शिवपाल सिंह यादव ने किया नव निर्मित प्रेक्षागृह का उद्घाटन सिंचाई मंत्री ने दी सिंचाई विभाग की उपलब्धियों की जानकारी

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बुन्देलखण्ड सहित सिंचाई मंत्री ने दी सिंचाई विभाग की उपलब्धियों की जानकारी दी
 (विकास शर्मा)
लखनऊ: 18 जनवरी, 2016

प्रदेश के सिंचाई मंत्री श्री शिवपाल सिंह यादव आज डा0 राम मनोहर लोहिया परिकल्प भवन में नव निर्मित डा0 राम मनोहर लोहिया प्रेक्षागृह का उद्घाटन किया।
सिंचाई मंत्री ने इस अवसर पर सिंचाई विभाग द्वारा में कराये गये इतिहासिक परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व में किसी भी सरकार ने किसनों के लिए इतना कार्य नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में सिर्फ उत्तर प्रदेश ही ऐसा प्रदेश है जहां किसानों को मुफ्त सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराया गया है इसके साथ ही पूरे प्रदेश में सभी नहरों, माइनरों एवं रजबहों की सिल्ट सफाई कराके पानी को टेल तक एवं टेल से खेत तक पानी को पहुंचाया गया है। श्री यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई जल प्रबन्धन की प्रसंशा पूरे विश्व में हुई है।
श्री यादव ने कहा कि जल प्रबन्धन विषय पर आगामी 21 एवं 22.01.2016 को दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। सेमिनार लगभग 10 देशों के जल प्रबन्धन से जुड़े विशेषज्ञ वैज्ञानिक भाग लेंगे। इसमें विचार किया जायेगा कि कैसे बिना पानी बर्बाद हुए अधिक  से अधिक सिंचाई हेतु उपयोग किया जाये।
सिंचाई मंत्री ने इस अवसर पर प्रेस प्रतिनिधियों से भी जल प्रबन्धन एवं सिंचाई पर अपने विचारों/ सुझाओं को देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आप के सुझाओं पर भी अमल किया जायेगा।
सिंचाई मंत्री ने प्रेस वार्ता में सिंचाई विभाग की निम्नलिखित परियोजनाओं एवं उपलब्धियों को अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश में 74 हजार कि0मी0 लम्बी नहर प्रणाली, 32 हजार राजकीय नलकूप, 277 लिफ्ट कैनाल तथा 65 बड़े जलाशय है। प्रदेश में गंगा, यमुना, घाघरा, राप्ती,गण्डक, रामगंगा, गोमती, केन, बेतवा आदि नदियां उपलब्ध है। उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार राजकीय सिंचाई सुविधा मुफ्त उपलब्ध करायी जा रही है।

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1-   किसानों को समय से सिंचाई हेतु समुचित जल उपलब्ध कराया गयाः-
1.    सिंचाई विभाग द्वारा वर्ष में दो बार नहरों की सफाई करके किसान को ऐसे स्थान पर पानी उपलब्ध कराया गया, जहाॅं पिछले 30 वर्षो में नहीं पहुॅंचा था।
2.    बाराबंकी, फैजाबाद, सुल्तानपुर, आजमगढ़, महाराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर आदि अनेकों ऐसे जिले हैं जिसमें टेल तक पानी पहली बार पहुॅंचा।
3.    विभाग में अन्तर्राष्ट्रीय तथा आधुनिक टैक्नोलाॅजी का प्रयोग किया गया। विश्व बैंक ने लिखकर विभाग को बधाई दी कि उ0प्र0 सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग विश्व की अग्रिम सिंचाई संस्थाओं में एक हो गयी है।
4.    विभाग के इस प्रयास से पिछले 03 वर्षो में प्रदेश में 15 लाख हैक्टेयर सिंचाई  बढ़ गयी।
5.    प्रत्येक नहर प्रणाली के टी-डायग्राम बनाये गये है तथा पत्रकार बन्धु कमाण्ड सेण्टर देखकर अवश्य जाये और स्वयं बताएं कि क्या किसी अन्य विभाग ने इतना आधुनिक टैक्नाॅलाजी सेण्टर बनाया है।
2-   30 वर्षो से अधूरी पड़ी सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने का कार्यः-
*    सरयू नहर परियोजनाः-
सरयू नहर परियोजना में पिछले 32 वर्षो में 2844 करोड़ रूपये का व्यय तो किया गया लेकिन वास्तव में नहरों में 1400 गैप्स होने तथा 125 किमी0 लम्बी राप्ती नहर में 1 इंच भी खुदाई न होने के कारण किसानों को सिंचाई का कोई लाभ नहीं मिला। समाजवादी सरकार के गठन के पश्चात मात्र 2 वर्षो में परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराते हुये 1234 करोड़ रूपये व्यय कर लगभग 1000 गैप्स पूर्ण करके और 103 किमी0 मुख्य नहर और 150 किमी0 रजवाहे/अल्पिकाओं की खुदाई कर 63000 हैक्टेयर सिंचन क्षमता में वृद्धि की गयी। इस परियोजना से 09 जनपद क्रमशः बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोण्डा, सिद्धार्थनगर, बस्ती, सन्तकबीर नगर, गोरखपुर एवं महराजगंज लाभान्वित हो रहंे हैं। परियोजना का लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।
निर्माणाधीन राप्ती नहर
*    बाण सागर नहर परियोजनाः-
इस परियोजना पर पिछले सरकार के कार्यकाल में 1270 करोड़ रूपये व्यय कर दिये गये परन्तु किसानों सिंचाई हेतु एक बूॅद पानी नहीं मिला। समाजवादी सरकार के गठन के पश्चात 456 करोड़ रूपये व्यय करके 93 प्रतिशत कार्य पूर्ण करा दिये गये हैं तथा इससे 50 हजार हेक्टेयर सिंचाई की सुविधा किसानों को दी गयी है। इससे दो जनपदों इलाहाबाद, मिर्जापुर के किसान लाभान्वित होगें।निर्माणाधीन सुरंग
*    कनहर सिंचाई परियोजनाः-
सोनभद्र के सूखाग्रस्त एवं पिछडे़ क्षेत्र की यह परियोजना 33 वर्ष पूर्व जब प्रारम्भ हुयी थी तब इसकी लागत मात्र 27 करोड़ रूपये थी। समाजवादी सरकार के आने से पूर्व यह परियोजना शिथिल अवस्था में थी। परियोजना के क्रियान्वयन हेतु विभाग द्वारा न केवल उक्त परियोजना को नाबार्ड से स्वीकृत कराया गया अपितु इस योजना के सभी मुद्दे सुलझाये गये और चालू वित्तीय वर्ष में 315 करोड़ रूपये व्यय करके इसको गति भी दी गयी। सरकार द्वारा योजना से प्रभावित कृषक परिवारों के पुर्नवास हेतु 150 करोड़ रूपये की धनराशि तत्काल स्वीकृत की गयी। कार्य की भौतिक प्रगति 30 प्रतिशत है।

निर्माणाधीन सुरंग
*    बदायूॅं सिंचाई परियोजनाः-
बदायूंॅ एव बरेली के कृषकों को 3700 हे0 क्षेत्र में सिंचाई सुविधा देने के लिये गत सरकार में बिना वित्तीय संसाधन जुटाये ठेके दे दिये गये। समाजवादी सरकार द्वारा नाबार्ड से परियोजना हेतु 537 करोड़ रूपये स्वीकृत कराके गत 2 वर्षो में 315 करोड़ रूपये व्यय किये तथा शीध्र ही यह परियोजना पूर्ण कर ली जायेगी। कार्य की प्रगति 58 प्रतिशत है।
*   जनपद आजमगढ़ में सिंचाई सुविधा की परियोजनाः-
परियोजना को मा0 मुख्यमंत्री जी की घोषणानुसार 102 करोड़ रूपये की कार्य योजना रिकार्ड समय में स्वीकृत कराकर कार्य प्रारम्भ किया गया। परियोजना के अन्तर्गत दरियाबाद, सुल्तानपुर, फैजाबाद, टाण्डा, दोहरीघाट, निजामाबाद, लालगंज तथा शाहगंज आदि 144 नहरों पर 981 किमी0 लम्बाई में लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण कराये जा चुके हैं। नहरों के पुनरोद्धार कार्यों से बाराबंकी, फैजाबाद, सुल्तानपुर तथा आजमगढ़ की नहरों की टेलों तक पानी पहुॅंचाना प्रारम्भ हो गया है।

