वन चेतना केन्द्रों का होगा कायाकल्प

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झांसी- लावारिसों की तरह अनउपयोगी पड़े प्रदेश में वन विभाग के वन चेतना केन्द्रों की दशा को सुधार कर उन्हे जन उपयोगी बनाने की शासन को सुध आई । लगातार उपेक्षा से अस्तित्व बचाने को अब तक जूझते रहे वन चेतना केन्द्रों का सूरते हाल बदलने की उम्मीद जाग गई है। मण्डल के उरई एवं ललितपुर के गोविन्द सागर वन चेतना केन्द्र को सुसज्जित करने के लिए धनराशि स्वीकृत कर दी है, किन्तु मोंठ केन्द्र वंचित रह गया है।

शासन ने आपरेशन ग्रीन योजना के तहत प्रदेश भर के वन चेतना केन्द्रों के विकास लिए हाल ही में 247.62 लाख रुपए के बजट को मंजूरी दे दी। शासन द्वारा योजना के तहत वन अधिकारियों से मांगे गए प्रस्तावों में झांसी मण्डल के जिला झांसी के मोंठ, जालौन के उरई व ललितपुर के गोविन्द सागर वन चेतना केन्द्र का प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें जालौन व ललितपुर के केन्द्रों को राशि मिल चुकी है। मोंठ के लिए प्रयास किए जा रहे है।

मण्डल के इन वन चेतना केन्द्रों में लम्बे समय से सौंदर्यीकरण और विकास के प्रयास नहीं किए गए थे। इससे इनकी हालत दुर्दशाग्रस्त हो गई और हरियाली भी लगातार नष्ट होती रही। जबकि जब इनकी स्थापना की गई थी उस समय यहां आने वालों ने फूलों की सुगन्ध व हरियाली का खूब लुत्फ उठाया, किन्तु कुछ समय बाद वन चेतना केन्द्रों की सुध लेने की फुर्सत नहीं रही। मात्र चौकीदारों के भरोसे कब तक हरियाली व पौधे जिन्दा रहते। समय के थपेड़ों ने उन्हे नष्ट करना शुरू कर दिया। हालांकि जिला योजना के अन्तर्गत मिलने वाली राशि से वन विभाग ने समय-समय पर हालत में सुधार के लिए प्रयास किए, किन्तु व न काफी रहे। अब शासन की आपरेशन ग्रीन योजना से उम्मीद जागी है।

जालौन व ललितपुर के वन चेतना केन्द्रों के लिए 2.14 लाख रुपए आवंटित किया गया है। प्रत्येक केन्द्र में 16 हजार रुपए से पीने के पानी की स्थायी व्यवस्था, 70 हजार रुपए से लॉन, फुलवारी के विस्तार, बच्चों के पार्क का उच्चीकरण, 11 हजार रुपए से कृषक सूचना केन्द्र को विकसित कर उपयोगी बनाया जाएगा। केन्द्रों का प्रभारी वन दरोगा को बनाया जाएगा ताकि वह पर्यावरण सन्तुलन, प्रदूषण नियंत्रण में पेड़ों की भूमिका, वृक्षारोपण व वन्य जीवों आदि के बारे में ज्ञानव‌र्द्धक जानकारी दे सके।