राज्य सरकार ने वर्ष 2010-11 के लिए 1,53,199.38 करोड़ रुपये का बजट पेश किया

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प्रदेश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बजट, गत वर्ष की अपेक्षा 14.6 फीसदी अधिक, छठें वेतन आयोग की संस्तुतियां लागू करने से आए व्ययभार के बावजूद प्रदेश सरकार ने राजस्व बचत का बजट पेश किया

उत्तर प्रदेश मुख्यमन्त्री महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना के लिये प्राविधान
राज्य सरकार द्वारा कर राजस्व बढ़ाने हेतु किये गये प्रयासों के फलस्वरूप वर्तमान वित्तीय वर्ष के अन्त
तक अनुमान से अधिक राजस्व आय होगी
वैट लागू करने के बाद देश के बड़े राज्यों में राजस्व घटा, वहीं उत्तर प्रदेश में युक्तिसंगत उपायों से राजस्व में वृद्धि
पुनरीक्षित वेतन, भत्ते, पेंशन आदि से पड़ने वाले अतिरिक्त भार के बावजूद वर्ष 2009-10 में 1987.87 करोड़ रू0 तथा वर्ष 2010-11 में 554.40 करोड़ रू0 की राजस्व बचत अनुमानित
सार्वजनिक निजी सहभागिता द्वारा मूलभूत इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में साढ़े ग्यारह हजार करोड़ रूपये के वचनबद्ध पूंजी निवेश के फलस्वरूप सीधे सरकारी निवेश की जरूरत में कमी
केन्द्र द्वारा 80 हजार करोड़ रूपये का विशेश आर्थिक सहायता पैकेज स्वीकृत न होने के कारण पी0पी0पी0 मॉडल पर निवेश आकर्शित करने की बाध्यता

कृषि उत्पादों का उचित मूल्य सुनिश्चित करते हुए किसानों की आय में वृद्धि का लक्ष्य
कृषि एवं सम्बद्ध कार्यकलापों हेतु 4125.85 करोड़ रूपये तथा सिंचाई क्रार्यक्रमों हेतु 7000 करोड़ रूपये की व्यवस्था
उर्वरक के अग्रिम भण्डारण की योजना, 75.11 करोड़ रूपये की व्यवस्था
बढ़े उत्पादन से आम जनता को सस्ते दामों में खाद्यान्न उपलब्ध होगा
बजट में महिलाओं, विशेशतौर पर बालिकाओं के सर्वागीण विकास के लिए व्यवस्था
छोटे बच्चों को कुपोशण से बचाने के लिए अनुपूरक पुश्टाहार का बजट दोगुना किया गया
आई0टी0आई0 एवं पॉलीटेक्निक्स की छात्राओं को भी मिलेगा सावित्रीबाई फुले बालिका शिक्षा मद्द योजना का लाभ

लखनऊ  – उत्तर प्रदेश के वित्त मन्त्री श्री लाल जी वर्मा ने राज्य के सन्तुलित सामाजिक और आर्थिक विकास पर केंद्रित वर्ष 2010-2011 का बजट आज यहां विधान सभा में प्रस्तुत किया, जो छठें वेतन आयोग की संस्तुतियां लागू करने से आए व्ययभार के बावजूद भी राजस्व बचत का बजट है। बजट में जहां एक ओर समाज के गरीब, कमजोर, दबे कुचले और उपेक्षित वर्ग के लोगों की बुनियादी जरूरतों का पूरा ध्यान रखा गया है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की अवस्थापना सम्बन्धी आवश्यकताओं को, निजी-सार्वजनिक सहभागिता (पी0पी0पी0) से पूरी करने को प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2010-2011 के बजट में अनुसूचित जातियों के लिए विशेश घटक योजना के अन्तर्गत 9099.75 करोड़ रूपये की व्यवस्था की गई है तथा निर्धन महिलाओं और गरीब किसानों को भी वरीयता दी गई है। यह बजट राज्य सरकार द्वारा समतामूलक समाज व्यवस्था की सही स्थापना के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती के नेतृत्व में लगातार चौथी बार बजट के आकार में वृद्धि की गई है। आज प्रस्तुत 1,53,199.38 करोड़ रुपये का बजट प्रदेश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़े आकार वाला बजट है, जो गत वित्तीय वर्ष के बजट की अपेक्षा 14.6 फीसदी अधिक है। आगामी वित्तीय वर्ष में कुल 1,44,177.27 करोड़ रूपये की प्राप्तियॉं अनुमानित हैं, जिनमें 1,11,620.61 करोड़ रूपये की राजस्व प्राप्तियॉं तथा 32,556.66 करोड़ रूपये की पूंजीगत प्राप्तियॉं सम्मिलित हैं। यहॉं यह भी उल्लेख करना आवश्यक है कि वर्ष 2010-11 में कर राजस्व का अंश 77,823.09 करोड़ रूपये अनुमानित हैं, जिसमें केन्द्रीय करों में राज्य का अंश 35,517.22 करोड़ रूपये हैं।

केन्द्रीय योजना आयोग द्वारा प्रदेश की वर्ष 2010-11 की वार्षिक योजना का निर्धारण अभी नहीं किया गया है परन्तु राज्य सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिये अनन्तिम रूप से 42000 करोड़ रूपये का परिव्यय निर्धारित किया है। अगला वित्तीय वर्ष 11वीं पंचवर्षीय योजना का चौथा वर्ष है। राज्य सरकार ने प्रदेश के सन्तुलित सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिये आयोजनागत योजनाओं के लिये 45645.13 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है जो वर्तमान वित्तीय वर्ष के बजट के मुकाबले 13.8 प्रतिशत अधिक है।

ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने अपने पहले शासनकाल से ही प्रदेश में विकास और सामाजिक परिवर्तन की जो ठोस शुरूआत की है वह उनके वर्तमान शासनकाल में भी गतिमान है। उनका मानना है कि समाज में व्याप्त गैर-बराबरी वाली व्यवस्था को बदल कर समतामूलक समाज व्यवस्था की स्थापना में ही सर्वसमाज के सभी वर्गों का कल्याण निहित है। उनकी सरकार की प्रत्येक नीति और निर्णय सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय के संकल्प पर आधारित है। आज प्रस्तुत किया गया बजट भी राज्य सरकार के इस संकल्प को प्रतिबििम्बत करता है।

बजट में विशेष रूप से गरीब, दलित, आर्थिक रूप से कमजोर किसानों, महिलाओं, बालिकाओं एवं छोटे बच्चों के हित में महत्वपूर्ण योजनायें प्रस्तावित की गई हैं। सरकार ने अपने सीमित आर्थिक संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग को ध्यान में रखकर मूलभूत आर्थिक अवस्थापना सुविधाओं, जैसे ऊर्जा, सड़क-पुल, परिवहन एवं शहरी अवस्थापना सम्बन्धी वृहदृ परियोजनाओं को पी0पी0पी0 के आधार पर संचालित करते हुए इन पर सीधे सरकारी निवेश की जरूरत को कम किया है। इस प्रकार इन योजनाओं से धन बचाकर दुर्बल एवं गरीब वर्गों के उत्थान, सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, शिक्षा, चिकित्सा-स्वास्थ्य के लिये अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था इस बजट की विशेशताओं में शामिल हैं। इस प्रकार राज्य सरकार ने सामाजिक सेक्टर की योजनाओं पर अधिक धनराशि व्यय करने के लिए यह व्यवस्था की है। इसके अलावा बजट में आधारभूत सुविधायें मुहैया कराने एवं किसानों को सिंचाई सुविधायें बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

प्रदेश में मूलभूत आर्थिक अवस्थापना सुविधाओं के विकास को वरीयता देते हुए सरकार ने ऊर्जा, सड़क, पुल, परिवहन एवं शहरी अवस्थापना सम्बन्धी परियोजनाओं पर सार्वजनिक क्षेत्र में व्यय हेतु आवश्यक धनराशि की व्यवस्था की है। इसके साथ ही इन सेक्टरों में निजी क्षेत्र में पूंजी निवेश प्रोत्साहित करने हेतु सार्वजनिक निजी सहभागिता (पी0पी0पी0) मॉडल पर अनेक परियोजना ली जा रही हैं।

