वर्षा जल संचयन की कड़ी में जुड़ा पचखुरा गांव

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हमीरपुर- जल संचयन योजना में सुमेरपुर विकास खंड के पचखुरा खुर्द में परियोजना की शुरूआत की गयी। जिसमें निरंतर जल बहाव व अनियमित भूमि उपयोग के कारण 212 हेक्टेयर क्षेत्रफल में निरंतर गिरते भू-गर्भ जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए और फसलों की आकस्मिक सिंचाई व्यवस्था के लिए फार्म पांड, जल संचय बंधियां बनाकर उपचारित करने का प्रयास किया। इस परियोजना में 62.11 हेक्टेयर फार्म पांड, 51.75 हेक्टेयर जल संचय बांध बनाकर आगामी वर्षा ऋतु में पानी को पूरी तरह से फार्म पांड व जल संचय द्वारा खेतों में पानी रोकने का प्रयास किया। जिससे भूमि कटाव के क्षरण होते घावों को भरा जा सकेगा। भूमि के गर्भ में जलस्तर को ऊपर उठाने का प्रयास किया गया। 6 पक्की संरचनाओं के द्वारा 20543 मानव दिवस सृजित किये गये। जिससे बड़ी संख्या में मजदूरों को काम मिला और पलायन रुक सका। क्षेत्र की भूमि को उपचारित का खेती योग्य बनाया गया। जिससे किसानों में उत्साह है। जो लोग खेती करने से कटते थे, वह फिर इन कामों में लग गये। उधर भूगर्भ के जल स्तर में आधा मीटर की बढ़ोत्तरी हुई है। किसान अवधेश सिंह ने बताया कि परियोजना के संचालन से फसलों की सिंचाई के लिए बंधियों में पानी उपलब्ध हो सकेगा। इससे ढालू और ऊंची, नीची जमीन को समतल करने, उसकी सिंचाई करने और एक फसली वाले 150 हेक्टेयर क्षेत्र को दो फसली बदलने में मदद मिलेगी। उत्साहित किसानों ने चारा उत्पादन बढ़ाकर तार फेंसिंग करके, भूसा उत्पादन बढ़ाकर गांव में अन्ना प्रथा को रोकने का प्रयास करेंगे। जिला कृषि अधिकारी व भूमि संरक्षण अधिकारी के सामने किसानों ने संकल्प लिया कि वे बंधियों को टूटने से बचायेंगे, वर्षा ऋतु में बंधियों में पेड़ लगायेंगे। अरहर व अंडी की फसल लेंगे। गांव में महिलाओं के समूह गठित करके आचार, मुरब्बा बनाने का प्रशिक्षण दिया जायेगा। मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के हबीब खान ने परियोजना क्षेत्र के खेतों से मिट्टी के नमूने एकत्र करवाये और उर्वरता बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी