राई/सरसों की खेती में कीट रोगों से बचाव के उपाय

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लखनऊ –  राई की खेती में फूल आने और दाना भरने की अवस्था अधिक  संवेदनशील होती है। राई में झुलसा रोग, सफेद गेरूई रोग, तुलसिता रोग, आरा मक्खी एवं मॉहू कीट आदि का प्रकोप हो जाता है, इनसे बचाव करके अच्छी उपज पाई जा सकती है।

कृषि विभाग के प्रसार शिक्षा एवं प्रशिक्षण ब्यूरो से प्राप्त जानकारी के अनुसार राई में झुलसा रोग के तहत पत्तियों और फलियों पर गहरे कत्थई धब्वे बन जाते हैं जिसमें गोल गोल छल्ले स्पष्ट दिखाई देते हैं। इसके अतिरिक्त सफेद गेरूई रोग में निचली सतह पर फफोले बनते हैं और बाद में पुष्प विन्यास विकृत हो जाता है। जब कि तुलसिता रोग में निचली सतह पर सफेद रोयेन्दार फफून्दी  के साथ ऊपरी सतह पर पीलापन आ जाता है। झुलसा, सफेद गेरूई एवं तुलसिता तीनों ही रोगों पर नियन्त्रण के लिए जिंक मैग्नीज काबोZनेट 75 प्रतिशत दो किलो ग्राम या जीरम 80 प्रतिशत 2 किलोग्राम या जिनेव 75 प्रतिशत 2.5 किलोग्राम प्रति हे0 की दर से 800-1000 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।     इन रोगों के अतिरिक्त आरा मक्खी कीट भी राई में लग जाते हैं। इसकी गिडार काले रंग की होती है, जो पत्तियों को बहुत तेजी से खाती है। इसकी रोकथाम के लिए इन्डोसल्फान 35 ई0सी0 1.25 लीटर पानी या मैलाथियान 50 ई0सी01.5 लीटर, क्यूनालफास 1.5 प्रतिशत धूल अथवा इण्डोसल्फान 4 प्रतिशत धूल अथवा मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत धूल 25 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से प्रयोग करें।

राई में लगने वाला मॉहू कीट भी काफी हानिकारक होता है। यह छोटा एवं कोमल शरीर वाला हरे मटमेले भूरे रंग का कीट है, जिसके झुण्ड पत्तियों, फलों, डंठलों,फलियों आदि पर चिपके रहते हैं एवं रस चूसकर पौधों को कमजोर कर देते हैं। इसकी रोकथाम के लिए मैलाथियान 50 प्रतिशत ई0सी0 2 लीटर या इण्डोसल्फान 35 ई0सी0 1.25 लीटर मोनोक्रोटोफास 36 एस0एल0 0.75 लीट प्रति हे0 की दर से 800-1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

Vikas Sharma
upnewslive.com
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