मेडिकल कॉलेज को मिली सौ़गात

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झांसी- महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एआरटी (एण्टी रेट्रा वॉयरल थेरैपी) सेण्टर खोले जाने को नाको (नेशनल एड्स कण्ट्रोल आर्गनाइजेशन) ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही प्रदेश में दो और सेण्टर खोले जाने को मंजूरी दी गई है। एक कानपुर के कैंसर अस्पताल और दूसरा इटावा मेडिकल कॉलेज में खोला जाएगा। यह सेण्टर इसी साल के अन्त तक में काम करना शुरू कर देगा। एचआईवी मरीजों को दवा या खून की जांच के लिए अब लखनऊ नहीं भागना पड़ेगा।

देश के बेहद पिछड़े इलाकों में शामिल बुन्देलखण्ड में एड्स फैलने की रफ्तार और यहां के मरीजों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए मेडिकल कॉलेज में एआरटी सेण्टर खोले जाने के लिए उत्तर प्रदेश एड्स नियन्त्रण संगठन ने राष्ट्रीय एड्स नियन्त्रण संगठन, दिल्ली को पत्र लिखा था।  महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एआरटी सेण्टर खोले जाने की जानकारी देते हुए इसके लिए जगह की व्यवस्था करने को कहा गया है।  इस सेण्टर के जुलाई तक शुरू हो जाने की बात कही गई है, पर परिस्थितियों को देखते हुए इसके दिसम्बर तक काम शुरू करने की सम्भावना है। जानकारों के अनुसार इस सेण्टर का नोडल अधिकारी डॉ. पीके जैन और लेबोरेट्री का इंजार्च डॉ. आरके अग्रवाल को बनाया गया है। इस सेण्टर के लिए नाको यहां फिजिशियन, स्त्री एवं बाल रोग विशेषज्ञ, यौन रोग विशेषज्ञ के अलावा मेडिकल ऑफिसर, काउंसलर, डाटा मैनेजर, स्टाफ नर्स के अलावा केयर को-आर्डिनेटर की व्यवस्था करेगा। नाको इस सेण्टर के लिए सीटी-4 सेल काउण्टर मशीन के साथ-साथ दवाइया भी उपलब्ध कराएगा। अभी तक इस तरह की जाच लखनऊ, आगरा, वाराणसी, इलाहाबाद, अलीगढ़ और मेरठ में ही उपलब्ध है। इस सेण्टर के बनने के बाद एड्स से प्रभावित मरीजों को यहीं दवा दी जाएगी। बुन्देलखण्ड के जिन-जिन इलाकों में एड्स जांच और परामर्श की सुविधा उपलब्ध है, वहां के मरीजों को दवा लेने के लिए अभी लखनऊ भेजा जाता है। जो सीडी-4 सेल काउण्टर मशीन आ रही है, उससे प्रभावित मरीजों के खून की जांच की जाएगी। इसके साथ ही यहां अवसरवादी संक्रमण निदान केन्द्र भी खुल जाएगा।