वित्तीय वर्ष 2010-2011 में सार्वजनिक निजी सहभागिता मॉडल की विभिन्न परियोजनाओं में लगभग साढ़े ग्यारह हजार करोड़ का पूंजी निवेश अनुमानित है। इसके तहत ऊर्जा क्षेत्र में अधिश्ठापन क्षमता बढ़ाने वाली विभिन्न परियोजनाओं के विकासकर्ताओं द्वारा 5000 करोड़ रूपये तथा पारेशण तन्त्र के सुदृढ़ीकरण एवं वितरण में सुधार सम्बन्धी परियोजनाओं में 600 करोड़ रूपये का निवेश सम्भावित है। गंगा एक्सप्रेस-वे, अपर गंगा कैनाल एक्सप्रेस-वे तथा राजकीय राजमार्गों की परियोजनाओं से 4900 करोड़ रूपये अनुमानित है। कुशीनगर में अन्तर्राश्ट्रीय हवाई अड्डा तथा बौद्ध परिपथ का विकास 750 करोड़ रूपये से तथा आगरा, मेरठ, अलीगढ़ तथा इलाहाबाद में 4000 करोड़ रूपये की लागत से रिंग रोड बनायी जाएगी। गाजियाबाद, इलाहाबाद एवं अन्य शहरों में 50 करोड़ रूपये प्रत्येक की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग सुविधा विकसित होगी। पांच टाउनिशप के विकास पर 500 करोड़ रूपये, नौ जनपदों की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेन्ट परियोजनाओं में 100 करोड़ रूपये तथा नये आई0टी0आई0, पॉलिटेक्निक् , मेडिकल कालेज, पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट एवं मल्टी स्पेशयालिटी हास्पिटल की परियोजनाओं में 250 करोड़ रूपये का निवेश अनुमानित है।

वर्ष 2010-2011 के बजट में स्पष्ट किया गया है कि कर-राजस्व बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किये गये प्रयासों के चलते प्रदेश अगले वित्तीय वर्ष के अन्त में भी रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बना रहेगा। ज्ञातव्य है कि छठे केन्द्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों के फलस्वरूप राज्य सरकार ने कर्मचारियों के वेतन भत्ते एवं पेन्शन को पुनरीक्षित करने का निर्णय लिया, जिससे शासन पर काफी अधिक धनराशि का अतिरिक्त व्यय भार पड़ा। राज्य सरकार द्वारा वेतन आयोग की संस्तुतियों को लागू करने के फलस्वरूप बढ़े व्यय भार से निपटने के लिये व्यय प्रबन्धन में सुधार तथा मितव्ययिता के कड़े कदम उठाये गये। इसके अलावा सरकार ने योजनाओं के वित्त पोषण हेतु आवश्यक वित्तीय संसाधन जुटाने के भी प्रबन्ध किये हैं। राज्य सरकार द्वारा कर राजस्व बढ़ाने हेतु किये गये प्रयासों के फलस्वरूप वर्तमान वित्तीय वर्ष के अन्त तक राजस्व आय आय-व्ययक अनुमान से अधिक प्राप्ति होगी।

बजट में यह भी खुलासा किया गया है कि राज्य सरकार द्वारा राजस्व प्राप्तियों को बढ़ाने के लिए उठाये गये विभिन्न कदमों के फलस्वरूप वित्तीय वर्ष 2010-11 में कर राजस्व में 20 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है। इसके परिणामस्वरूप पुनरीक्षित वेतन भत्ते पेन्शन आदि से पड़ने वाले अतिरिक्त व्यय भार के बावजूद वर्तमान वित्तीय वर्ष में   1987.87 करोड़ रुपये तथा आगामी वित्तीय वर्ष में 554.40 करोड़ रूपये की राजस्व बचत अनुमानित है।

