वाल्मीकि आश्रम के विकास का संतों ने लिया संकल्प

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चित्रकूट- रामायणम् के रचयिता आदि कवि वाल्मीकि ने ही विश्व को श्री राम से परिचित कराने का काम किया था। इसके बाद ही संत तुलसीदास ने श्री राम को पूर्ण पुरुषोत्तम के रूप में श्री राम चरित मानस में प्रस्तुत कर उन्हें जन-जन का राम बना दिया।

यह बात महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विद्यालय में रविवार को वाल्मीकि जयंती पर आयोजित संत सम्मेलन में महंत दिव्य जीवनदास ने कही। उन्होंने कहा कि आदिकवि वाल्मीकि महान युगदृष्टा थे। महंत रामदुलारे दास ने कहा कि पदुम पुराण और अश्वमेघ यज्ञ पुराण में उल्लेख है कि वाल्मीकि आश्रम में श्रीराम के पुत्र लव ने अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े को बांध लिया था। इसके पूर्व संत सम्मेलन में जुटे संत-महंतों ने लालापुर के वाल्मीकि आश्रम की उपेक्षा पर नाराजगी जतायी। निर्णय लिया गया कि चित्रकूट के सभी साधु संत वाल्मीकि आश्रम के विकास का प्रयास करेगे।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे आचार्य चंद्रदत्त पांडेय ने बताया कि सन् 1700 में औरंगजेब के कहर का शिकार लालापुर का मां आशांबरा देवी मंदिर व वाल्मीकि आश्रम भी हो गया था। इस मौके पर आश्रम के महंत कुटिलानंद, मानिकपुर नगर पंचायत अध्यक्ष नत्थू कोल, रामधाम आश्रम के रामकुमार दास, अवध बिहारी दास आदि मौजूद रहे।