*    जनपद मैनपुरी में सिंचाई सुविधा की परियोजनाः-
जनपद मैनपुरी में 30 करोड़ रूपये की लागत से बरनाहल नवीन नहर का निर्माण कराया जा रहा है जिसकी सिंचन क्षमता 2028 हे0 है एवं भौतिक प्रगति 70 प्रतिशत है तथा मैनुपरी में ही पहले से निर्मित बदनपुर नहर के सुदृढ़ीकरण एवं इसकी लम्बाई 18 किमी0 और आगे बढ़ाने का कार्य भी कराया जा रहा है इसकी सिंचन क्षमता 3738 हे0 है जिससे मैनपुरी की जनता को सिंचाई की पर्याप्त सुविधा प्राप्त हो सके।
ऽ    जनपद कन्नौज के तालग्राम व जलालाबाद ब्लाक में सतही सिंचाई परियोजनाः- 
उपरोक्त परियोजना के अन्तर्गत बेवर नहर 150 क्यूसेक क्षमता की प्रणाली से लगभग 30 कि0मी0 नई नहर बनाये जाने की घोषणा मा0 मुख्यमंत्री, उ0प्र0 सरकार द्वारा की गयी।
जनपद कन्नौज के अन्तर्गत छिबरामऊ तहसील के ब्लाक जलालाबाद एवं तालग्राम में सिंचाई विभागीय एवं निजी नलकूपों के माध्यम से हो रही है, जिससे इस क्षेत्र का भूमिगत जल स्तर काफी गिर गया है तथा दोनों ब्लाक डार्क जोन के अन्तर्गत आ गये हैं।  जलालाबाद एवं तालग्राम ब्लाक में सी0सी0ए0 क्रमशः लगभग 7751 हेक्टे0 एवं 27392 हेक्टेयर है।
परियोजना के अन्तर्गत निगोह राजवाहा की 10.00 कि0मी0 व बेवर फीडर की 15.00 कि0मी0 लम्बाई में पुर्नस्थापना का कार्य सम्पादित हो चुका है। कार्य प्रगति पर हैं। परियोजना के कार्य नवम्बर, 2017 तक पूर्ण कराये जाने प्रस्तावित हैं।
*    जसराना नवीन नहर सिंचाई परियोजनाः
जनपद फिरोजाबाद में रू0 131 करोड़ की लागत से जसराना नवीन नहर का निर्माण कराया जा रहा है जिसमें रू0 93 करोड़ का व्यय हो चुका है। इसकी भौतिक प्रगति 70 प्रतिशत है। इस परियोजना से जनपद फिरोजाबाद को पेयजल आपूर्ति होने के साथ ही 9520 हेक्टेयर सिंचन क्षमता का सृजन होगा।
*    गण्डक नहर प्रणाली के पुनरोद्धार की परियोजनाः-
कई वर्षो से गण्डक नहर प्रणाली का पुनरोद्धार न होने के कारण इसकी क्षमता उत्तर प्रदेश में 15800 क्यूसेक से घटकर 10,000 क्यूसेक रह गयी थी। इस नहर प्रणाली का पुनरोद्धार होने के फलस्वरूप जनपद महराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर जनपदों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई है। परियोजना लागत 243 करोड़ रूपये नाबार्ड से स्वीकृत कराकर कार्य युद्ध स्तर पर कराये जा रहे है लगभग 100 करोड़ के कार्य पूर्ण कराये जा चुके है जिसके फलस्वरूप लगभग 50000 हेक्टेयर सिंचन क्षमता उपलब्ध हुई है।