राज्य सरकार की यह उपलब्धि तब और महत्वपूर्ण हो जाती है जब बजट में तेरहवें वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर पड़ने वाले प्रभाव को संज्ञान में नहीं लिया गया है। आयोग की रिपोर्ट ए0टी0आर0 के साथ संसद में प्रस्तुत की जानी है। उम्मीद है कि 13वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर राज्य को वर्तमान में मिल रहे केन्द्रीय करों के अंश एवं अनुदान की राशि में आशातीत वृद्धि होगी।

राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में किसानों की खुशहाली, समेकित ग्राम्य विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजना को सर्वोच्च वरीयता दी गई है। मुख्यमन्त्री द्वारा घोषित उत्तर प्रदेश मुख्यमन्त्री महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना को पहली बार प्रदेश में लागू करने के लिये सरकार ने वित्तीय वर्ष 2010-11 के लिये 402 करोड़ रूपये का प्राविधान बजट में किया है। इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश में गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों जिन्हें भारत सरकार द्वारा बी0पी0एल0 कार्डो की संख्या न बढ़ाये जाने के कारण सस्ता खाद्यान्न नहीं मिल रहा है तथा जिन्हें पेन्शन की किसी योजना से भी आच्छादित नहीं किया गया है, उन्हें प्रतिमाह 300 रूपये की मासिक अनुदान धनराशि देकर उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में सहयोग प्रदान किया जायेगा। योजना के पहले चरण में 30 लाख गरीब परिवारों को सुविधा मुहैया करायी जायेगी।

वित्तीय वर्ष 2010-11 के लिये प्रस्तुत बजट में राज्य सरकार ने महिलाओं तथा विशेष तौर पर बालिकाओं के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता दी है। आगामी वित्तीय वर्ष के लिये सरकार ने महामाया गरीब बालिका आशीर्वाद योजना के तहत 360 करोड़ रूपये का प्राविधान किया है। इस योजना से वर्ष 2010-11 में 2.5 लाख बालिकाओं को लाभािन्वत किया जायेगा। इसके अलावा राज्य सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष में माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने वाली गरीब परिवार की तीन लाख छात्राओं को लाभािन्वत करने का भी निर्णय लिया है। इसके लिये प्रस्तुत बजट में सावित्रीबाई फुले बालिका शिक्षा मदद योजना के अन्तर्गत 421 करोड़ रूपये की व्यवस्था की गई है। राज्य सरकार ने अब औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों एवं पॉली टेक्निक्स में दाखिला लेने वाली छात्राओं को भी सावित्रीबाई फुले बालिका शिक्षा मद्द योजना का लाभ देने का निर्णय लिया है।

प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट के आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि राज्य अपने स्रोतों से आर्थिक संसाधन जुटाने में, देश के अग्रणी राज्यों में से एक है। प्रदेश के स्वयं के कर राजस्व का लगभग 70 प्रतिशत राजस्व वाणिज्य कर से ही प्राप्त होता है। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2008-09 में वैट लागू करने के निर्णय के बाद सरकार की आय में काफी वृद्धि हुई। राज्य सरकार ने वैट लागू करने के बाद कर को युक्ति संगत बनाया और कोई ऐसा कर नहीं लगाया जो व्यापार कर के प्रचलन के दौरान न लगा रहा हो।

इसी के साथ सरकार ने कर-संग्रह की प्रक्रिया का कम्प्यूटरीकरण करके तथा पूर्व में स्थापित टोल बैरियर्स को पूरी तरह से हटाकर और कर-संग्रह की तकनीक का अभिनवीकरण करते हुए कर-राजस्व में बढ़ोत्तरी प्राप्त की। सरकार द्वारा उठाये गये इन कदमों से व्यापारियों को काफी सहूलियत हुई और वे स्वयं आगे बढ़कर देय राजस्व का भुगतान कर रहे हैं। यहॉ यह भी उल्लेखनीय है कि वैट लागू होने के बाद जहॉ देश के कई बड़े राज्यों में राजस्व संग्रह में कमी आई है वहीं उत्तर प्रदेश में वैट लागू होने के बाद राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

