वृंदावन में तब्दील हो जाता है चरखारी

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महोबा- कृष्ण मंदिरों से विभूषित चरखारी कार्तिक में पूरे माह के लिए वृंदावन में तब्दील हो जाती है। यह सहस्त्र श्री गोवर्धन नाथ के प्रति भगवान कृष्ण के अन्य स्वरूपों का समर्पण है कि इलाके के 108 ऐतिहासिक व प्रतिष्ठित देव मंदिरों की प्रतिमाएं देवालय छोड़ मेला परिसर में डेरा डाल देती हैं जिससे पूरा कस्बा कृष्णमय हो जाता है।

ऊंची पर्वत श्रंखलाओं और कश्मीर की वादियों को मात देते कमल दलों से आच्छादित सरोवरों के बीच बसा चरखारी बुंदेलखंड का कश्मीर कहा जाता है। कार्तिक में यहां लगने वाला सहस्त्र श्री गोवर्धन नाथ मेला लाखों कृष्ण उपासकों की उपस्थित व जगह-जगह चल रही कृष्ण लीलाओं के कारण वृंदावन बन जाता है। इस मेले की शुरुआत वर्ष 1883 में तत्कालीन राजा मलखान सिंह जूदेव ने की थी। दरअसल राजतंत्र के जमाने में यहां के सारे राजा कृष्ण उपासक रहे। सभी ने भारी संख्या में कृष्ण मंदिरों का निर्माण कराया। एक सौ आठ भव्य कृष्ण मंदिरों की उपस्थित से मुरलीधर इस कस्बे के रोम-रोम में समा गये। यही कारण है कि राज्य स्तरीय मेले का दर्जा प्राप्त होने के बाद भी इसका स्वरूप विशुद्ध धार्मिक है। याज्ञिक अनुष्ठान के साथ ही पूरे महीने भर विभिन्न कार्यक्रमों के साथ ही रात में कृष्ण लीलाओं का मनोहारी आयोजन देखने के लिए लाखों की भीड़ जुटती है। सर्वाधिक आकर्षक होती हैं गोपिकाओं के रूप में हजारों की संख्या में यहां कार्तिक स्नान करने वाली महिलाएं। अपने आराध्य कृष्ण की साधना में लीन यह महिलाएं हर गली कूचे में कृष्ण भक्ति के गीत गाती हुई उनसे दर्शन देने की प्रार्थना करती हैं। दधि, माखन और मिश्री का प्रसाद अर्पित करने की लालसा से मेला परिसर में आयी महिलाओं को कृष्ण वेश में सजे युवाओं के छेड़ने और दधि माखन लूटने का दृश्य देखने के लिए लाखों लोगों की भीड़ जुटती है। परंपरा है कि रास्ते से गुजर रही इन महिलाओं के आगे एक रेखा खींच देने से वह इसे खींचने वाले के प्रश्नों का उत्तर दिये बिना आगे नहीं बढ़ सकती। रेखा खींचने वाले को कृष्ण या उनका सखा माना जाता है। इनके बीच होने वाला शास्त्रार्थ धार्मिक कथाओं से परिपूर्ण होने के साथ ही बेहद रोमांचक भी होता है। कार्तिक स्नान करने वाली गोपिकाओं के झुंड और उन्हें छेड़ने वाले कृष्ण को देख हर कोई गुनगुनाता है कार्तिक माह धरम का महिना, इतै भीड़ भई भारी, वृंदावन भई चरखारी। मेला परिसर के अलावा भी कस्बे के हर गली कूचे में दिनभर यह दृश्य दिखायी देते हैं।

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