लौट रही है बिटिया रानी की मुस्कान

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मुरैना- अंचल में रानी बिटिया के चेहरे पर मुस्कान लौट रही है। पिछले तीन सालों में प्रतिवर्ष जिले में पैदा होने वाली लड़कियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। यानि जिले में कन्या भ्रूण हत्या में कुछ हद तक कमी आई है। यह निष्कर्स स्वास्थ्य महकमे की रिपोर्ट में सामने आया है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 91 की जनगणना के मुताबिक मुरैना जिले में एक हजार पुरुषों के मुकाबले महज 822 महिलाएं थीं। यानि प्रदेश भर में सबसे कम महिलाएं मुरैना जिले में थीं। लेकिन पिछले तीन साल में बेटियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है।

मुरैना जिले में पिछले तीन सालों में बेटियों को दुनियां में आने का मौका अधिक मिला है। यानि वर्ष 2006 से लेकर अब तक 92398 बेटियां दुनियां में आ चुकी हैं। इस लिहाज से बेटों व बेटियों का अनुपात सुधर रहा है। स्वास्थ्य महकमे की रिपोर्ट के मुताबिक अनुपात अब एक हजार बच्चों पर 890 हो गया है।

बेटियों के अधिक संख्या में जन्म लेने के पीछे दो कारण बताए जाते हैं। पहला यह कि जननी सुरक्षा योजना की वजह से संस्थागत प्रसव अधिक हो रहे हैं। दूसरा शासन की लाड़ली लक्ष्मी योजना सहित मिल रहीं कई लाभकारी योजनाएं हैं।

कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए संघर्ष कर रहे स्वयं सेवी संस्था के अनुसार पिछले तीन सालों में जिले में काफी बदलाव आया है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिले में कन्याओं की संख्या पिछले सालों की तुलना में बढ़ी है। सरकार की योजनाओं की वजह से लोगों में जागरूकता आई है और वे अब भेदभाव को भूल रहे हैं।

जिले के सोनोग्राफी सेंटरों पर कन्या भ्रूण लिंग परीक्षण तकरीबन बंद है। इस वजह से जिले के लोग आसानी से भ्रूण परीक्षण नहीं करा पाते। इसके लिए उन्हें जिले से बाहर जाना पड़ता है। इस वजह से भी कन्याओं की संख्या में इजाफा हुआ है।