प्रस्तुत बजट में राज्य सरकार के आत्मविश्वास की झलक मिलती है। सरकार, प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए, आवश्यकतानुसार योजनाएं बनाने और इसके लिए पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था करने में पीछे नहीं हैं। राज्य सरकार ने प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिये 80 हजार करोड़ रूपये का विशेश आर्थिक सहायता पैकेज मंजूर करने के लिए केन्द्र सरकार से कई बार अनुरोध किया लेकिन केन्द्र सरकार द्वारा इस दिशा में कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं की गई है। मजबूर होकर राज्य सरकार ने अपने सीमित संसाधनों के अतिरिक्त निजी क्षेत्र में भी निवेश आकषिZत करने की रणनीति बनायी। राज्य सरकार के प्रति केन्द्र सरकार के उपेक्षात्मक रवैये का आलम यह है कि विभिन्न योजनाओं में केन्द्र सरकार ने अभी तक 5000 करोड़ रूपये की प्रतिपूर्ति नहीं की है। गेहूं एवं चावल के क्रय हेतु राज्य सरकार द्वारा अब तक व्यय किये गये 3000 करोड़ रूपये तथा पिछड़ा वर्ग दशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति के मद में लगभग 2000 करोड़ रूपये की प्रतिपूर्ति अपेक्षित है।

राज्य सरकार अपने संसाधनों से एक हजार से अधिक आबादी वाले सभी बसावटों को पक्की सड़कों से जोड़ चुकी है। सरकार ने 500 से अधिक किन्तु एक हजार से कम आबादी वाले बसावटों को सम्पर्क मार्ग से जोड़ने के लिये प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत भारत सरकार के ग्रामीण विकास मन्त्रालय को 5962 करोड़ रूपये के प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजे हैं। इसी प्रकार केन्द्रीय सड़क निधि के तहत प्रदेश सरकार द्वारा केन्द्र सरकार को 1424 करोड़ रूपये की 60 परियोजनाओं के प्रस्ताव प्रेषित किये गये हैं, जिनकी स्वीकृति भी केन्द्र सरकार के स्तर पर लिम्बत है।

प्रदेश की अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान है। इसलिये राज्य सरकार ने किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों तथा समग्र ग्रामीण विकास को बजट में प्राथमिकता देते हुए कृशि एवं सम्बद्ध कार्यकलापों हेतु 4125.85 करोड़ रूपये तथा सिंचाई क्रार्यक्रमों हेतु 7000 करोड़ रूपये की व्यवस्था की है। सरकार ने कृषि उत्पादों का उचित मूल्य सुनिश्चित करते हुये किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इससे आम जनता को सस्ते दामों में खाद्यान्न उपलब्ध कराने में सहूलियत होगी। किसानों को खाद की समय से उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये अिग्रम भण्डारण की योजना को और प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्णय लेते हुए इस योजना हेतु बजट में 75.11 करोड़ रूपये की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा गॉवों में पम्प सेटों को बिजली के अलग फीडर से जोड़ने हेतु डॉ0 अम्बेडकर कृषि-उर्जा सुधार योजना का शुभारम्भ गत 15 जनवरी, 2010 से किया गया है।

सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में छोटे बच्चों के कुपोषण की समस्या के निवारण हेतु अनुपूरक पुष्टाहार का बजट लगभग दोगुना कर दिया गया है तथा मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से परिवर्तन लागत में वृद्धि की गई है। राज्य सरकार ने प्रदेश के युवाओं को रोजगार के विशेष अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किये हैं। पी0पी0पी0 मॉडल की परियोजनाओं में उपलब्ध होने वाली रोजगार के अवसरों के अलावा सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र में पुलिस आरक्षियों की भर्ती के साथ-साथ सभी राजस्व ग्रामों में सफाई कर्मियों की नियुक्ति की गई। इसके अलावा प्राथमिक शिक्षकों एवं चिकित्सकों की भर्ती से भी रोजगार के नये अवसर व्यापक रूप से सुलभ हुये हैं।


Vikas Sharma
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