लिंग परीक्षण कर रहे डाक्टरों पर संकट के बादल…

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झांसी। लड़के की चाह रखने वाले दम्पति से मोती रकम वशूलने बाले डाक्टरों की कमाई पर जिला प्रशासन की नई योजना त्यार।  कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए अब अल्ट्रासाउण्ड मशीनों की भी निगरानी होगी। इसे रोकने के लिये एक्टिव ट्रेकर अल्ट्रासाउंड मशीनों में लगाया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश में झांसी जिले को चुना गया है। जहां इसका प्रयोग कर अल्ट्रासाउंड की निगरानी सीधे तौर पर जिला प्रशासन द्वारा की जाएगी। जिलाधिकारी अनुराग यादव ने विकास भवन सभागार में पीसीसी एनडीटी एक्ट के अंतर्गत अल्ट्रसाउंड संचालन में एक्टिव ट्रेकर की भूमिका पर आयोजित कार्यशाला में बताया कि झांसी में लगभग 63 नर्सिंग होम हैं जिनमें लगी अल्ट्रासाउंड मशीनों को 30 नवंबर तक एक्टिव ट्रेकर से जोड़ दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जेण्डर रेशियो में अंतर है, लड़कियों की तुलना में लड़के अधिक हैं, जो एक चिंता का विषय है। इसी को लेकर एक्टिव ट्रेकर का उपयोग सफलता पूर्वक वर्ष 2009 में कोल्हापुर महाराष्ट्र में किया गया। उन्होंने पीसीपीएनडीटी एक्ट की जानकारी देते हुये कहा कि यदि एक्ट के अंतर्गत आदेशों का अनुपालन नहीं किया जाता है तो अल्ट्रासाउंड मशीन सील कर दी जायेगी। जिलाधिकारी ने कहा कि एक्टिव ट्रेकर को नहीं अपनाने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटर को संदिग्ध माना जायेगा।
कार्यशाला में मैनेजिंग डायरेक्टर मैग्नम ओपस पुणे ने बताया कि अल्ट्रासाउंड मशीन में एक्टिव ट्रेकर को जोड़ दिया जायेगा तो मानीटर पर दिखने वाली हर हरकत को वीडियो के तौर पर एक्टिव ट्रेकर में स्टोर किया जायेगा। इसको सिर्फ जिला प्रशासन ही देख पायेगा। उन्होंने यह भी बताया कि सभी अल्ट्रासाउंड मशीनों को एक वेबसाइट के माध्यम से जोड़ा जायेगा और अब ऑनलाइन फार्म भर पायेंगे। इससे प्रशासन का समय बचेगा और सही जानकारी समय से भी मिल जायेगी।
इस मौके पर सीडीओ संजय कुमार, सीएमओ डा. विनोद यादव, तरुण अग्रवाल सहित समस्त नर्सिंग होम के चिकित्सक व संचालक उपस्थित रहे।