विकलांग कल्याण- धनाभाव से बाधित

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जालौन- जनपद में शासन द्वारा विकलांगों के कल्याणार्थ संचालित योजनाएं धनाभाव में दम तोड़ रही है। पेंशन योजना के अलावा दूसरी योजनाओं में लक्ष्य इतना कम है कि लंबित आवेदकों की संख्या हर वर्ष बढ़ती जाती है। विकलांगों के उपकरणों के लिए मांग की पूर्ति शासन ने दो वर्षो से नहीं की है।

विकलांग भरणपोषण योजना के अंतर्गत 18 से 60 वर्ष तक के विकलांगों को पेंशन दी जाती है बशर्ते उनकी वार्षिक आय बारह हजार रुपये तक या उससे कम हो तथा विकलांगता का प्रतिशत 40 हो। पात्र लाभार्थी को प्रतिवर्ष 3600 रुपये दो किश्तों में दिए जाते है। वर्ष 2009-10 में 9875 विकलांगों के लिए एक करोड़ 77 लाख 75 हजार रुपये का बजट शासन से प्राप्त हुआ जिसमें से 1 करोड़ 45 लाख 42 हजार 200 रुपये का उपयोग किया जा चुका है। 8079 विकलांगों को इस बजट से पेंशन उनके बैंक खातों में भेजी जा चुकी है। कृत्रिम उपकरण योजना के तहत 46 विकलांगों को लाभान्वित करने के लिए एक लाख 38 हजार रुपये शासन ने दिए जबकि बीते वर्ष शिविर में एक हजार विकलांग बंधुओं को उपकरण मुहैया कराने के लिए आश्वस्त किया गया था। वर्तमान वित्तीय वर्ष में अभी तक तीस विकलांगों को उपकरण देकर लाभान्वित किया जा चुका है। विकलांग शादी प्रोत्साहन अनुदान को शासन ने केवल दस लाभार्थियों के लिए 1 लाख 25 हजार रुपये की धनराशि आवंटित की है जबकि 22 आवेदक आज भी बजट आने की बाट जोह रहे है। लंबित आवेदकों के लिए 2 लाख 82 हजार रुपये की आवश्यकता है। विकलांगों को व्यापार के लिए दुकान निर्माण या संचालन हेतु भी धन दिया जाता है। निजी भूमि पर दुकान निर्माण के लिए बीस हजार रुपये दिए जाते है। जिन विकलांगों के पास निजी भूमि नहीं है उन्हें दुकान संचालन के लिए दस हजार रुपये की धनराशि दी जाती है। जिसमें क्रमश: 5000 एवं 2500 अनुदान एवं 15000 तथा 7500 रुपये 4 प्रतिशत ब्याज की दर से ऋण शामिल है। इस योजना के जरिये पांच विकलांगों को लाभान्वित किया गया है जिसके लिए शासन से पचास हजार रुपये प्राप्त हुए थे। जिला विकलांग कल्याण अधिकारी राजेश बघेल ने बताया कि पेंशन योजना को छोड़कर तीनों योजनाओं में धनाभाव के चलते आवेदकों को पर्याप्त सहायता मुहैया नहीं हो पाती। जनपद में कम से कम एक हजार ऐसे विकलांग है जिन्हे उपकरणों की जरूरत है , दुकान संचालन के लिए भी निर्धारित लक्ष्य बहुत कम रखा गया है।