शिक्षा से ही होगा हर गरीब मजदूर का विकास – सी0डी0ओ0

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मानव जाति की खुशहाली के लिए मई दिवस हमें सघर्षशील बनाता है

भूमि कब्जा, पेयजल, संपर्कमार्ग, जाबकार्ड, राशनकार्ड के छाये रहे मुददे

कवि सम्मेलन के माध्यम से रचनाकारों ने जागरूक किया मजदूरों को

विश्व मजदूर दिवस पर गरीबी के अंतिम पायदान पर जूझ रहे, सहरिया आदिवासियों ने बढ़चढ़कर लिया हिस्सा

ललितपुर -जनपद के सर्वाधिक पिछड़े मड़ावरा ब्लाक में बुन्देलखण्ड सेवा संस्थान, चिनगारी संगठन, सहरिया जन अधिकार मंच एवं रोजगार हक अभियान के तत्वाधान में विश्व मजदूर दिवस के अवसर पर खेतिहर एवं जाबकार्ड धारक मजदूर सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी बुद्विराम एवं विशिष्ठ अतिथि परियोजना निदेशक राजीव लोचन पाण्डेय, उपजिलाधिकारी महरौनी आर.के. श्रीवास्तव रहे। गांव-गांव से आये सहरिया आदिवासी मजदूरों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, सम्पर्क मार्ग, आवास, राशन कार्ड, पटटा भूमि कब्जा वंचित, आजीविका, यातायात आदि से संबंधित मुद्दों को दूर-दूर के गांवों से आये हजारों की संख्या में महिला-पुरूषों ने प्रार्थना-पत्रों के माध्यम से अपनी-अपनी बात रखी जिस पर अधिकारियों ने एक सप्ताह के अंदर समस्याओं के निराकण का आश्वासन दिया।
ब्लाक मुख्यालय परिसर में आयोजित विश्व मजदूर दिवस के अवसर पर खेतिहर एवं जाबकार्ड धारक मजदूर सम्मेलन में मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी बुद्विराम ने कहा कि शिक्षा विकास के हर रास्ते प्रसस्त करती है। कहा कि जरा अपने बारे में सोचिये, देश को आजाद हुए एक लम्बा अरसा बीत गया किन्तु इसके बाद भी आप लोग वैसे के वैसे क्यों हैं। अपने बच्चों को पढायें तभी सही मायने में विकास की धारा से जुड सकेंगेे। मैं भी गरीब का बेटा हूं। गरीब हैं तो गरीबी कैसे कम हो इसके बारे में चिंतन करना होगा। सरकार की योजनाओं की सही जानकारी हो और सही लाभ मिले इसके लिए जागरूकता कार्यक्रमों में आकर सुनना और उनका अनुपालन करना सीखना होगा। बच्चों को शिक्षित करने पर ही गरीबी कम होगी। जब बच्चा पढ जायेगा तो उसकी नौकरी लग सकती है एवं वह जहां भी रहेगा अपने रोजी रोटी की व्यवस्था कर लेगा तथा जब उसका पेट भरेगा तभी वह अपने मां बाप एवं अन्य के बारे में सोचेगा। इसलिए यदि जीवन में खुशहाली लाना है तो शिक्षा को अपना कर अपने घरों को रोशन करें। कहा कि आवास का पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में आता है, यदि कोई कोई अधिकारी समय से पैसा नहीं निकालता या फिर पैसा मांगता है तो उसकी सिकायत करें, कार्यवाही की जायेगी। कई जगह लाभार्थी आवास का पैसा निकालकर खा जाते है और आवास अधूरा पडा रहता है इसलिए आप लोग आवास का पैसा आवास में ही खर्च करें और समय से कार्य पूरा कराके गांव एवं जिले की तरक्की में सहयोग करें। जो गांव अम्बेडकर गांव में आ गये हैं वहां पर कोई भी गरीब आवास से वंचित नहीं होगा।