गण्डक नहर का पुनरोद्धार प्रगति पर
*    भूपौली पम्प नहर परियोजनाः-
उक्त परियोजना की लागत लगभग रू0 10045 लाख है। परियोजना पर 9389 लाख व्यय करके पम्पों की स्थापना का कार्य एवं नहरों का पुनरोद्धार कराकर लगभग 34612 हे0 सिंचन क्षमता का सृजन किया गया है। इस परियोजना से जनपद चन्दौली का क्षेत्र लाभान्वित होगा। परियोजना की भौतिक प्रगति 93 प्रतिशत है।

*    उ0प्र0 वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग परियोजनाः
वर्तमान सरकार के गठन के पश्चात प्रदेश के 12 जनपदों एटा, फिरोजाबाद, कासगंज, मैनुपरी, फर्रूखाबाद, इटावा, कन्नौज, औेरैया, कानपुर देहात, कानपुर नगर, फतेहपुर तथा कौशाम्बी में निचली गंगा नहर प्रणाली के सुदृढ़ीकरण का कार्य कराकर न केवल परियोजना की स्वीकृति कराई गई, बल्कि मौके पर 145 करोड़ रूपये व्यय करके नहर की क्षमता 4200 क्यूसेक से बढ़ाकर 6480 क्यूसेक की गई है जिससे समस्त टेलों तक पानी पहुॅंचाना सम्भव होगा।

3-   बुन्देलखण्ड क्षेत्र में अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने की प्राथमिकताः-
पूर्ववर्ती सरकार ने अपने कार्यकाल में बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 3083 करोड़ रूपये की लागत की 09 परियोजनाएं, जो चार वर्षों में पूर्ण होनी थीं, के अनुबन्ध तो गठित कर दिये पर आवंटन सिर्फ 1300 करोड़ रूपये का ही किया गया। वर्तमान सरकार ने आते ही इन अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने का बीड़ा उठाया तथा गत 04 वर्षो में 2000 करोड़ रूपये उपलब्ध कराए, जिससे 04 अधूरी सिंचाई परियोजनाओं- कचनौंधा, उटारी, लोअर रोहिणी बाॅध परियोजना तथा अगौसी पम्प कैनाल परियोजना पूर्ण कर कर ली गई हैं तथा शेष पाॅंच परियोजनाएं आगामी दस माह में पूर्ण कर ली जाएगी।
उक्त के अतिरिक्त वर्तमान सरकार द्वारा 04 परियोजनायें-भावनी बाॅध, बण्डई बाॅध, बबीना सिंचाई परियोजना तथा पेयजल की महत्वपूर्ण एरच बहुउद्देशीय बाॅध परियोजना पर कार्य तेजी से कराया जा रहा है। शेष तीन योजना को भी एक वर्ष में पूरा करने का प्रयास है।
*    बुन्देलखण्ड पैकेजः-
भारत सरकार द्वारा बुन्देलखण्ड में सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रथम एवं द्वितीय चरण में रू0 420 करोड़ की योजनायें स्वीकृत की गई जिसके सापेक्ष रू0 360 करोड़ ही अवमुक्त किये गये। जबकि राज्य सरकार ने अपने सीमित संसाधनों से बुन्देलखण्ड क्षेत्र में मात्र 04 वर्षो में रू0 2000 करोड़     आवंटित किये।

