रूठे मतदाता भी निर्वाचन आयोग की पहल पर जाएंगे पोलिंग बूथ पर

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ललितपुर। जहा तक निर्भय व शातिपूर्ण माहौल में लोकसभा चुनाव सम्पादित कराने की बात है तो इस उद्देश्य की पूर्ति करने में भारत निर्वाचन आयोग सफल रहा है, लेकिन अभी चुनौतिया कम नहीं है। देश की सबसे बड़ी कार्यपालिका में श्रेष्ठ व अपराध मुक्त छवि वाले प्रतिनिधि सदन में पहुचें इसके लिए भी सुधार की जरूरत है। राजनैतिक दल प्रत्याशियों को थोप देते है, जिसके चलते जनता चाहते हुए भी सम्बन्धित पार्टी के प्रत्याशी को वोट नहीं दे पाती। इस दफा भारत निर्वाचन आयोग ने रूठे मतदाताओं को मनाने का मौका दिया है कि वह प्रत्येक दशा में मतदान केन्द्र पर अवश्य पहुचें ताकि चुनाव को लेकर लक्ष्य पूरा हो सके। इसके साथ-साथ लोकतंत्र के सही अर्थ परिलक्षित हो सकें। आयोग ने पोलिंग बूथ पर 17 ए फार्म की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये है। प्रत्याशियों से नाराज मतदाता ईवीएम का बटन दबाने के बजाय पोलिंग बूथ पर 17 ए फार्म भरकर अपेक्षायें व विरोध का ब्यौरा भी दर्ज कर सकते है।बेशक निर्वाचन आयोग द्वारा व्यवस्थायें चाकचौबंद की गयी है। मतदान के दिन तो पोलिंग बूथ के समीप 200 मीटर के दायरे में को‌र्र्ई फटक भी नहीं पायेगा। इस दफा संवेदनशील मतदान केन्द्रों की वीडियोग्राफी होना है, कैमरे लगे रहेगे। कोई भी निर्वाचन आयोग की मंशा के विपरीत नहीं जा सकेगा। जिले में सेक्टर मजिस्ट्रेटों को भी आवश्यक तैयारियों के लिए प्रशिक्षित कर दिया गया है। माइक्रो ऑब्जर्वर 39 बिन्दुओं पर मतदान के बाद अपनी रिपोर्ट ऑब्जर्वर को देंगे। जिले में 30 प्रतिशत संवेदनशील पोलिंग बूथों पर कैमरे की निगाह रहेगी। इसके अलावा अन्य बूथों पर भी तात्कालिक निर्णय लिये जा सकते है। प्रत्येक बूथ पर 17 ए रजिस्टर मौजूद रहेगा। भारत निर्वाचन आयोग ने पूर्व की तरह इस दफा भी फिर से निगेटिव मत को भी सम्मिलित करने का निर्णय लिया है। पूर्व के कुछ चुनाव में यह व्यवस्था समाप्त कर दी गयी थी, जिसके चलते जागरूक लोगों ने कड़ी आपत्ति जतायी थी। भारत निर्वाचन आयोग ने इस दफा शत-प्रतिशत मतदाताओं को मतदान बूथ पर अवश्य पहुचने का आमंत्रण दिया है। चुनाव में देखा गया है कि प्रत्याशियों के कारण मतदाता वोट डालने के लिए घर से बाहर नहीं निकलते है। ऐसे मतदाताओं को घर से बाहर निकालने का बीड़ा भारत निर्वाचन आयोग ने उठाया है।

