राष्ट्ीय बंुदेली सम्मेलन -2013 ओरछा

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bhopal‘राष्ट्ीय बंुदेली सम्मेलन -2013 ओरछा’- एक विहंगम द्रष्टि मध्य देष की भाषा और संस्कृति संरक्षण की दिषा में महत्वपूर्ण उपलब्धि अखिल भारतीय बंुदेलखण्ड साहित्य एवं संस्क्ृति परिषद भोपाल के तत्वावधान में बंुदेली भाषा पर केन्द्रित दो दिवसीय सम्मेलन ,मौनी अमावस्या के पर्व पर ,बंुदेलखण्ड की प्राचीन राजधानी और पावन तीर्थ ओरछा में ऐतिहासिक सफलता के साथ सम्पन्न हुआ।दरअसल यह ओरछा में लगातार चैथे वर्ष का आयोजन था इसके पूर्व केवल भोपाल में ही 1990से बंुदेली भाषा के दो-तीन दिवसीय अधिवेषन, अखिल भारतीय बंुदेलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषद द्वारा हर वर्ष छत्रसाल जयंती पर निरंतर किये जाते रहे हैं।एक-एक बार ही ग्वाालियर, दिल्ली और कालिंजर में उक्त आयोजन किये गये हैं।षेष स्थानों पर भी कतिपय बंुदेली समारोह अवष्य होते रहते हैं पर वे किसी राजनेता के प्रश्रय में केवल राजनीतिक लाभ के लिये भीड़ जुटा कर उत्सव मना लेते हैं,बंुदेली भाषा/साहित्य की अस्मिता पर उनकी आॅख नहीं रहती न ही उस तरह की चेतना।।इस ओरछा बंुदेली सम्मेलन-13 ,का उद्घाटन करते हुये भारत के ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री प्रदीप जैन आदित्य/सांसद झाॅसी,ने साहित्यकारों की माॅंग पर बताया कि बंुदेली भाषा को आठवीं सूची में स्थान दिलाने के लिये हम सभी,केवल साहित्यकारों के दिषा निर्देषों पर ही,बंुदेलखण्ड के राजनैतिक लोग प्राणपण से लगे हुये हैं। ग्रह मंत्री श्री षिन्दे ने हमें आष्वस्त किया है कि जल्दी ही वे इस दिषा में कार्यवाही करेंगे । उन्होने कहा कि अ.भा.बंुदेलखण्ड परिषद के राष्ट्ीय अध्यक्ष श्री कैलाष मड़बैया ने जिस तरह आठवीं सूची में बंुदेली को लाने का राष्ट्व्यापी आन्दोलन चलाया और मध्यप्रदेष विधान सभा से उक्त प्रस्ताव पारित कराकर दिल्ली में बंुदेलखण्डी सासंदों को जोड़ कर भाारत सरकार तक अपनी आवाज पहॅुचाई है उससे हम सभी भी चेत गये हैं। श्री षिन्दे सा0को हम सभी ने सांसदों का ज्ञापन भी दिया है और आष्वासन भी मिल गया है।संसद के अगले सत्र में सांसदों के साथ वे फिर केन्द्र सरकार से यह माॅग पूरी करने का दबाव बनायेंगे।साहित्यकारों से यही अनुरोध है कि वे फिर एक बार दिल्ली में सम्मेलन करें उसमें वे गृह मंत्री को आमंत्रित करेंे जिससे हम अपनी बात को और अधिक दबाव बना कर समझा सकेंगे। श्री प्रदीप ने यह भी कहा कि आवष्यकता पड़ी तो वे धरने पर भी बैठने में संकोच नहीं करेंगे। उत्सव के विषिष्ट अतिथि म.प्र.के आदिमजाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण राज्य मंत्री श्री हरिषंकर खटीक ने, आजादी के बाद भारत के इतिहास में पहली बार ‘छत्रसाल की कवि सम्मान परम्परा’ का निर्वाह करते हुये सदन में उपस्थित समस्त एक सौ से अधिक साहित्यकारों के चरण स्पर्ष किये और माल्यार्पण से अभिनंदन कर, कहा कि मैं सदैव बंुदेलखण्ड की साहित्य एवं संस्कृति के लिये तन मन धन से समर्पित  रहूॅगा और अ.भा.बंुदेलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषद से जुडा रहूॅगा। समारोह की अध्यक्षता बंुदेलखण्ड के राष्ट्ीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री कैलाष मड़बैया ने करते हुये कहा कि बंुदेली भाषा भारत के हृदय स्थल में बसे लग0 1लाख 84हजार बर्ग किलोमीटर में फैले, 50 जिलों के छै करोड से अधिक लोगों की दो हजार वर्ष पुरानी सम्पन्न भाषा है उसको पैसठ वर्षों में भी देष की आठवीं अनुसूची में स्थान न दिला पाना बंुदेलखण्ड के राजनीतिज्ञों के लिये षर्म की बात है जब कि बंुदेली से कमतर क्षेत्रीय भाषाओं को पहले ही, आठवीं सूची में स्थान मिल चुका है।