राज्य सरकार के समक्ष मेयर के चुनाव प्रक्रिया के सम्बन्ध में कोई प्रकरण विचाराधीन नहीं

0
231

क्षेत्र पंचायतों में चुनाव के लिये 1994 से ही नियमावली है

क्षेत्र पंचायतों के चुनाव हमेशा से गैर दलीय आधार पर हो रहे है

अभी तक नगर निकायों का चुनाव नियमावली न होने के कारण निर्वाचन संचालन आदेश के तहत कराया जाता था

प्रस्तावित नियमावली के प्रारूप के सम्बन्ध में जन-साधारण से आपत्तियॉ, सुझाव आमिन्त्रत करने के लिये 11 मई, 2010 को प्रकाशित असाधारण गजट में 30 दिन का समय दिया गया है
लखनऊ – उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने नगर निकायों में चुनाव के लिए प्रस्तावित नियमावली के सम्बन्ध में आज यहॉ जानकारी देते हुए बताया कि सरकार के समक्ष मेयर के चुनाव प्रक्रिया के सम्बन्ध में कोई प्रकरण विचाराधीन नहीं है। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में कतिपय समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरें निराधार है।

प्रवक्ता ने कहा कि जहॉ तक उत्तर प्रदेश नगर निकायों से सम्बन्धित प्रस्तावित निर्वाचन नियमावली-2010 का सम्बन्ध है, इस प्रकरण में राज्य सरकार ने संविधान एवं नियमावली के अन्तर्गत निर्धारित सभी नियमों का बकायदा पालन किया है। उन्होंने कहा कि सभी को मालूम है कि क्षेत्र पंचायत चुनाव के लिये उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत नियमावली-1994, उत्तर प्रदेश जिला पंचायत नियमावली-1994, उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत नियमावली-1994 तथा उत्तर प्रदेश पंचायत राज नियमावली-1994 पहले से ही बनीं हुई है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र पंचायतों के चुनाव से सम्बन्धित इन नियमों में दलीय आधार पर चुनाव का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। परम्परानुसार गैर दलीय आधारित चुनाव ही होते है। उन्होंने कहा कि इन चुनावों के लिये जो चुनाव चिन्ह भी आवंटित किये जाते है, वे भी किसी राजनीतिक पार्टी के चुनाव चिन्ह से सम्बन्धित नहीं होते।

प्रवक्ता ने कहा कि एक ओर जहॉ क्षेत्र पंचायतों के चुनाव के लिये नियमावली बनायी गई है, वहीं दूसरी ओर अभी तक नगर निकायों का चुनाव नियमवाली न होने के कारण निर्वाचन संचालन आदेश के तहत कराया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि एक्ट के अन्तर्गत राज्य सरकार को इस सम्बन्ध में नियमावली बनाना आवश्यक है। अपने इन्ही दायित्वों को निर्वहन करते हुए राज्य सरकार द्वारा नियमावली बनाने का प्रस्ताव किया गया है। उन्होंने कहा कि उ0प्र नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा-296 तथा उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम-1959 की धारा-87 के तहत सरकार को नगर निकायों में चुनाव के लिये सुसंगत नियम बनाने का पूरा दायित्व है।

सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा नगर निकायों के चुनाव के लिये जो नियमावली प्रस्तावित की गई है, उस पर समस्त सम्बन्धित व्यक्तियों एवं जन साधारण से उनके सम्बन्ध में आपत्तियॉं एवं सुझाव आमन्त्रित करने के लिये पर्याप्त समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नियमावली को 11 मई, 2010 को सरकारी गजट में अधिसूचित कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि गजट में यह स्पष्ट कर दिया गया था कि यदि प्रस्तावित नगर निकायों के चुनाव से सम्बन्धित नियमावली के बारे में यदि कोई आपत्तियॉ और सुझाव है, तो प्रमुख सचिव उ0प्र0 नगर विकास अनुभाग-1, बापू भवन लखनऊ को सम्बोधित करके लिखित रूप से प्रेषित की जानी चाहिये। उन्होंने कहा कि गजट में यह भी स्पष्ट कर दिया गया था कि केवल उन्हीं आपत्तियों एवं सुझावों पर विचार किया जायेगा जो इस अधिसूचना के गजट में प्रकाशित होने की दिनांक से 30 दिनों के भीतर सक्षम अधिकारी को प्राप्त होंगे।

प्रवक्ता ने कहा कि सभी इच्छुक लोग या राजनैतिक दलों को 11 मई, 2010 के गजट में प्रकाशित 30 दिन की अवधि के अन्दर अपनी आपत्तियां एवं सुझाव उचित फोरम पर लिखित रूप से दर्ज करा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नियमावली के सम्बन्ध में जो आपत्तियॉ एवं सुझाव प्राप्त होंगे, उन पर सम्यक विचार करके सरकार द्वारा निर्णय लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि आपत्तियों एवं सुझावों के उचित निस्तारण के बाद ही प्रस्तावित नियमावली को मन्त्रिपरिषद के समक्ष विचार के लिये प्रस्तुत किया जायेगा।

सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि प्रस्तावित नियमावली के सन्दर्भ में नियमानुसार जो प्रक्रिया तय की गई है, उसका लाभ सभी लोगों को उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में अनावश्यक बयानबाजी या किसी अन्य फोरम पर बात उठाने से प्रस्तावित नियमावली को और बेहतर बनाने में कोई लाभ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का राजनैतिक दृष्टिकोण से विरोध करना उपयुक्त नहीं है। इसमें जिसको आपत्ति है, उसे नियमानुसार सुझाव/आपत्ति दाखिल करना चाहिए, ताकि इस कानूनी प्रक्रिया को पूरा किया जा सके।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com