लखनऊ में सामूहिक मुंडन

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आप सोच रहे होंगे की ये लोग मुंडन कियो करवा रहे है, तो आप को बतादे की ये किसी गम में नहीं वल्कि बुन्लेखंड प्रान्त की मांग कर रहे है और ये सामूहिक मुंडन करवा कर सरकार को ये बताना चाहते है की बुंदेलखंड राज्य के लिए अभी तो मुंडन करवाया है और बुंदेलखंड राज्य हमें न मिला तो सरकारों का चुनाव में बुंदेलखंडवासी मुंडन कर भी सकते है ” जय बुंदेलखंड ”

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लखनऊ 9 जनवरी 2010। बुन्देलखण्ड राज्य के लिये पिछले एक दशक से बुन्देलखण्ड क्षेत्र में चेतना जगा रहे बुन्देलखण्ड विकास सेना प्रमुख हरीश कपूर टीटू के नेतृत्व में एक हजार सैनिकों ने बुन्देलखण्ड राज्य के लिये शहीद स्मारक गोमतीतट पर सामूहिक रूप से मुन्डन कराकर बुन्देलखण्ड राज्य के लिये संकल्प लेते हुये अपने बाल अर्पित करते हुये शपथ ली है जब तक बुन्देलखण्ड राज्य नही बन जाता तब तक बुन्देलखण्ड राज्य के लिये खून की अन्तिम बूंद तक संघशZ करते रहेगें। बुन्देलखण्ड विकास सेना के सैनिकों ने जय उद्धघोश करते हुये कहा कि खण्ड-खण्ड नहीं अखण्ड बुन्देलखण्ड के लिये गाँधी और विनोबा के मार्ग पर चलते हुये पिछले दस वशोZ में जो चेतना जगायी है उसका परिणाम पूरा बुन्देलीक्षेत्र अपने स्वराज्य के लिये जाग गया है। देर हुई तो रण होगा, संघशZ बड़ा भीशण होगा। सेना का गठन अनुशासन और राश्ट्रभक्ति के साथ जननी जन्म भूमि के उत्थान के लिये किया गया है। बुन्देलखण्ड राज्य के लिये समान रूप से बुन्देलखण्ड राज्य के लिये समर्थन व्यक्त कर रहे सभी दलों का अभार व्यक्त करते हुये। सेना के केन्द्रीय महामंत्री महेन्द्र अग्निहोत्री ने कहा कि बुन्देलखण्ड राज्य के लिये जो भी सहयोग करेगा उसका हम उसे तहदिल से स्वागत करेगें। बुन्देलखण्ड विकास सेना ने राजधानी में आयोजित विशाल और ऐतिहासिक मुन्डन समारोह में राश्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष रामा आसरे वर्मा तथा रालोद के बुन्देलखण्ड अध्यक्ष विरेन्द्र साक्षी के सहयोग के कारण इस लड़ाई को निर्णनायक मोड़ पर ले जाने में किये गये प्रयास की सराहना करते हुये हरीश कपूर टीटू ने कहा कि 19 जनवरी को रालोद की पहल पर झांसी में बुन्देलखण्ड के सभी संगठनों को एक मंच पर लाने के लिये बैठक की जा रही है जिसमें रालोद के राश्ट्रीय अध्यक्ष अजीत सिंह तथा प्रदेश अध्यक्ष रामा आसरे वर्मा छोटे राज्यों की लड़ाई को अन्जाम देने के लिये पहल करेंगे। सागर मण्डल के सेना कमाण्डर राम मोहन दूबे ने कहा कि बुन्देलखण्ड के वीरों ने पहली बार अंग्रेजों को रोकने का जो साहस दिखाया था उससे अंग्रेजों ने हमारी ताकत कम करने के लिये दो भागों में बुन्देलखण्ड को विभाजित करा दिया था लेकिन अब समय आ गया है। जब खण्ड-खण्ड बुन्देलखण्ड अखण्ड बुन्देलखण्ड के रूप में विकास सोपान तय कर सके। गौरतलब है कि कालपी के पूर्व विधायक डा0 अरूण महरोत्रा ने मंडन कराकर राजनेताओं को प्रेरणा दी। कांग्रेस के महामंत्री भानुसहाय ने आकर बुन्देलखण्ड राज्य के लिए कांग्रेस का समर्थन व्यक्त किया।

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बुंदेलखण्ड राज्य की स्थापना 14वीं शताब्दी मेंं हुई। इसके प्रथम संस्थपाक पंचम सिंह (गढ़ कुंडार) थे। वर्ष 1128 में हेमकरण ने इसकी राजधानी ओरछा बनाई। अकबर के समय वीर सिंह बुंदेला ने इस राज्य का विस्तार किया। महाराजा छत्रसाल ने अपने बाहुबल के आधार पर बुंदेलखंड राज्य की स्थापना की और सीमाए चम्बल, नर्मदा, यमुना और टोंस नदी के परिधि में थी। द्वापर युग में भी बुंदेलखंड का अलग अस्तित्व रहा। तब यह चेदि प्रदेश राजा शिशुपाल तथा दंतवक्र के अधीन थां दोनों ही श्रीकृष्ण की बुआ के पुत्र थे। 1955 में गठित प्रथम राज्य पुनर्गठन आयोग ने बुंदेलखण्ड के सर्वागीण विकास के लिए इसे अलग राज्य बनाने की सिफारिश की थी। मध्यप्रदेश के विधानसभा में बुंदेलखण्ड राज्य के लिए पहली बार विधायक बृजकिशोर पटैरिया ने की थी।शहीद स्मारक पर बुन्देलखण्ड राज्य के लिये मुन्डन कराकर आजीवन संघशZ का संकल्प लेने वाले सैनिकों में प्रमुख रूप से सुधेश नायक, भगत सिंह राठौर, के.पी. रजा, राजमल बरया, संजय त्रिवेदी, राकेश मोहन, सुरेन्द्र कुमार, अजीत निगम, अनिल चन्द, अरूण मलहोत्रा पूर्व विधायक बीजेपी कालपी, संजय त्रिवेदी वरिश्ठ सदस्य केन्द्रीय कोरफमेरी, प्रदीप पंण्डित, प्रदीप श्रीवास्तव, अनीश भाई, इमरान खान, राजेन्द्र गुप्ता, बच्चू अरिवार, नाथू राम पाल, सुरेश मास्टर, दुर्गेश यादव, अनिल कंचन, मुरली कुशवाहा, राजेश सैन, डॉ0 बुन्देला, राजकुमार राठौर, राजकुमार पहलवान, अशोक िशवाजी, डा0 रामबाबू अग्निहोत्री, िशवराज राठौर, बृजेश राठौर, मनीश कुशवाहा, पहाड़ सिंह, िशवप्रसाद श्रोती, अमर सिंह बुन्देला आदि शामिल थे।

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सुरेन्द्र अग्निहोत्री

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