वनाधिकार अधिनियम में शिथिलता पर होगी दंडात्मक कार्यवाही-जिलाधिकारी

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वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में शिथिलता को लेकर शनिवार को जिलाधिकारी ने अफसरों को जमकर फटकारा। अधिनियम के तहत गठित ग्राम स्तरीय कमेटियों की बैठकें व कार्यवाही 10 दिन के अंदर पूरी न होने पर संबंधित अफसरों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही की चेतावनी भी जिलाधिकारी ने दी है।

कलेक्ट्रेट सभागार में शनिवार को हुई बैठक में अध्यक्षता करते हुये जिलाधिकारी विशाल राय ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत वनों में पिछले तीन पीढि़यों से रहने वाले अनुसूचित जन जाति और अन्य परंपरागत वन निवासियों को वन भूमि संबंधित अधिकारों की मान्यता दी जायेगी। राय ने देखा कि अधिनियम के तहत गठित तहसील स्तरीय समितियों में कर्वी में मात्र 44 व मऊ में 42 दावे हैं। उन्होंने कहा कि यह काम 10 दिन के अंदर पूरा किया जाना है, इसमें किसी तरह की शिथिलता मिलने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही की जायेगी। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी भारत यादव व एसडीएम सदर गुलाब चंद्र सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

वन अधिकार अधिनियम पाठा क्षेत्र के कोलों की दशा में सुधार नहीं ला सका है। इस अधिनियम को लागू करने को गठित 98 वन अधिकार ग्राम समितियों की निष्क्रियता के चलते कोलों को उनके कब्जे वाले भूमि का मालिकाना हक नहीं मिल सका है।

केंद्र व प्रदेश सरकारों द्वारा वनवासियों की दशा सुधार को किये जाने वाले प्रयासों का लाभ लेने के मामले में पाठा क्षेत्र के कोल एक बार फिर बदकिस्मत साबित हो रहे हैं। पिछले तीन पीढि़यों से वन में रहने वाले अनुसूचित जातियों और अन्य परंपरागत निवासियों को भूमि संबंधी अधिकार प्रदान करने को वर्ष 2006 में वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम लागू किया गया था।

वन अधिकार अधिनियम लागू रहने के बाद स्थानीय स्तर पर कमेटियां गठित करने के लिये बीते जनवरी माह में इसकी पहली बैठक तत्कालीन जिलाधिकारी आशीष गोयल ने लेकर तहसील स्तरीय व ग्राम स्तरीय वन अधिकार समितियों का गठन करने व दावों को प्राप्त करने के निर्देश दिये थे। साथ ही वनाधिकार अधिनियम के प्रचार-प्रसार के निर्देश भी दिये गये थे, ताकि स्थानीय वनवासियों को इसका लाभ मिल सके। इसके बाद से अधिनियम का क्रियान्वयन ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। बीते शुक्रवार को प्रदेश के मुख्य सचिव ने वीडीओ कांफ्रेसिंग के दौरान इसकी प्रगति असंतोषजनक होने पर पुन: दस दिन के अंदर समस्त कार्यवाही के निर्देश दिये हैं।