शरीर में नेत्र सबसे महत्वपूर्ण अंग कार्यशाला ३ सितम्बर से

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चित्रकूट- जानकीकुंड चिकित्सालय में इन दिनों नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जा रहा है। जिसमें नेत्रदान, नेत्र रोग व उपचार के साथ ही नेत्र संबंधी सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन कर सबको जागरूक किया जा रहा है। यह पखवाड़ा 8 सितंबर तक चलेगा।

नेत्र रोगों के विषय में आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि शरीर के वैसे तो सभी अंग महत्वपूर्ण हैं, पर सबसे महत्वपूर्ण नेत्र होते हैं। जो मनुष्य के मरने के 6 घंटे बाद तक जीवित रहती हैं। नेत्रदान कर दो नेत्रहीनों के जीवन में प्रकाश व खुशी भरी जा सकती है। चिकित्सालय के प्रमुख डा. बी के जैन ने बताया कि भारत में 30 लाख व्यक्ति कार्निया से पीडि़त हैं। जिसमें दस लाख तो सिर्फ बच्चे हैं। इनकी संख्या में प्रतिवर्ष 15 हजार की वृद्धि होती है। सरकार भी नेत्र रोगों के प्रति बहुत गंभीर है। इसीलिये प्रतिवर्ष नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय में भी अब नेत्र कोष की स्थापना कर दी गई है।

इसके अलावा स्कूली बच्चों के साथ क्विज टाइम प्रतियोगिता हुई। जिसमें नेत्र से संबंधित सवाल जवाब हुये। पांच-पांच बच्चों की पांच टीमों के बीच हुई प्रतियोगिता में विद्या धाम स्कूल के कुमार शांतनु व दिव्या, कालरा नर्सिग स्कूल की रश्मि व पैरामेडिकल के छात्र कन्हैया लाल व रंजीत द्विवेदी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके बाद निबंध व पोस्टर प्रतियोगिता हुई। सभी विजयी प्रतिभागियों को 3 सितंबर को पुरस्कृत किया जायेगा।

राष्ट्रीय दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत मोतिया बिन्द,ग्लोकोमा एवं आंख से सम्बधित नवीन उपचारों की दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ सद्गुरू नेत्र चिकित्सालय में 3 सितम्बर को होगा। जिसमें स्वास्थ्य संचालक भारत सरकार डा.आर जोश सम्मिलित होगे। यह जानकारी चिकित्सालय के डायरेक्टर डा. वी के जैन ने दी ।