शाम से ही होने लगता है रात का एहसास मशीनों से निकली धूल के कारण सड़क पर चलना हो जाता है मुश्किल चाय-पान की दुकान करने वालों को भी हो रही हैं दिक्कते लोगों का कहना है कि बिना मानक के चलने वाले क्रेशर उद्योग कर रहे हैं बीमार

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शाम का धुंधलका और क्रेशर मशीनों से निकलने वाली धूल पूरे इलाके में काफी रात हो जाने का एहसास लोगों को दिलाता है। इस अंधेरे में सड़क पर आवागमन करने वालों को तो परेशानी होती है। साथ ही यहां चाय-पान की दुकान चलाने वालों को भी जल्दी ही दुकानें बन्द करनी पड़ती है। लेकिन इनकी पहुंच और पकड़ इतनी मजबूत है कि इनके खिलाफ सम्बंधित विभाग के लोग भी हाथ नहीं डाल पाते।

मामला आपरेशन पोस्ट भरतकूप के आस-पास संचालित के्रशर उद्योग का है। यहां कई ऐसी क्रेशर मशीनें संचालित हैं जिनके पास पर्याप्त कागजात भी नहीं हैं। क्रेशर मालिकों की मनमानी का सामना कर रहे यहां रहने वाले लोग बताते हैं कि जैसे ही बिजली आती है मशीनें चालू हो जाती हैं और इनसे इतनी धूल उड़ती है कि लोगों को सांस लेना भी दूभर हो जाता है। इतना ही नहीं मानक के अनुसार तो ऐसे उद्योग जिनसे लोगों को परेशानी हो और बीमार होने की आशंका उन्हें बस्ती से काफी दूर पर लगाना चाहिए। लेकिन बहुत सी ऐसी मशीनें है जो भरतकूप बस्ती में ही संचालित हो रही है। अधिकतर मशीनें रेलवे स्टेशन के समीप लगी होने से ट्रेनों से आने जाने वाले यात्रियों को भी काफी परेशानी होती है। सूत्रा बताते हैं कि क्रेशर उद्योग संचालकों के पास पर्यावरण विभाग का प्रदूषण प्रमाण-पत्रा भी होना चाहिए। लेकिन जिले में या मण्डलमुख्यालय में इसका दफ्तर होने के कारण इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाता और के्रशर उद्योग के कारण पूरा इलाका प्रदूषित हो रहा है। इसका नुकसान यहां चाय-पान की दुकान चला अपना गुजर-बसर करने वाले दुकानदारों को भी उठाना पड़ता है। लोग बताते हैं कि शाम के समय कटौती के बाद जैसे ही बिजली आती है तुरन्त मशीनें चालू हो जाती हैं। शाम के धुंधलके और मशीनों से निकलनी वाली धूल के कारण लोगों को काफी रात हो जाने का एहसास होने लगता है। इतना ही नहीं धूल के कारण शाम से ही अंधेरा हो जाने के चलते अक्सर लोग मार्ग दुर्घटनाओं का शिकार भी होना पड़ता है। क्रेशर मालिकों की मनमानी झेल रहे यहां रहने वालों में से ज्यादातर लोगों को सांस व दिल की बीमारी भी हो गई है। लोग बताते हैं कि यदि कोई इन्हें मशीने चलाते समय पानी आदि का छिड़काव करने की सलाह देता है तो ये लोग अपनी दंबगई और पहुंच की ताकत के बल पर उसे धमकियां देते हुए चुप करा देते हैं। इनकी पहुंच और पकड़ के चलते सम्बंधित विभागीय लोग भी इनपर हाथ डालने से डरते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिना मानकों के बस्ती के बीच में चल रही क्रेशर मशीनों को जल्द ही न बन्द किया गया तो यहां हर घर के लोग बीमार होने की कगार तक पहुंच जाएंगे।