विधायक नाथूराम कुशवाहा का दिल का दौरा पड़ने से निधन

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ललितपुर- विधानसभा क्षेत्र के बसपा विधायक नाथूराम कुशवाहा का प्रात: दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। वह 62 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर लगते ही बसपा सहित सभी राजनैतिक दलों के नेताओं व उनके शुभ चिंतकों का आवास पर जमावड़ा शुरू हो गया। कल तक रोज की तरह लोगों से घुल मिल रहे विधायक के अचानक दिवंगत होने की खबर से पूरा जिला स्तब्ध रह गया। सायं 6 बजे उनके आवास से अंतिम यात्रा निकाली गई। इसमें हजारों की संख्या में लोगों ने शामिल होकर उन्हे अंतिम विदाई दी। विभिन्न संगठनों ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया।

जनपद जालौन के ग्राम सरावन के किसान परिवार में जन्मे विधायक कुशवाहा शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात सिंचाई विभाग में अवर अभियंता के पद पर तैनात हुए। करीब दो दशक वर्ष पूर्व उनकी तैनाती जनपद ललितपुर में हुई। शुरूआती दौर में बेगाना सा लगने वाला ललितपुर उन्हे इतना भाया कि वह अपने पैत्रक गाव को ही भुला बैठे और उन्होंने यहीं बसने का मन बना लिया। करीब ढाई वर्ष तक वह सहायक अभियंता के पद पर तैनात रहे। विभागीय कार्यकाल पूर्ण कर लेने के बाद 31 दिसम्बर 2006 को वह सेवानिवृत्त हो गए। उस समय उन्होंने यही कहा था कि वह अब आध्यात्म की ओर मुड़ कर अपने जीवन को सरलतापूर्वक गुजारेगे।

किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने जिले की राजनीति में पाव बढ़ाने के प्रयास शुरू किये। अभी उन्होंने राजनीति का ककहरा ठीक से पढ़ा भी नहीं था कि विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गयी और राजनैतिक दलों में टिकटों के वितरण को घमासान मचने लगा। सेवानिवृत्त सहायक अभियंता ने राजनीति के माध्यम से समाजसेवा करने के उद्देश्य से बहुजन समाज पार्टी से ललितपुर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवारी के लिए आवेदन जमा किया। बसपा ने भी उन्हे अपना उम्मीदवार घोषित करने में समय नहीं गंवाया, क्योंकि सोशल इजीनियरिग के फार्मूले में इजीनियर नाथूराम कुशवाहा बसपा के आइने में पूरी तरह फिट बैठ रहे थे। बसपा से टिकट घोषित होने के बाद जिले के राजनेताओं ने भी उन्हे काफी हल्के में लिया क्योंकि चुनाव मैदान में कई दिग्गज सामने थे और ऐसे में नौकरीपेशा करने वाले नाथूराम कुशवाहा कैसे सामना कर पाएंगे। यह सवाल सभी के मन में था। मतदान हुआ और जब परिणाम सामने आये तो वह काफी चौंकाने वाले थे। उन्होंने जिले की राजनीति में सर्वोच्च स्थान रखने वाले बुंदेला के सामने चुनाव जीता था और वह विधायक बन चुके थे। इसके बाद उन्हे राजनीति के दाव पेंच समझने व चलाने में ज्यादा समय नहीं लगा और वह परिपक्व राजनेता की शक्ल में उभर कर सामने आये।

विधायक बनने के बाद उनकी दिन चर्या प्रात: जनता की समस्याएं सुनने से शुरू होतीं। कल जनसमस्याएं सुनने के बाद वह जिले में हो रहे अवैध खनन को देखने के लिए पत्रकारों का दल लेकर धौर्रा, जाखलौन क्षेत्र चले गए और उन्होंने स्वयं खडे़ होकर अवैध खननकर्ताओं के खिलाफ कार्यवाही भी करायी। इसके बाद वह तालबेहट के ग्राम खादी गए वहा गरीबों के गिरे आवास देखे और अधिकारियों से वार्ता कर कार्यवाही करने को कहा। रात्रि 10 बजे के दरम्यान वह तालबेहट में पार्टी कार्यकर्ताओं व शुभ चिंतकों से मुखातिब हुए। देर रात घर पहुंचे और प्रात: रोज की तरह उनकी दिनचर्या शुरू हुई। करीब 7.30 बजे के दरम्यान जब वह लोगों की समस्याएं सुन रहे थे तभी उन्हे सीने में दर्द की शिकायत हुई। तत्काल उन्हे जिला अस्पताल ले जाया गया, तब तक हालात काफी बिगड़ गए और हृदयागति थमने लगी। चिकित्सकों ने किसी तरह स्थिति सम्भाली और कार्डियोलॉजिस्ट डा.जी.के.अग्रवाल की निगरानी में उन्हे झासी रेफर कर दिया गया। रास्ते में दो जगह उन्हे पुन: हृदयाघात हुआ। साथ चल रहे चिकित्सकों ने उन्हे तत्काल जीवन रक्षक दवाएं दीं, ताकि किसी तरह झासी पहुंच कर उनका इलाज हो सके लेकिन विधाता को कुछ और ही मंजूर था। बबीना से पहले ही हुए तीव्र हृदयाघात में उनके प्राण पखेरू उड़ गए।

सदर विधायक कुशवाहा के निधन की खबर से जिले में शोक की लहर दौड़ गई। जिसने भी सुना वह कुछ समय के लिए स्तब्ध रह गया। हजारों भीड़ विधायक आवास पर जमा हो गयी। करीब 11 बजे उनका पार्थिव शरीर आवास पर लाया गया तो परिजनों का धैर्य टूट गया और उनका विलाप देख हजारों आखें नम हो गयीं।

सायं 6 बजे के दरम्यान उनके आवास से अंतिम यात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शामिल होकर विधायक को भावपूर्ण अंतिम विदाई दी। ज्येष्ठ पुत्र चेतन कुशवाहा ने उन्हे मुखाग्नि दी। विधायक नाथूराम कुशवाहा अपने पीछे धर्मपत्‍‌नी के अलावा दो पुत्र व एक पुत्री को बिलखता छोड़ गए है।

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