लक्ष्य से पीछे छूटा प्रधानमन्त्री रोजगार सृजन कार्यक्रम

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झांसी – बेरोजगारों को स्वरोजगार उपलब्ध कराए जाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा चलाई जाने वाली ऋण योजना प्रधानमन्त्री रोजगार सृजन कार्यक्रमं (पी.एम.ई.जी.पी.) का जनपद में बेहद बुरा हाल है। चालू वित्तीय वर्ष अपने अन्तिम पड़ाव पर है और निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष अब तक तकरीबन बीस फीसदी बेरोजगारों को ही ऋण हासिल हो पाया है। शेष अस्सी फीसदी लक्ष्य को पूरा करने के लिए महज दो माह का ही समय शेष बचा है।

कुदरत का कहर पहले ही यहां के हजारों लोगों के हाथ से काम छीन चुका है। पेट की आग बुझाने की खातिर यहां के अनेक लोग देश के अन्य महानगरों में शरण लिए हुए हैं। इसके बावजूद  भी सरकार द्वारा यहां रोजगार के अवसर विकसित करने की ओर कोई खास ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बल्कि बेरोजगारों को उनके पैरों पर खड़ा किए जाने हेतु संचालित की जाने वाली ऋण योजनाओं की भी यहां बदतर स्थिति है। इस बात का अन्दाजा प्रधानमन्त्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की प्रगति रिपोर्ट को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। केन्द्र सरकार द्वारा जिला उद्योग केन्द्र को वित्तीय वर्ष 2009.10 के लिए 91 बेरोजगारों को प्रधानमन्त्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत ऋण उपलब्ध कराए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन वर्ष की तीन तिमाही गुजरने के बाद भी जिला उद्योग केन्द्र अब तक महज अठारह बेरोजगारों को ही ऋण दिलवा पाया है। लक्ष्य पूरा करने के लिए शेष तिहत्तर बेरोजगारों को ऋण दिलाए जाने के लिए महज दो माह ही शेष बचे हैं।

जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक जय सिंह पी.एम.ई.जी.पी. की इस दुर्गति के लिए बैंकों को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि उद्योग केन्द्र द्वारा बैंकों को स्वीकृति उपरान्त दो सौ दस आवेदकों की फाइलें भेजी जा चुकी हैं। इनमें से पचास फीसदी मामलों में बैंकों से स्वीकृतियां भी जारी हुई हैं परन्तु बैंकों की ऋण देने की रफ्तार बहुत धीमी है,जिसके कारण यह योजना जनपद में पिछड़ रही है।