परियोजना निदेशक राजीव लोचन पाण्डेय ने कहा कि मजदूर अपने जाबकार्ड का महत्व समझें। साल मे 100 दिन का रोजगार का मतलब है कि गरीब को 10000 रू0 का काम मिलना ही है, जिससे कोई भी परिवार न तो पलायन करेगा और न ही भूखों मरेगा। वैसे तो हर गांव में काम चल रहे हैं किन्तु यदि किसी गांव में काम बंद है या फिर काम नहीं मिल रहा तो काम की मांग करे, फोन पर या फिर पत्र द्वारा सूचना दें, उन्हें तत्काल काम दिलाया जायेगा। कहा कि बुन्देलखण्ड मे मजदूर को सिर्फ 60 घन फिट मिटटी ही निकालनी पडती है इसके बाद भी लोग सही तरीके से काम नहीं करते हैं। आधा अधूरा काम करते हैं जिससे जब एमबी बनती है तो कम पैसा निकलता है, इसलिए आप लोग पूरा काम करें, और पूरी मजदूरी लें तभी बदलाव आयेगा। यदि मजदूरी मिलने में किसी कारण से विलम्ब हो रहा है तो संबंधित विकास अधिकारियों को अवगत करायें।
उपजिलाधिकारी आर.के. श्रीवास्तव ने कहा कि पटटा भूमि कब्जा से वंचित परिवारों को हर दशा में उनकी जमीन में उनकों कब्जा दिलाया जायेगा। कहा कि लेखपालों को संबंधित गांवों में लगाकर सहरिया आदिवासी परिवारों को कब्जा दिलाया जायेगा। जो दबंग जमीनों का कब्जा नहीं छोडेंने का प्रयास करेंगें उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही कर कब्जा दिलाया जायेगा। कहा कि आप लोग फोन या फिर लिखित में पत्र देकर अवगत करायें तत्काल कार्यवाही कर समस्या का निराकरण किया जायेगा।
अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के संस्थापक वरिष्ठ समाज सेवी गोपाल भाई ने कहा कि बुन्देलखण्ड में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। चाहे कवि हों या फिर मृदंग वादक, लोककलाओं के धनी इस क्षेत्र की सम्पदाओं का दोहन करके यहां के लोगों को गरीब बनाया गया है। प्राकृतिक संतुलन को विगाड़कर हम बडे़-बड़े भवन खडे कर रहे हैं। जिससे बडे-बडे पहाड एवं वृक्ष नष्ट हो रहें है। पहाडों को खनन की परमीसन भी जिम्मेदार अधिकारी ही देते हैं। इसलिए इसपर गहन चिंतन की जरूरत है। इतिहास में जिस प्रकार से कवियों ने जागरूकता के लिए कवितायें लिखकर लोगों को जगाने का काम किया था आज जरूरत फिर से है कि कविताओं के माध्यम से समाज को जगाया जाये तभी समस्याओं के निराकरण की हम बात कर सकते हैं।
नेहरू महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो0 भगवतनारायण शर्मा ने ठेट बुन्देली बोली में अपने उदगार व्यक्त करते हुए जनजाति समुदाय से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि मानव जाति की खुशहाली के लिए मई दिवस हमें सघर्षशील बनाता है। कहा कि वेतन भोगी संगठित क्षेत्र में सिर्फ 2.6 करोड़ कर्मचारी ही आते हैं, पर खंेतिहर मजदूर गरीब किसान, निर्माण मजदूर, शिल्पकार आदि वंचितजनों जिनकी तादाद 80 करोड़ है अंसगठित क्षेत्र में माने जाते हैं, परन्तु देश की सकल आय ‘‘जी.