17 ए फार्म काफी महत्वपूर्ण रहेगा। ऐसे मतदाता जो लोकसभा क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे लोगों से संतुष्ट नहीं है उन्हे सभी प्रत्याशियों में से कोई भी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता है तो वह 17 ए फार्म पीठासीन अधिकारी से माग कर नकारात्मक वोट दे सकता है। इस पर टिप्पणी लिखने के लिए भी स्थान होगा। मतदाता अपने दिल की भड़ास इस फार्म पर उतार सकते है। खास बात यह है कि इस फार्म पर दर्ज करायी गयी प्रविष्टियों को भारत निर्वाचन आयोग संकलित करेगा तथा आगामी वर्षो के लिए प्रविष्टियों के मद्देनजर निर्णय लिया जाना भी सम्भावित माना जा रहा है। इस दफा सही संशोधित मतदाता सूचिया तैयार करने के लिए काफी वक्त दिया गया। इस हिसाब से अब मतदाता सूचियों में गलत नाम इद्राज नहीं रहेगे। मतदाताओं को फोटो मतदाता पहचान पत्र के अभाव में भी मतदान करने की इजाजत दी गयी है। मतदाता 28 फरवरी 2009 से पूर्व जारी किये गये फोटो युक्त पहचान पत्र को दिखाकर मतदान कर सकते है। भारत निर्वाचन आयोग की इन व्यवस्थाओं से लगता है कि इस दफा मतदान का प्रतिशत काफी अधिक रहेगा। खास बात यह है कि नकारात्मक वोटिग शुरू होने से चुनाव में दिलचस्पी नहीं लेने वाले मतदाता भी पोलिंग बूथ पर पहुचेंगे।

भारत निर्वाचन आयोग की व्यवस्थायें राजनैतिक दलों को करारा जवाब दे सकती है। राजनैतिक दल मनमाने ढग से प्रत्याशियों का चयन कर लेते है यह आरोप आम नागरिक नहीं लगाते वरन पार्टी के बागी लोग भी समय-समय पर बयानबाजी देते रहे है। पूर्व उप राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत ने तो बाकायदा प्रेस रिपोर्टरों से कहा भी था कि सीटों के वितरण में पैसे का भी खेल होता है। राजनैतिक दलों को चाहिए कि वह अपने उम्मीदवार थोपे नहीं वरन इनके चयन में भी जनता की भागीदारी सुनिश्चित करे। विभिन्न संगठनों का यह भी कहना है कि कुछ मतदाता पार्टियों की नीतियों से तो सहमत होते है लेकिन उनके प्रत्याशियों से नहीं। हारजीत में मतदाताओं की सहमति, असहमति भी भूमिका निभाती है। इस मुद्दे पर विभिन्न संगठनों ने भी अपना नजरिया प्रस्तुत किया है। बुन्देलखण्ड विकलाग समिति ने भी जिले के सभी मतदाताओं से मतदान करने के लिए पोलिंग बूथ पर पहुचने की अपील की है। विकलागों ने बैठक कर कहा कि मतदाताओं की उदासीनता के कारण मतदान 40 से 60 प्रतिशत तक ही हो पाता है। संगठन के पदाधिकारी हरीश का कहना है कि विकलाग अधिकाधिक लोगों को मतदान करने के लिए पोलिंग बूथ पर पहुचने के लिए प्रेरित करेगे। बुन्देलखण्ड मजदूर मोर्चा के पदाधिकारी रामसेवक अहिरवार ने भी सभी मतदाताओं से अपना मत लोकसभा चुनाव के महत्वपूर्ण यज्ञ में प्रदान करने की अपील की। राष्ट्रीय युवा योजना के समन्वयक सुधाकर तिवारी का कहना है कि यह देश का दुर्भाग्य है कि मतदाताओं को योग्य में से योग्यतम नहीं, वरन खराब से खराब जनप्रतिनिधियों को मजबूरी में चुनना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अनपढ़ मतदाताओं को वोट करने के लिए दूसरों की इच्छा पर निर्भर होना पड़ता है। गाव में चालाक लोग भ्रातिया फैलाकर उनके बहुमूल्य मत को अपने पक्ष में डलवाने में कामयाब हो जाते है। चुनाव में पुत्र प्रेम, भाई-भतीजावाद की परम्परा भी बनी हुई है। जब तक प्रत्याशी को चयन करने का हक जनता को नहीं मिलेगा तब तक गाव, गरीब का भला नहीं हो सकता।

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