4-   आधुनिक टेक्नोलाॅजी का प्रयोगः-
सिंचाई विभाग के समस्त कार्यालयों का कम्पयूटरीकरण कर सूचना तकनीक से सुसज्जित किया गया है तथा इसे लखनऊ स्थित मुख्यालय स्तर पर कमाण्ड सेण्टर से जोड़ा गया है, जिससे परियोजनाओं के संचालन हेतु एंव प्रगति का अनुश्रवण किया जाता है। समस्त कृषकों से सीधे संवाद एवं समस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु पहली बार हेल्प लाइन टोल-फ्री सं0-1800-180-5450 सुविधा दी गई है। सरकार ने विभाग में इसे और गति देने के लिए अलग से आई0टी0 कैडर बनाने का निर्णय लिया है। इस संगठन में अब तक रू0 205 लाख व्यय किया गया है।

लखनऊ स्थित कमाण्ड सेण्टर

5-   राजकीय नलकूपों का सुदृढ़ीकरणः-
वर्तमान सरकार द्वारा 2728 नए राजकीय नलकूप, 551 नलकूपों का पुनर्निर्माण, 4528 नलकूपों का आधुनिकीकरण तथा 1968 नलकूपों का ऊर्जीकरण कराया गया। वर्ष 2012 से 2015 तक में रू0 228 करोड़ व्यय करके 2601 नये नलकूप बनाये गये इसी प्रकार वर्ष 2012 से 2015 तक रू0 113 करोड़ व्यय करके 620 असफल नलकूपों का पुर्ननिर्माण किया गया। वर्ष 2012 से 2015 तक रू0 170 करोड़ व्यय करके 5123 राजकीय नलकूपों का आधुनिकीकरण एवं नवीन पम्प सेटों की प्रतिस्थापना का कार्य किया गया है।
*    जनपद चन्दौली में बलुआ पम्प नहर का आधुनिकीकरण रू0 422 लाख से कराकर 2000 हे0 सिंचन क्षमता का सृजन हुआ है।
*    जनपद इलाहाबाद में टुडियार पम्प नहर पर रू0 589 लाख व्यय कर 1305 हे0 सिंचन क्षमता का सृजन हुआ है।
*    जनपद चन्दौली में धन कुआॅरी पम्प नहर पर रू0 2014 लाख का व्यय कर 1636 हे0 सिंचन क्षमता का सृजन हुआ है।
*    जनपद चन्दौली सोगाई पम्प नहर के निर्माण पर रू0 419 लाख का व्यय कर 272 हे0 सिंचन क्षमता का सृजन हुआ है।
*    जनपद कानुपर नहर में छतरापुर पम्प नहर के आधुनिकीकरण करने हेतु  रू0 37 लाख का व्यय कर 150 हे0 सिंचन क्षमता का सृजन हुआ है।
*    राजकीय नलकूपों एवं पम्प कैनालों को सौर ऊर्जा से चलाने की एक महत्वाकांक्षी योजना विभाग द्वारा तैयार की गई है।इसी कड़ी में  पहली बार पाइलेट प्रोजेक्ट्स के रूप में 03 स्थानों पर सौर ऊर्जा से राजकीय नलकूपों को चलाने का सफल प्रयोग किया गया है।

6-   गोमती नदी पर विश्वस्तरीय रिवरफ्रंट के विकास की परियोजनाः-

*    पिछले 30 वर्षो में सिर्फ दिखावे एवं फोटो खिचाने के लियेगोमती नदी की सफाई की गई। अब तैरते हुये ड्रेजर का प्रयोग करते हुये 3 से 5 मीटर तक गोमती गहरी की गयी है।

*    हार्डिंग ब्रिज से गोमती वीयर के मध्य 16 किमी0 लम्बाई में डायाफ्राम का निर्माण किया जा रहा है, जो नदी की तली से 11 मी0 नीचे तथा 5 मी0 तली के ऊपर है। 10 किमी0 लम्बाई में डायाफ्राम का निर्माण कार्य हो चुका है, डायाफ्राम निर्माण के कार्य को मार्च, 2017 में पूर्ण करना था। देश में पहली बार इस प्रकार की डायाफ्राम वाल समय से 01 वर्ष पूर्व पूर्ण हो जायेगी।