डी.पी.‘‘ में इनका हिस्सा 50 प्रतिशत से अधिक है यदि इन करोडों बेजुबानों द्वारा अर्जिम राष्ट्रीय आय का एक प्रतिशत हिस्सा ईमानदारी से खर्च किया जाये तो न जाने कितने मुरझाये चेहरों पर मुस्कान खिल सकती हैं। कितने ही सूखे खेतों में रूठी हरियाली दौड़ सकती है, परन्तु पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से लेकर युवा नेता राहुल गांधी तक आते-आते अभी यह तयं ही नहीं हो पा रहा है कि 5 पैसे से लेकर 15 पैसे तक जरूरतमंदों के जेबों तक क्यों पहुंच रहे हैं, और 85 प्रतिशत धन किसकी जेब में पहुंच रहा है। प्रो0 शर्मा ने आगे कहा कि जिस दिन असंगठित क्षेत्र के श्रमिक संगठित हो जायेंगें उस दिन निर्माण और विकास का आदेश दिल्ली और लखनऊ से न आकर ग्रामीण धरातल से नीचे से उपर की ओर जाने लगेगा और सिर के बल खड़ा तंत्र अपने पावों के बल पर खड़ा हो जायेगा, बसर्ते कि दायें-बायें देखे बिना कोटि-कोटि मजदूर परस्पर संगठित रहने के सत्य पर अपनी अर्जुन दृष्टि जमायें रहें। एक का दुःख सबका दुःख की भावना से प्रेरित विश्व मजदूर दिवस अपने गर्भ में विराट सामाजिक रूपांतरण की प्रजण्ड शक्ति धारण किये है। ये मानव जाति की खुशहाली के लिए हमें सतत संघर्षशील बनाती है।
बुन्देलखण्ड सेवा संस्थान के मंत्री वासुदेव ने कहा कि 1 मई 1886 को अमेरिका के सबसे बडे़ औद्योगिक नगर केन्द्र शिकागों में 8 घण्टें के कार्य दिवस तथा मजदूरों की बेहतर कार्य दशाओं की मांग को लेकर शांती पूर्वक की जाने वाली हड़ताल के क्रम में उतपीड़क नियोक्ता उद्योगपतियों की शह पर जिन 7 निर्दोष मजदूर नेताओं को न्यायिक प्रक्रिया का स्वां्रग रचाते हुए जिस प्रकार निर्ममता पूर्वक फंासी पर चढ़ा दिया गया उन्हीं शहीदों की याद पर आयोजित विश्व मजदूर दिवस में मडावरा क्षेत्र के दूर दराज के गांवों के लोगों ने आकर अपनी एक जुटता एवं भाई चारे का प्रर्दशन किया है। यह ऐतिहासिक घटना है। अब इस क्षेत्र का गरीब मजदूर जागरूक एवं संगठन की राह पर चल पड़ा है
चिनगारी संगठन के अर्जुन सहरिया ने समस्याओं का सात सूत्रीय ज्ञापन सी0डी0ओ0 एवं उपजिलाधिकारी को सौंपते हुए कहा कि मडावरा ब्लाक जिले का सर्वाधिक पिछडा ब्लाक है जहाॅ पर शिक्षा साक्षरता का प्रतिशत बहुत कम है । यहाॅ दलित, सहरिया, गौड आदिवासी सुदूर जंगलो में बसे है जिसके कारण शिक्षा स्वास्थ्य, आजीविका, यातायात, पानी बिजली के सुविधाओ से वंचित है कुर्रट, लखंजर, नीमखेडा जैसे एक दर्जन गाॅव वन विभाग के कडे कानूनो के कारण सर्वागीण विकास से नही जुड पा रहे है। बच्चे तथा महिलाऐ अमानवीय जीवन जीने को मजबूर है। सहरिया आदिवासी परिवारों के गरीबी रेखा से ऊपर उठने में कृषि आधारित आजीविका का प्रमुख आधार भूमि है। सरकार द्वारा दिये गये पट्टे की भूमि में आज भी गरीब आदिवासी को कब्जा नही मिल रहा पा रहा है। उच्चाधिकारियों के  आदेशों का पालन स्थानीय लेखपाल सही ढ़ग से नही करते है। मडावरा क्षेत्र के 22 गावों के 101 पट्टेदारो की भूमि में उनको अब तक कब्जा नही मिल पा रहा है भूमि माप एंव कब्जा दिलाओ अभियान चलाकर कब्जा दिलाया जाये। इसके साथ ही सभी भूमिहीनों को आवासीय पट्टा अनिवार्य रूप से दिया जाये। जिन अनुसूचित जाति एंव जनजाति के लोगों के पास आवासीय भूमि नही के बराबर है, उसे आवासीय जमीन खरीद कर पट्टा दिया जाये। 