाविद्यालय के प्रस्ताव विचाराधीन हैं। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इनके अलावा धार और झाबुआ में भी कृषि महाविद्यालय का प्रस्ताव भेजा है।

सूत्रों के मुताबिक इस पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है और अगले वित्त वर्ष में इसके लिए बजट के प्रावधान की उम्मीद की जा रही है। अंचल में कृषि उत्पादन में सबसे आगे रहने वाले भिंड और शिवपुरी जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने की दरकार है।

विश्वविद्यालयीन सूत्रों के मुताबिक शिवपुरी, भिंड के अलावा धार और झाबुआ जिले में कृषि महाविद्यालयों के खोलने का प्रस्ताव प्रमुख सचिव कृषि विभाग को छह माह पूर्व भेजा जा चुका है। इस प्रस्ताव पर शासन विचार कर रहा है। वर्तमान में इन जिलों में कृषि विज्ञान केन्द्र संचालित हैं।

शिवपुरी जिले में कृषि विज्ञान केन्द्र पर रिसर्च वर्क करने के लिए दूसरे जिलों एवं संभागों से साल-दर-साल छात्रों का आवागमन हो रहा है।श्योपुर, गुना,  और शिवपुरी जिले के कृषि संकाय के छात्र-छात्राओं को अध्ययन के लिए इन जिलों को छोड़कर बाहर जाना पड़ रहा है।

शिवपुरी जिले में बड़ी संख्या में सहरिया जनजाति है। विश्वविद्यालय की सोच है कि यदि यहां एग्रीकल्चर कालेज खुला तो इस जनजाति को इसका फायदा मिलेगा। यही वजह है कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ने महाविद्यालय खोलने की दिशा में प्रयास शुरू किए हैं।

शिवपुरी, भिंड, मुरैना समेत ग्वालियर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के अधीन उज्जैन, देवास, खरगौन, धार, इंदौर आदि जिलों में एक-एक और कृषि विज्ञान केन्द्र खोले जा सकते हैं। इसके लिए कृषि मंत्रालय दिल्ली के आदेश पर ग्वालियर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने इन जिलों में संचालित कृषि विज्ञान केन्द्रों को द्वितीय केन्द्र के लिए प्रस्ताव तैयार करने के आदेश दिए हैं।अंचल के शिवपुरी, भिंड समेत विश्वविद्यालय क्षेत्र के कुल चार जिलों में एग्रीकल्चर कालेज खोलना प्रस्तावित है। इसके अलावा आठ बड़े जिलों में द्वितीय कृषि विज्ञान केन्द्र के लिए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं