लंदन में मिलेगा सागर के दो भू-गर्भ शास्त्रियों को अवार्ड

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सागर बुंदेलखंड में पन्ना के बाद एक और हीरे का भंडार (छतरपुर जिले में) खोजने वाले सागर के दो भू-गर्भ शास्त्रियों को लंदन में बंडर डिस्कवरी अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। यह पहला मौका है जब सागर के किसी भू-गर्भ शास्त्री को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस अवार्ड से नवाजा जाएगा। सम्मान की घोषणा हो गई है। यह भू-गर्भ शास्त्री आत्मवीरेश्वर स्थापक एवं श्रीकांत शर्मा सागर के डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के भू-गर्भ शास्त्र विभाग में पढ़े हैं।

वर्तमान में श्री स्थापक विश्व की सबसे बड़ी माइनिंग कंपनियों में से एक रियो-टिंटो में भू-गर्भ शास्त्री के रूप में एवं श्री शर्मा अन्य दूसरी कंपनी में कार्य कर रहे हैं। कंपनी का मुख्यालय लंदन में है। 28 जुलाई को कंपनी के एक्सप्लोरेशन विभाग की ओर से श्री स्थापक और श्री शर्मा को बंडर डिस्कवरी अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। इनका चयन कंपनी के विश्वभर में कार्य कर रहे लगभग 17 हजार भू-गर्भ शास्त्रियों में से किया गया है, जो विवि के भू-गर्भ शास्त्र विभाग और विद्यार्थियों के लिए गौरव की बात है।
बुंदेलखंड में पन्ना के बाद छतरपुर जिले में हीरे का अपार भंडार होने की संभावना है। श्री स्थापक ने ही सबसे पहले यहां 2002 में प्रोजेक्ट लीडर के रूप में आकर हीरे के भंडार का पता लगाया था। यहां लगभग आठ साल से किए जा रहे खनन एवं शोध में पन्ना से भी ज्यादा हीरे के भंडार होने की संभावना है। फिलहाल कंपनी ने प्रदेश सरकार को माइनिंग लायसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदन दिया है। लायसेंस मिलने के बाद कंपनी की ओर से यहां अधिकृत रूप से हीरे का खनन शुरू कर दिया जाएगा।
यदि प्रदेश सरकार यहां कंपनी को खनन के लिए लायसेंस देती है तो बुंदेलखंड में विकास का एक और द्वार खुल जाएगा। कंपनी की ओर से यहां 2010 तक प्लांट लगाने की संभावना है। क्योंकि प्रारंभिक खोज में यहां पर हीरे के भंडार होने की पुष्टि हो चुकी है।

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