10 वर्ष पुरानें पटटेदारों को जो भूिमधर बन चुके है और उनको अब तक मौके में खेत पर कब्जा नही मिला उसे भी मौके में कब्जा दिलाया जायें। वर्तमान में लेखपाल पुराने पटटेदारो को भूमिधर घोषित होने पर कब्जा नही दिलातें है। गरीबो को हदबन्दी दायर करने को लेखपाल प्रेरित करते है यह प्रक्रिया गरीबो के लिये काफी खर्चीली है। 5-10 हजार रू0 तहसील में जमा करना होता है। ग्राम सभा में तालाबों के पटटे गरीब आदिवासी परिवारो को तथा ढीमर परिवारो को मछली पालन के लिए दिये जायें। जिस ग्राम सभा की जमीन पर जिस भूमिहीन का कब्जा 1 मई 2007 से है, उसका उस जमीन पर 122 बी 4 एफ, वह 123 एक के आधार पर नाम दर्ज किये जायें। मडावरा ब्लाक में 132 प्राईमरी एंव 76 जूनियर विद्यालय है इन विद्यालयो में शिक्षको की कमी है जिससे बच्चों की पढाई ठीक से नही हो पा रही है। 18 प्राईमरी विद्यालय मे 18 शिक्षामित्र नही है और 5 विद्यालयो में शिक्षको का अभाव है। तीन जूनियर विद्यालयों मे अध्यापक नही है जिससे  सहरिया आदिवासी गरीब दलित बच्चे सबसे अधिक प्रभावित है मिडडे-मील भी समुचित ढंग से नही मिलता है आदिवासी बच्चो  के साथ भेदभाव किया जाता है।
घनघोर जंगल के बीच बसे गावों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जंगल के गांव लखंजर, पापरा, ठनगना, बारई, कुर्रट, जैतुपुरा, आदि के बच्चे तथा महिलाऐं स्वास्थ्य सुविधा से वंचित है। गर्मी और बरसात में मौसमी बीमारिया फैल जाती है कई दुखद घटनाऐं घट जाती है।
अप्रैल माह में किये गये सर्वेक्षण के आधार पर मडावरा ब्लाक के कुल 43 गावों के 432 हैण्डपम्पो में से 99 हैण्डपम्पों ने पानी देना बन्द कर दिया है। इसी प्रकार कुल 224 कुओं में से 98 कुऐं बेकार हो गये है। क्षेत्र में पेयजल संकट समाप्त करने हेतु हैण्डपम्पो को ठीक कराने तथा कुओ की मरम्मत कराने की अत्यन्त आवश्यकता है। ब्लाक के 23 गावों में जिनमे से हनुमतगढ, जलंधर, खैरपुरा, गिरार, विरोंदा, बम्हौरीखुर्द, मानपुरा, गरौलीमाफ, हीरापुर, टपरियन, बडवार, परसाटा, टोरी, सकरा, सागर, टौडीखैरा, हसेरा, सोरई सीरोन, कुर्रट, जैतुपुरा, ठनगना, हीरापुर में मनरेगा के माध्यम से कोई काम नही चल रहा है जिसके कारण गरीब लोग परेशान हैं। 5 ग्राम गरौली माफ, धौरीसागर, टोरी, हसेरा, जैतुपुरा की कुल 35 परिवारो की मजदूरी अभी तक शेष है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्र्तगत मडावरा ब्लाक के 18 गाॅव यथा हनुमतगढ, जलंधर, खैरपुरा, इमलिया, विरोंदा, बम्हौरीखुर्द, नीमखेडा, परसाटा, धौरीसागर, सेमरखेडा, सकरा, सागर, भौती, सीरौन, मदनपुर, दलपतपुर, जैतुपुरा, सोल्दा में राशन कार्ड धारको कों सस्ता अनाज गेहू, चावल, मिटटी का तेल, नही मिल पा रहा है। कोटेदार गरीबों की सामाग्री उन्हे नही दे रहे है।
सम्मेलन में खण्ड विकास अधिकारी एम.के. दीक्षित, देवब्रत क्षेत्रीय प्रबंधक एक्शन एड लखनऊ, समीनाबानों पी.ओ. एक्शन एड लखनऊ, चिनगारी संगठन की शीलरानी सहरिया, सरजूबाई रैकवार, अजय श्रीवास्तव साईं ज्योति, संजय सिंह परमार्थ, मनोज कुमार कृति शोध संस्थान महोबा, सहरोज फातिमा चित्रकूट, बुन्देलखण्ड सेवा संस्थान के मानसिंह, रनवीर सिंह, राहत जहां, कौशर जहां, ऊषा सेन, श्रीराम कुशवाहा, मईयादीन, अनिल तिवारी,, बृजलाल कुशवाहा आदि मौजूद रहे। सुरक्षा की दृष्टिकोंण से थानाध्यक्ष मडावरा शमीम खांन कार्यक्रम में मौजूद रहे।

‘‘खुद झोपडी में रहते औरों के घर बनाते, मजदूर धूप में भी अपना लहू बहाते‘‘

विश्व मजदूर दिवस के अवसर पर खेतिहर एवं जाबकार्ड धाराक मजदूर सम्मेलन साहित्यक संस्था हिन्दी उर्दू अदबी संगम द्वारा कवि सम्मेलन एवं मुषायरे के द्वारा कवियों एवं रचाकारों द्वारा कविताओं के माध्यम से मजदूरों को जागरूक करने का काम किया गया। एडवोकेट रामकृष्ण कुशवाहा ने कहा कि पेट्रोल बनकर लहू मजदूरों का जलता है, तरक्की का रास्ता मेहनत से निकलता है, गरीबी का अहसास कहां है अमीरों को, मजदूरों के घर में चूल्हा कैसे जलता है। मु0 शकील साहब ने कहा कि खुद झोपडी में रहते औरों के घर बनाते, मजदूर धूप में भी अपना लहू बहाते। रचनाकार हरिनारायण पटेल ने कहा कि जागों ये मजदूर किसानों, वक्त गुजरता जायेगा, हम जग के हर दुखयारे को , नया संदेशा लायेगें। कवि किशन सिंह बंजारा ने कहा कि भाई बहिनों पेड लगायें, एक नहीं दो चार लगायें, इन्हें देखकर लोगों के मन में भी होगा विचार, लगाओ पेड़ खुशी से यार। अख्तर जलील अख्तर ने कहा कि अख्तर किसी की भूख की शिददत तो देखिये, कपडों में कोई पेट का पत्थर छिपाये हैं। शायर नंदलाल पहलवान ने कहा कि गरीब भी मजदूर भी बन सकता है हाकिम, बाबा साहब ने ऐसा करके दिखा दिया। कवि दशरथ पटेल ने कहा कि जाओ देखो भारत की तस्वीर, कोऊ खां न मिलहें सूखी रोटी, कोऊ कोऊ खाये खीर, कोऊ खों नैया मठा महेरी, कोऊ खाये दूध पनीर, जा देखौं भारत की तस्वीर। शिखरचंद मुफलिस ने कहा कि कौन मां के पेट से लाया तिजोडी, नग्न दफनाये गये लाला, करोडी। कवियों की जागरूगता की रचनाओं ने क्षेत्रीय लोगों को नयी ऊर्जा देने का काम किया, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा। सम्मेलन में कवि किशन सिंह बंजारा, गीतकार हरीनारायण पटेल, शायर मोहम्मद शकील, कालूराम कुशवाहा, कवि दशरथ पटेल, अख्तर जलील अख्तर, शायर नंदलाल पहलवान, शिखर चंद्र मुफलिस, रामकिशन सिंह कुशवाहा आदि ने रचनाओं के माध्यम से सशक्त करने का काम किया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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