*    गोमती नदी में कोई गन्दा पानी न जाये इस हेतु इण्टरसेप्टिन्ग ड्रेन 26 किमी0 दोनों किनारे पर बनायी जा रही है। इसका कार्य 05 किमी0 में किया जा चुका है। यह कार्य भी समय से 6 महीने पहले पूरा हो जायेगा।

*    जीवन को नदी से जोड़ना है, इस भावना को मूर्तरूप देने के लिये अन्र्तराष्ट्रीय ख्याती प्राप्त संस्था ।म्ब्व्ड जिसने सिंगापुर, मलेशिया में रिवर फ्रण्ट का डिजाईन किया है, द्वारा गोमती रिवर फ्रण्ट विकसित किये जाने हेतु डिजाईन/विजन डाक्यूमेण्ट तैयार किया गया है।, जिसमें गोमती किनारे हरियाली, साइकिल ट्रैक, वाकिंग ट्रैक तथा पार्क, फव्वारें विकसित किये जायेेंगे।

*    पुलों में रोशनी का विशेष प्रबन्ध किया जा रहा है।

*    रबर डैम का निर्माण प्रारम्भ किया जा रहा है।

*    गोमती में अतिरिक्त पानी लाने के लिये शारदा, शारदा सहायक से जोड़ा जा रहा है।
प्रस्तावित रिवरफ्रण्ट
आधुनिक मशीनों द्वारा गोमती नदी की सफाई
डायाफ्राम वाल
आर0सी0सी0 एचडीपीई लाईन्ड पाईप
बैराज के इल्यूमीनेशन का कार्य
पक्के पुल का प्रस्तावित इल्यूमिनेशन
7-   बाढ़ नियंत्रण
बाढ़ परियोजना पर विगत 03 वर्षो में रू0 1548 करोड़ रू0 व्यय कर अतिसंवेदनशील 38 जनपदों में बाढ़ बचाव कार्य तथा तटबन्धों का निर्माण, कटाव निरोधक कार्यकराये गये। वित्तीय वर्ष 2015-16 में रू0 250 करोड़ बाढ़ बचाव कार्यो पर आवंटित किये गये। विगत03 वर्षो में जल निकास अनुरक्षण मद में रू0 170 करोड़ व्यय कर 13683 किमी0 ड्रेनों की सफाई की गयी। वित्तीय वर्ष 2015-16 में ड्रेनों की सफाई के लिए रू0 20 करोड़ आवंटित किया जा चुका है।
8-   गंगा पुनर्जीवीकरण योजनाः-
विभागीय अधिकारियो से वार्ता करके गंगा के उत्तर प्रदेश में बहने वाले भाग यमुना नदी, काली (पूर्व व पश्चिम), मालिन नदी, रामगंगा, गोमती एवं सई आदि नदियों के पूरे कैचमेंट एरिया का सर्वे कराकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक नई कार्य योजना बनाई गई है। सरकार ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से अपेक्षा की है कि इस कार्य-योजना पर आई0आई0टी0, रूडकी का मत प्राप्त कर लें। इस परियोजना के अन्तर्गत जल संवर्धन के लिए आधुनिक स्ट्रक्चर बनाने की कार्य-योजना बनाई गई है। आई0आई0टी0, रूडकी का मत प्राप्त होने पर इसके वित्त पोषण हेतु सुसंगत संस्थाओं कर अग्रेतर कार्यवाही की जाएगी।
9-   वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सिंचाई विभाग में हुयी पदोन्नतियाॅः-
सिंचाई विभाग में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए वर्तमान सरकार जहाॅ एक ओर रिकार्ड लगभग 5500 पदोन्नतियाॅ की गयी वहीं कर्तव्यों के प्रति शिथिलता/उदासीनता पाये जाने पर 648 अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही, 109 अधिकारियों को निलम्बित किया गया एवं 301 अधिकारियों को दण्डित भी किया गया है।
हर खेत को मिले समय से पानी,
नहरें बनी जीवन दायिनी।