उन्होने बताया कि अ0भा0 बंुदेलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषद ने आठवीं सूची में बंुदेली को ले आने के अभियान के पहले, बंुदेली गद्य के क्षेत्र में इस अभाव की पूर्ति करने के लिये तीन ग्रंथ ‘बाॅंके बोल बंुदेली के,मीठे बोल बंुदेली के और नीके बोल बंुदेली के प्रकाषित किये,काव्य,हतिहास,पानी आदि पर कृतियॅंा प्रकाषित करने के बाद,मानकीकरण आन्दोलन चलाया,राष्ट्ीय साहित्य अकादमी में अधिवेषन कर पुरस्कार दिलाये और यह कर्मषाला विलुप्त होती हुई बंुदेली लोक कथाओं के षोध को केन्द्रित कर की जा रही है।आयोजक राजा मधुकरषाह ओरछेष ने कहा कि ओरछा में साहित्यकारों और राजनीतिज्ञों के साथ साथ लिये, आज के संकल्प, अवष्य बंुदेली को अपनी गरिमा प्रदान करेगे। इस अवसर पर डाॅ.मुरारीलाल खरे भोपाल की बंुदेली रामायण और डाॅ.राम स्वरुप खरे उरई द्वारा सम्पादित षोधार्णव के बंुदेली भाषा अंक का मंत्रियों द्वारा लोकार्पण किया गया । पृथ्वीपुर की बालिकाओं द्वारा कवि कैलाष मड़बैया रचित बंुदेलखण्ड के प्रान्त गीत‘हमारी माटी बंुदेली’की संगीतिक प्रस्तुति उमाषंकर खरे उमेष के निदे्रषन में की गई। संचालन प्रो0साधना श्रीवास्तव और प्रतिवेदन वाचन श्री देवेन्द्र कुमार जैन पूर्व जिला जज भोपाल द्वारा किया गया। 0दूसरे स़त्र में 41 साहित्यकारों ने अपनी मौलिक षोधपूर्ण बंुदेली लोक कथाओं का वाचन किया अध्यक्षता डाॅ कामिनी सेंवढा व संचालन डाॅ लखनलाल खरे ने किया। बक्ताओं में महेष कटारे षिवपुरी,डाॅ.जवाहर द्विवेदी गुना,डाॅ.देवदत्त द्विवेदी छतरपुर,डाॅ जगदीष खरे झाॅंसी,डाॅ वीरेन्द्र निर्झर महोबा, अजीत श्रीवास्तव टीकमगढ,देवेन्द्र कुमार जैन,लखनलाल पाल आदि प्रमुख थे। कथाओं पर विमर्ष और समीक्षात्मक टिप्पडि़याॅं समालोचकों द्वारा प्रस्तुत की गईं। 0तीसरे सत्र में बंुदेली मानकीकरण और बंुदेली षब्द..सम्पदा पर विषे़ष सत्र में डाॅ.दुगेष की अध्यक्षता और डाॅ.रामस्वरुप खरे के संचालन में श्री कैलाष मड़बैया भोपाल,कैलाष बिहारी द्विवेदी टीकमगढ़, महेष कटारे बीना,अमरसिंह राजपूत दमोह,षिवेन्द्र सिंह भिण्ड,आदि 25साहित्यकारों ने पेपर्स पढ़े। 0बंुदेली का राष्ट्ीय कवि सम्मेलन षीर्ष बंुदेली कवि श्री कैलाष मड़बैया भोपाल की अध्यक्षता और डाॅ. दुर्गेष दीक्षित कुण्डेष्वर के संचालन में सम्पन्न हुआ जिसमें प्रमुख कवियों में श्री सुदेषसोनी स्वदेष ललितपुर,रामस्वरुप स्वरुप संवढा,आषा श्रावास्तव भोपाल,नरेन्द्र मोहन मि़त्र कौंच ,हरगोविन्द विष्व सागर,हरिविष्णु अवस्थी व एन.डी.सोनी टीकमगढ, विवेक बरसैंया गुरसराय,जगदीष झाॅंसी, मुक्ताप्रसाद रत्नेष,रघुवीर भदौरिया,हरनारान हिन्दोलिया,जानकी गुप्ता, आलमपुर,लखन लाल पाल उरई,षकूरमुहम्मद,पी.एल.कड़ा कुण्डेष्वर,बाबूलालद्विवेदी बानपुर ,साफिया खान अलीगढ,पोषक पृथ्वीपुर ,मनोरमा एवं रामस्वरुप षर्मा,राजीव नामदेव,लालजी सहाय टेरी,मुकुन्द गोस्वामी एवं योगेन्द्र चरखारी,गजाधर,सरल सागर,षिरोमणि सिंह पथ ,षंकरसिंह देवरदा,आदि 35 कवियों ने बंुदेली लोक संस्कृति से ओतप्रोत कवितायें प्रस्तुत कर रमणीक ओरछा में पहले ही बसंत ला दिया। 0दरअसल यह समारोह ओरछेष मधुकरषाह द्वारा यषस्वी पत्रकार षिरोमणि पं बनारसीदास चतुर्वेदी की स्मृति पर केन्द्रित कराया था अतः अधिेकाॅंष सहित्यकारों ने पहले दिन दादा जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चाकर श्रद्धासुमन समर्पित किये।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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